Turkey Earthquake: 34 साल बाद तुर्की-आर्मेनिया के बीच खोली गई सीमा क्रॉसिंग, जानें क्या है विवाद का कारण?
7 दिसंबर 1988 को आर्मेनिया में दो शक्तिशाली भूकंप आए थे। इस भूकंप की तीव्रता क्रमशः 6.9 और 5.8 थी। आर्मेनिया उस वक्त सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। ऐसा कहा जाता है कि इस हादसे में लगभग 50,000 लोगों की जानें गई थीं।

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तुर्की में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रभावित पीड़ितों की सहायता के लिए आर्मेनिया और तुर्की के बीच शनिवार को सीमा क्रॉसिंग खोल दी गई। यह 34 सालों में पहली बार है जब दोनों देशों के बीच यह सीमा द्वार खोला गया है। समाचार एजेंसी अनादोलु के मुताबिक यह सीमा क्रॉसिंग इससे 2023 से पहले 1988 में खोली गई थी। उस वक्त भी इसकी वजह भूकंप ही था। आर्मेनिया में भूकंप आने के बाद तुर्की ने इसी रास्ते से मानवीय मदद पहुंचाया था।
34 साल पहले आया था भूकंप
7 दिसंबर 1988 को आर्मेनिया में दो शक्तिशाली भूकंप आए थे। इस भूकंप की तीव्रता क्रमशः 6.9 और 5.8 थी। आर्मेनिया उस वक्त सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। ऐसा कहा जाता है कि इस हादसे में लगभग 50,000 लोगों की जानें गई थीं। आर्मेनिया के साथ वार्ता स्थापित करने के लिए जिम्मेदार तुर्की के विशेष दूत सेरदार किलिक ने ट्वीट कर जानकारी दी कि भोजन और पानी समेत सहायता के साथ पांच ट्रक अलीकन बॉर्डर क्रॉसिंग से तुर्की पहुंचे हैं। सेरदार किलिक ने अपने ट्वीट में आर्मेनिया और आर्मेनियाई नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष रुबेन रुबिनयन को धन्यवाद भी कहा। उन्होंने कहा कि मदद में दवा भी शामिल है। वहीं, रुबिनयन ने ट्वीट किया, ''मदद कर पाया, इसकी खुशी है।''
क्या है दोनों देशों के विवाद?
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की और अर्मेनिया के बीच संबंध दशकों से तनावपूर्ण हैं और अर्मेनियाई और जातीय रूप से तुर्की अजरबैजान के बीच संघर्ष के मद्देनजर दोनों पड़ोसियों के बीच भूमि सीमा 1993 से बंद है। दोनों देशों ने कभी भी औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं। दोनों देशों के बीच तनाव का मूल कारण प्रथम विश्व युद्ध के दौर में ओटोमन साम्राज्य में हुईं लोगों की सामूहिक हत्याओं से जुड़ा है, जिसे आर्मेनिया नरसंहार कहता है। वहीं, तुर्किए नरसंहार की बात से इनकार करता है। तुर्की ये स्वीकार करता है कि आर्मेनियाई अपने तुर्क शासकों के खिलाफ उठे और हमलावर रूसियों का पक्ष लिया था तब 3 लाख से अधिक आर्मेनियाई लोगों की मौत हुई थी लेकिन वे जोर देकर कहते हैं कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कई तुर्कों की भी मौत हुई थी और ये कोई जानबूझकर किया गया नरसंहार नहीं था। आपको बतादें कि तुर्की के इनकार के बावजूद लगभग 30 देश आधिकारिक तौर पर अर्मेनियाई नरसंहार को मान्यता देते हैं।
तुर्की में 25 हजार से भी अधिक मौतें
आपको बता दें कि तुर्की में 6 फरवरी को आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप से हुई मौतों की संख्या चौंका देने वाली है। तुर्की और सीरिया में भूकंप से मरने वालों की संख्या लगभग 30 हजार पहुंच गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि अगर अभी भी कोई बचा हो उसे निकाला जा सके। अकेले तुर्की में भूकंप से 25,000 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसा कहा जा रहा है कि भूकंप में मरने वाले लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।












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