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LCH Prachand: चीन की नाक में दम करने वाला भारतीय हेलीकॉप्टर खरीदेगा उसका दुश्मन, दो देशों ने दिखाई दिलचस्पी

LCH Prachand Deal: हथियारों का बाजार बनने की कोशिश में तेजी से काम कर रहे भारत को बड़ी कामयाबी मिल सकती है और स्वदेशी हेलीकॉप्टर एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर को एक नहीं, बल्कि दो-दो बड़े खरीददार मिल सकते हैं।

भारत में बनाए गये लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड हेलीकॉप्टर प्रचंड ने अमेरिका के चिनूक और अपाचे टैंक किलर हेलीकॉप्टरों के साथ एक विशाल हवाई अभ्यास के दौरान दम दिखाया है। इस दौरान एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर का ताकत देखखर इसे खरीदने के लिए कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई है।

LCH Prachand Deal

एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर ने दिखाया दम

राजस्थान के जैसलमेर में विशालकाय हवाई अभ्यास कार्यक्रम में अलग अलग देशों के 120 से ज्यादा विमानों ने भाग लिया था, जिसमें राफेल फाइटर जेट, सुखाई 0MKI, मिग-29, मिराज-2000 के साथ साथ भारत में बना तेजस फाइटर जेट भी शामिल था। इस दौरान इंडियन एयरफोर्स ने अफनी घातक क्षमता का भी प्रदर्शन किया है, जिसमें पहली बार प्रचंड हेलीकॉप्टर की शक्ति का प्रदर्शन किया गया है।

अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर ने पहली बार इस कार्यक्रम में हवा से जमीन पर मार करने वाली गाइडेड मिसाइलों के साथ लक्ष्य पर हमला करके अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया है, जबकि एमआई -17 हेलीकॉप्टरों ने रॉकेट के साथ जमीनी लक्ष्यों पर हमला किया।

भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भारतीय सेना के एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों को अंडरस्लंग मोड में एयरलिफ्ट करके लड़ाकू प्रॉपर्टीज की तेजी से तैनाती का प्रदर्शन किया और जमीन पर दुश्मनों के नकली लक्ष्य को तबाह किया गया।

इस विशालकाय अभ्यास का नाम 'लाइटनिंग स्ट्राइक फ्रॉम द स्काई' नाम था, जिसमें पहली बार रात के दौरान अभ्यास किया गया, जिसमें पहली बार स्वदेशी एलसीएच 'प्रचंड' की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया, जिसमें इसने रॉकेट के साथ गाइडेड लक्ष्यों को बेअसर कर दिया।

दो घंटे में भारतीय वायुसेना ने एक से दो किलोमीटर के दायरे में 40 से 50 टन आयुध गिराया। पहली बार अभ्यास में भाग लेने वाले प्लेटफार्मों में राफेल, प्रचंड हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर और समर सरफेस टू एयर विपन सिस्टम शामिल थे।

भारत में बना है स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्रचंड

एलसीएच प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी मल्टीरोल लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसमें हवा से जमीन पर हमला करने की क्षमता के साथ साथ रेगिस्तान और पहाड़ों में तेजी से ऑपरेशन को अंजाम देने की स्पेशल क्षमता है, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन किया गया है।

LCH प्रचंड, LCA के साथ, भारतीय एयरोस्पेस निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के निर्यात के लिए नामित प्रमुख उत्पादों में से एक है। अर्जेंटीना और नाइजीरिया ने रोटरी-विंग विमान में भारी दिलचस्पी दिखाई है। अर्जेंटीना ने 20 'प्रचंड' हेलीकॉप्टर खरीदने के लेटर ऑफ इंटेट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

भारतीय सेना और इंडियन एयरफोर्स ने 2022 में LCH को अपने बेड़े में शामिल किया था। सेना का इरादा इन विमानों को पाकिस्तान और चीन से लगी सीमा पर तैनात करने का है।

LCH प्रचंड की क्षमता क्या है?

