चीन के बाद अमेरिका ने दिया बांग्लादेश को रोहिंग्याओं की म्यांमार वापसी में साथ का भरोसा

चीन के बाद अमेरिका ने दिया बांग्लादेश को रोहिंग्याओं की वापसी में साथ का भरोसा

नई दिल्ली। म्यामांर से भागकर बांग्लादेश आए रोहिंग्या मुसलमानों को वापस अपने देश भेजने के लिए चीन के बांग्लादेश को समर्थन के बाद अमेरिका भी इस मामले पर आगे आया है। अमेरिका ने बांग्लादेश को रोहिंग्या समस्या से निपटने के लिए हर मुमकिन मदद की बात कही है। अमेरिका ने म्यांमार से जबरदस्ती खदेड़े गए रोहिंग्याओं को सुरक्षित और शांति से वापस उनके देश भेजे जाने की बात कही है।

of Rohingya refugees

खबरों के मुताबिक अगस्त में म्यांमार में हिंसा के बाद छह लाख से ज्यादा रोहिंग्या रखाइन प्रान्त से बांग्लादेश पहुंचे हैं। बांग्लादेश ने म्यांमार से अपने नागरिकों को वापस लिए जाने की बात कही है, जो यहां कैंपों में रह रहे हैं। अमेरिका का हालिया रुख बांग्लादेश के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो लगातार शरणार्थियों के समस्या से जूझ रहा है। यूएस ने बांग्लादेश को रोहिंग्याओं की उनके देश वापसी के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दोनों तरह की मदद का भरोसा दिलाया है। अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ मिलकर म्यांमार पर अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए दबाव बनाने की भी बात कही है। असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर द ब्यूरो ऑफ पॉपुलेशन, रिफ्यूजी एंड माइग्रेशन सिमन हेनशॉ ने ढाका दौरे के बाद ये बात कही है।

बांग्लादेश लगातार म्यांमार पर रोहिंग्याओं की वापसी के लिए दबाव बना रहा है, वहीं म्यांमार मे मुस्लिमों की वापसी में हो रही दे रही देरी के लिए बांग्लादेश को जिम्मेदार ठहराया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बाद म्यांमार ने उन रोहिंग्या मुस्लिमों की देश वापसी का वादा किया है जो सत्यापन के मानदंडों पर खरे उतरेंगे। इन सत्यापन मानदंडों की कोई तय रूपरेखा अभी तक नहीं है। इस कारण लोगों में डर है कि बहुत कम संख्या में रोहिंग्या वापसी कर सकेंगे।

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