PM मोदी के प्लान से पाकिस्तान का कल्याण! एशियाई बैंक ने शहबाज सरकार को भारतीय मॉडल अपनाने को क्यों कहा?

Pakistan-India News: पाकिस्तानी समाज चरमपंथ और कट्टरपंथी विचारधारा में सना हुआ है और देश की इकोनॉमी और राजनीति के गर्त में जाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यही है। पाकिस्तानी स्कूलों में इतनी कट्टर मजहबी तालीम दी जाती है, कि जवान होते होते छात्र पूरी तरह से कट्टरपंथी हो जाते हैं।

और शायद यही वजह है, कि एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) ने पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा योजना - समाज में सभी के लिए आजीवन शिक्षा की समझ (ULLAS) को अपनाने की सलाह दी है, ताकि देश के सड़ चुके एजुकेशन सिस्टम को सुधारा जा सके और क्वालिटी ट्रेनिंग दी जा सके।

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एशियाई विकास बैंक ने शहबाज शरीफ की सरकार को साफ साफ शब्दों में कहा है, कि देश के जर्जर हो चुके एजुकेशन सिस्टम में सुधार लाने की सख्त जरूरत है और देश के सभी बच्चों के स्कूल जाने की जरूरत है, ताकि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके और इसके लिए पाकिस्तान की सरकार को वित्तीय सहायता देने की जरूरत है।

शहबाज शरीफ अपनाएंगे पीएम मोदी का प्लान?

एडीबी ने सिफारिश की है, कि शहबाज सरकार, भारत सरकार की नई केंद्र प्रायोजित योजना "ULLAS" (समाज में सभी के लिए आजीवन शिक्षा की समझ) जैसी अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम शिक्षा प्रथा को अपनाए और उसी प्लान के मुताबिक स्ट्रैटजी बनाए, ताकि उसका काफी फायदा हो।

एडीबी ने इस बात पर जोर दिया है, कि ULLAS योजना संघीय और प्रांतीय सरकारों दोनों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए तत्काल सहयोग करने की आवश्यकता पर जोर देती है और पाकिस्तान में इसी तरह की वर्टिकल योजना पर विचार करते समय सफलता और चुनौतियों के व्यावहारिक सबक दे सकती है।

पाकिस्तान संविधान के मुताबिक, शिक्षा एक प्रांतीय विषय है। हालांकि, 18वें संवैधानिक संशोधन के बाद पूरे देश में पाठ्यक्रमों को स्टैंडर्ड करने के लिए आवाज उठाई गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने "सभी के लिए शिक्षा" के सभी पहलुओं को कवर करने के लिए पांच साल की अवधि के लिए नई केंद्र प्रायोजित योजना यूएलएएस को मंजूरी दी थी।

भारतीय योजना का मकसद न सिर्फ बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना है, बल्कि 21वीं सदी के नागरिकों के लिए आवश्यक अन्य घटकों को भी शामिल करना है, जैसे कि वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वाणिज्यिक कौशल, स्वास्थ्य देखभाल और जागरूकता, बाल देखभाल और शिक्षा, और परिवार कल्याण सहित महत्वपूर्ण जीवन कौशल।

बेकार हो चुकी है पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली

एडीबी ने शहबाज शरीफ से यह सिफारिश उस वक्त की है, जब बैंक के अध्यक्ष मासात्सुगु असकावा जल्द ही पाकिस्तान की यात्रा करने वाले हैं। एडीबी के अध्यक्ष सोमवार को पाकिस्तानी हितधारकों से मिलेंगे।

योजना आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है, कि पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली बेकार हो गई है और इस्लामाबाद को छोड़कर सभी 134 जिले हर एक स्टैंडर्ड में पिछड़ गये हैं। योजना आयोग की जिला शिक्षा प्रदर्शन सूचकांक रिपोर्ट 2023 के निष्कर्षों ने पाकिस्तान में मानव संसाधन संकट को उजागर किया है, जहां लोग बिना शिक्षा या कम शिक्षा के नौकरी के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।

पाकिस्तान के 134 जिलों में से कोई भी शिक्षा क्षेत्र में उच्च प्रदर्शन करने वाले की रेटिंग प्राप्त नहीं कर सका। जिला शिक्षा प्रदर्शन सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, 134 जिलों में से 133 मध्यम से निम्न कैटोगिरी में आते हैं।

एडीबी ने पाकिस्तान सरकार को शिक्षा में टेक्नोलॉजी को शामिल करने को कहा है और एजुकेशन सिस्टम में टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स को शामिल करने की सिफारिश की है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शिक्षा आपातकाल की घोषणा की है, लेकिन अभी भी देश की टूटी हुई शिक्षा प्रणाली को सुधारने में बुरी तरह से नाकाम रहा है। पाकिस्तानी शिक्षा प्रणाली का इस कदर इस्लामीकरण कर दिया गया है, कि ये शिक्षा डिजिटल युग की आवश्यकता को पूरा करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

पाकिस्तान को लड़कियों पर ध्यान केंद्रित करके लगभग 26 मिलियन स्कूली बच्चों की संख्या को कम करने की तत्काल आवश्यकता है। पाकिस्तान के सरकारी स्कूलों पर इतना ज्यादा बच्चों का बोझ है, कि जो बच्चे स्कूल जाते भी हैं, उनकी पढ़ाई नहीं हो पाती है। वहीं, लड़कियों की शिक्षा अत्यंत ही बेकार हो चुकी है। शहबाज शरीफ ने शिक्षा को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल उपाए अपनाने पर जोर दिया है और प्रांतो को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई है, लेकिन वो नाकाफी साबित हो रहे हैं।

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