LCH प्रचंड का उत्पादन HAL और फ्रांस की सफ्रान कंपनी के बीच सहयोग के हिस्से के रूप में भारत में किया गया है, जो डबल इंजन हेलीकॉप्टर है।

प्रचंड हेलीकॉप्टर अधिकतम 288 मील प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है, जबकि इसकी लड़ाकू त्रिज्या 500 किमी है, और 21,000 फीट की सर्विस बॉर्डर है, जिसका अर्थ है कि यह दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र - सियाचिन ग्लेशियर पर काम कर सकता है।

इस हेलीकॉप्टर में पायलट और को-पायलट एक ग्लास कॉकपिट में एक साथ बैठते हैं, जो बख्तरबंद पैनलों से सिक्योर होते हैं, जिसे हथियार सिस्टम ऑपरेटर (डब्ल्यूएसओ) के रूप में जाना जाता है।

इसके अलावा, इस हेलीकॉप्टर में 20MM बंदूक को भी शामिल किया गया है, जिससे दो किलोमीटर की दूरी तक निशाना लगाया जा सकता है और ये प्रति मिनट 800 राउंड फायरिंग करने की क्षमता रखता है। स्टब विंग पर 70 मिमी रॉकेट पॉड लगाया गया है, जिसकी डायरेक्ट फायरिंग रेंज 4 किलोमीटर तक और इनडायरेक्ट फायरिंग रेंज 8 किलोमीटर तक है।

LCH Prachand Deal

LCH प्रचंड का क्यों किया गया निर्माण?

1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल संघर्ष के दौरान रूसी MI-25 और MI-35 के अप्रभावी साबित होने के बाद भारत ने इस हेलीकॉप्टर को विकसित करने का फैसला लिया था। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक हल्का, सीक्रेट और ज्यादा स्पीड वाले हेलीकॉप्टर के निर्माण का लक्ष्य रखा था और इसी के तहत इस हेलीकॉप्टर का निर्माण किया गया। एलसीएच के लिए डिजाइन पहली बार 2003 में तैयार किए गए थे।

भारत सरकार ने साल 2006 में स्वदेशी एलसीएच परियोजना को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसके निर्माण में कई बाधाएं आईं, लेकिन करीब एक दशक तक लगातार मेहनत करने के बाद इसके चार प्रोटोटाइप का टेस्ट किया गया, जो कामयाब रहा और फिर साल 2017 और 2019 के बीच इसके ऑपरेशन को मंजूरी दे दी गई।

अपने टेस्ट के दौरान एलसीएच प्रचंड ने समुद्र तल से 4,700 मीटर ऊपर और 500 किलोग्राम भार के साथ कामयाबी के साथ उड़ान भरी थी और अब यह हथियारों और ईंधन के पर्याप्त भार के साथ 5,000 मीटर की दूरी पर उड़ान भरने वाला एकमात्र हेलीकॉप्टर बन गया है।

इंडियन एयरफोर्स की तरकश में नये हथियार

इंडियन एयरफोर्स पहले से ही अमेरिका में बना चिनूक हेलीकॉप्टर, ट्विन इंजन, टेंडेम रोटर मल्टी रोल, वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, जिसका उपयोग सैनिकों, तोपखाने, उपकरण और ईंधन के परिवहन के लिए किया जाता है। मार्च 2019 में चार चिनूक को इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया गया था।

सितंबर 2019 में आठ अमेरिका निर्मित अपाचे स्टील्थ लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, जिससे बल की मारक क्षमता में काफी इजाफा हुआ।

इन दोनों को चीन से लगती सीमा पर हालिया तनाव के बीच पूर्वी सीमा पर तैनात किया गया है। लद्दाख में अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों ने जरूरत पड़ने पर जमीनी बलों को सामरिक सहायता प्रदान की है, इसके अलावा चीन के साथ तनाव के बीच जवानों और उपकरणों को ले जाने में मदद करने के लिए चिनूक भारी वजन वाले हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया गया।

भारत अब जानबूझकर रूसी हथियार प्लेटफार्मों से दूर हो रहा है। भारतीय सशस्त्र बल या तो स्वदेशी हथियारों को शामिल कर रहे हैं, या सीधे सरकारों के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी बना रहे हैं।

अमेरिका अब रक्षा उपकरणों के एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में उभरा है, जिसमें हेलीकॉप्टर के साथ साथ ड्रोन डील तक शामिल हैं।

वहीं, अगर अर्जेंटीना और नाइजीरिया भारत से एलसीएच-हेलीकॉप्टर खरीदते हैं, तो भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा और भविष्य में भारतीय हथियार बाजार को दुनियाभर में मान्यता मिलनी शुरू हो जाएगी।

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