आतंकियों को सबक सिखाएंगी ईराक-सीरिया की युवतियां
किसी का परिवार, किसी के अनेक दोस्त, न जाने कितने ही लोगों की जान ले चुके हैं आतंकवादी। आतंकियों के इसी आतंक को खत्म करने के लिए ईराक और सीरिया की मुस्लिम महिलाओं ने बंदूकों अपने कंधो पर उठा ली हैं। महिला लड़ाकू की ईकाईयों में लगातार महिलाएं भर्ती के लिए पहुंची रही हैं। जिनकी संख्या हजारों का आंकड़ा पार कर चुकी है। सुबह-शाम खतरों से लड़ने की ट्रेनिंग लेकर, आतंकियों के हौसले पस्त करने का दम भर रही हैं।

सीमा के बिल्कुल समीप सीरिया का शहर कोबानी एक माह से भी अधिक समय से आई.एस.आई.एस. के जबरदस्त हमले के आघात झेल रहा है। आतंकियों ने इसे 3 दिशाओं पूर्व, दक्षिण और पश्चिम से घेर रखा है। सीरियाई कुर्दों के सशस्त्र लड़ाकू शहर की रक्षा कर रहे हैं। इन लड़ाकुओं में महिलाओं की संख्या हजारों में है, जोकि मुस्लिम जगत में एक बिल्कुल ही अनहोनी-सी बात लगती है क्योंकि वहां युद्ध को अक्सर मर्दानगी से जोड़कर देखा जाता है।
कुर्द लड़ाकों ने अप्रैल में निरोल महिला लड़ाकू इकाइयां स्थापित की थीं। अब महिला लड़ाकुओं की संख्या 10,000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। सीरियाई कुर्द क्षेत्र के रक्षा अधिकारी नासर हज मंसूर ने बताया कि महिला लड़ाकुओं ने आई.एस.आई.एस. के विरुद्ध युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
उल्लेखनीय है कि आतंकी हमलावरों ने फतवा जारी रखा है कि महिलाएं केवल तभी घर से निकलें जब ऐसा करना अत्यंत जरूरी हो गया हो। कुर्द महिलाएं इस फतवे के बावजूद डटी हुई हैं। एक वर्ष से भी अधिक समय से युद्ध से जुड़ी हुई अफशीं कोबानी अब एक ऐसे यूनिट की कमांडर है जिसमें महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी हैं।












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