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Gen Z Protest: Nepal आंदोलन के बीच कैलाश मानसरोवर में फंसे 2000 भारतीय तीर्थयात्री, ऑक्सीजन खत्म!

Gen Z Protest: नेपाल में चल रहे Gen Z आंदोलन के चलते तिब्बत के दारचेन में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री मुसीबत में फंस गए हैं। इस आंदोलन की वजह से तीर्थयात्रियों की भारत वापसी फिलहाल असंभव दिख रही है। दारचेन समुद्र तल से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी इलाका है, जहां रहने के लिए जगह, ऑक्सीजन और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है।

ऑक्सीजन सपोर्ट में मुश्किल

दारचेन में फंसे केरल के त्रिशूर निवासी डॉ. सुजॉय सिधन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने अपनी परिक्रमा पूरी कर ली है, लेकिन अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा, "दारचेन एक सीमित आवास वाला शहर है। परिक्रमा के बाद लौटने वाले लोग अक्सर बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट वाले कमरों की ज़रूरत होती है। हम जैसे लोग, जिन्होंने परिक्रमा पूरी कर ली है, दूसरों के लिए जगह नहीं बना पा रहे।"

Gen Z Protest

स्थानीय चीनी अधिकारी कुछ तीर्थयात्रियों को चीन-नेपाल सीमा पर स्थित छोटे शहरों में भेज रहे हैं, लेकिन उन्हें लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी है।

अचानक बंद हुई सीमाएं

सिधन और उनके साथ ग्रुप में गए लोगों ने नेपाल के एक निजी ऑपरेटर के माध्यम से यात्रा शुरू की थी। तीन दिन पहले उन्होंने मानसरोवर की परिक्रमा पूरी की थी। इसी बीच नेपाल में हालात अचानक बिगड़ गए, जहां Gen Z आंदोलन ने सरकार को गिरा दिया और सीमाएं बंद हो गईं। अनुमान है कि दारचेन में इस समय लगभग 2,000 तीर्थयात्री, जिनमें अधिकांश भारतीय हैं, फंसे हुए हैं और वापसी को लेकर बुरी तरह फंसे हुए हैं। न उनके सामने कोई विकल्प है और न कोई मदद।

अब तक नहीं पहुंची मदद

सूत्रों के अनुसार, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास चीनी अधिकारियों के संपर्क में है और वापसी के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, तीर्थयात्रियों का कहना है कि उन्हें अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है।

सिधन ने चिंता जताते हुए कहा, "हर कोई नेपाल में फंसे भारतीयों की बात कर रहा है, लेकिन दारचेन में 2,000 से अधिक भारतीय नागरिक बदतर परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। इनमें से कई बुजुर्ग हैं या पहाड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं, जिन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की ज़रूरत है।"

नेपाल ने बंद किए सभी रास्ते

भारत और चीन के बीच हुए समझौते के बाद इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई। सरकारी एजेंसियां सिक्किम और उत्तराखंड से लगभग 750 तीर्थयात्रियों को ले गईं थीं। वहीं, हजारों अन्य तीर्थयात्रियों ने निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा की, जिनका मार्ग नेपालगंज-हिल्सा-दारचेन होता है। यही मार्ग वापसी का एकमात्र विकल्प है, लेकिन नेपाल की सीमा बंद होने के कारण यह अब बंद हो गया है।

और बढ़ सकती है समस्या

सिधन ने बताया कि लगातार अधिक लोग परिक्रमा पूरी करके लौट रहे हैं, जिससे दारचेन में स्थिति और बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भारतीय अधिकारियों का फोन आया था, लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि
"हम अब अपनी वापसी की सुविधा के लिए विदेश मंत्रालय से समर्थन की तलाश कर रहे हैं,"
फिलहाल इस मामले पर सरकार की तरफ से कुछ ठोस कदम सामने नहीं आया है। उम्मीद है कि विदेश मंत्रालय और गृहमंत्रालय इस मामले में जल्द कदम उठाएंगे।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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