यूक्रेन में अब तक का सबसे खूनी दिन, 48 लोगों की मौत
कीव। यूक्रेन के ओडेसा शहर में सरकार समर्थक और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की झड़प में 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 174 घायल हो गए हैं। मरने वालों में अधिकतर रूस समर्थक लड़ाके हैं।
यूक्रेन समर्थकों ने ट्रेड यूनियन की एक इमारत में आग लगा दी, जिसमें धुएं के कारण दम घुटने से 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि आग से बचने की कोशिश में इमारत की खिड़कियों से छलांग लगाने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई।
यूक्रेन के चरमपंथी राष्ट्रवादी समूह 'राइट सेक्टर' और रूसी समर्थक लड़ाकों के बीच झड़प में कई लोग घायल हो गए। करीब 50 लोगों ने चिकित्सा सहायता मांगी, जिनमें से 10 पुलिसकर्मी हैं।
ओडेसा में 43 लोगों की मौत के बाद स्थानीय नगरपालिका सरकार ने शहर में तीन दिवसीय शोक की घोषणा की है। पुलिस के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत शुक्रवार को देश के पूर्वी शहर खारकोव के फुटबॉल प्रशंसकों तथा यूक्रेन के 'राइट सेक्टर' के अति-राष्ट्रवादियों के बीच झड़प से हुई, जो कीव से पहुंचे हुए थे।
उसी दिन यूक्रेन की सेना ने स्लोविआन्स्क में रूसी समर्थकों द्वारा कब्जा जमाए गए सरकारी इमारतों को खाली करवाने के लिए कार्रवाई की।
आगे की स्लाइड्स में देखिए कि यूक्रेन में जारी इस तनाव की असली वजह और वहां पर जारी हालात।

फरवरी में शुरू हुआ खून-खराबा
यूक्रेन में जारी तनाव के इस दौर को क्रीमियन क्राइसिस का नाम दिया गया है। फरवरी में यूक्रेन में एक आंदोलन की शुरुआत हुई। इस आंदोलन में वहां के राष्ट्रपति विक्टर योनूकोविच को उनके पद से हटा दिया गया। 27 फरवरी को रूस ने यहां पर अपने सैनिक भेजे जिन्होंने क्रीमिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।

रूस के साथ यूक्रेन की जनता
क्रीमिया ने इन हालातों पर एक जनमत संग्रह कराया। सूत्रों के मुताबिक इस जनमत संग्रह में 95 प्रतिशत लोगों ने रूस पर अपना भरोसा जताया था। हालांकि अमेरिका और दूसरे देशों को इस जनमत संग्रह की वैधानिकता पर शक है।

विरोधियों को मिल रहा आतंकियों का साथ
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने इस संघर्ष में अपने दो हेलीकॉप्टर के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि हेलीकॉप्टर को सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से मार गिराया गया। इससे साबित होता है कि जिन लोगों के खिलाफ सेना ने अभियान छेड़ा था, वे सामान्य नागरिक नहीं, बल्कि हथियारबंद व प्रशिक्षित आतंकवादी थे।

सुधर जाओ और समझदारी से काम लो
वहीं, रूस ने यूक्रेन की सेना की ओर से की गई कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि यूक्रेन 17 अप्रैल को हुए जेनेवा समझौते का सम्मान नहीं करता। रूस के प्रधानमंत्री दमित्र मेदवेदेव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यूक्रेन की सरकार में बैठे लोग समझदारी से काम लें, वरना देश के लिए यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

रूस से मांगी मदद
बताया जा रहा है कि अब तक रूस के पास अब तक यूक्रेन के हजारों लाखों लोगों ने मदद के अपील की है। इन लोगों ने रूस को चिट्ठी भेजकर मदद की मांग की है।

मई में होने वाले चुनाव
यूक्रेन में 25 मई को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं लेकिन जिस तरह के हालात हैं उसकी वजह से इन चुनावों को टालने की अपील की जा रही है।












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