लद्दाख में पीछे हटने के बाद चीन की सेना को ट्रेनिंग में नजर आई कमी, जिनपिंग का जंग जीतने लायक बनाने पर जोर
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को ऐलान किया है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेना के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा है कि देश सीमापर किसी भी एकतरफा कार्रवाई को मंजूरी नहीं देगा और ऐसे दुस्साहस को किसी भी कीमत पर रोकेगा। गौरतलब है कि लद्दाख में भारत और चीन की सेना के कोर कमांडर स्तर की 9वीं दौर की बातचीत के बाद भारतीय सेना की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के साथ मई, 2020 वाली स्थिति पर वापस लौटने की सहमति बनने पर यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन, ऐसे वक्त में चीन की सेना ने अपनी सेना की ट्रेनिंग को हर तरह से बेहतर करने के लिए नई तरह की ट्रेनिंग सिस्टम बनाने की बात कहकर खुद की क्षमता को सवालों के घेरे में ला दिया है। शनिवार को चीन की सेना की ओर हुए ऐलान के तहत पीएलए की ट्रेनिंग अब हर तरह से मजबूत की जाएगी ताकि वह युद्ध जीतने में भी सक्षम बन सके। इस तरह से शी जिनपिंग उसे अब दुनिया की नंबर एक मिलिट्री बनते देखना चाहते हैं।

लद्दाख के बाद बेहतर मिलिट्री ट्रेनिंग में जुटा चीन
चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को चाइनीज मिलिट्री की घोषणा के तहत नए मिलिट्री ट्रेनिंग सिस्टम तैयार करने की बात कही गई है। रविवार को चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट ने बताया कि इसके जरिए पीएलए के लिए ऐसा युद्धाभ्यास सुनिश्चित किया जाएगा, जो पूरी तरह से जंग के हालातों से निपटने जैसा होगा, ताकि तेजी से बदल रहे वैश्विक हालातों और 'बाहरी खतरों' से निपटा जा सके। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसकी मंजूरी दी है, जो सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन भी हैं।

पीएलए को जंग जीतने लायक बनाना चाहते हैं जिनपिंग
शनिवार को इसको लेकर पीएलए डेली में एक और विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गई है, जिसमें इस फैसले को विस्तार से बताते हुए कहा गया है कि चीन की सेना को असली युद्ध के लिए तैयार करने के साथ ही, साझा युद्धाभ्यास को बढ़ाने, ट्रेनिंग में तकनीक पर जोर देने, टैलेंट को मजबूत करने और ट्रेनिंग के नियमों और युद्ध जीतने के पैटर्न की अहमियत की बात भी इसमें शामिल है। यह ट्रेनिंग सिर्फ जवानों को ही नहीं, बल्कि सैन्य कमांडरों को भी दी जाएगी, जिसके लिए युद्ध जैसा माहौल तैयार करना प्राथमिकताओं में शामिल होगा। सोंग झोंगपिंग नाम के एक चाइनीज सैन्य विशेषज्ञ ने कहा है कि पहले की ट्रेनिंग के मुकाबले इसमें ट्रेनिंग को असली युद्ध की स्थिति से तालमेल पर जोर है। जिनपिंग चाहते हैं कि उनकी सेना जंग जीतने के भी काबिल बने।

अमेरिका से मुकाबले के लिए तैयारी?
एक और चाइनीज मिलिट्री एक्सपर्ट के हवाले से बताया गया है( जिसका नाम जाहिर नहीं किया गया है) कि अमेरिकी सेना दुनिया भर में लगातार ऑपरेशन में शामिल रहती है,जिससे उसका प्रशिक्षण निरंतर जारी रहता है। लेकिन, उसके मुताबिक चीन ने दशकों से 'असल लड़ाई' नहीं लड़ी है, इसलिए बेहतर ट्रेनिंग और वह भी युद्ध कौशल के हिसाब से इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली ट्रेनिंग बहुत ही आवश्यक है। हालांकि, इस एक्सर्ट ने यह भी दावा किया है चीन कभी भी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन उच्च-स्तरीय ट्रेनिंग तो उसकी सेनाओं के लिए बहुत ही जरूर हो चुकी है। सोंग ने दावा है कि चीन लगातार वैश्विक खतरे झेल रहा है, खासकर शक्तिशाली अमेरिका से। इसलिए उसके लिए जरूरी है कि वह अपने सैनिकों को युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रखे।

पीएलए को अत्याधुनिक बनाने पर है शी जिनपिंग का जोर
गौरतलब है कि शी जिनपिंग ने अक्टूबर 2017 में ही चीन की सेना को 2035 तक पूरी तरह से अत्याधुनिक बनाने और इस शताब्दी के मध्य तक अपनी सेना को पूरी तरह से बदल डालने का संकल्प लिया था। चीन के एक्सपर्ट मानते हैं कि जिस नई ट्रेनिंग सिस्टम की घोषणा की गई है, वह जिनपिंग के उसी लक्ष्य और मकसद के मुताबिक है।












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