चीन के साथ 13वें दौर की वार्ता फेल, PLA ने तीनों प्वाइंट्स से हटने से किया इनकार, क्या और बढ़ेगा तनाव?
दोनों सेनाओं द्वारा जारी किए गए बयानों से ऐसा मालूम होता है, कि चीन की सेना पीएलए 12वें दौर की वार्ता, जो कामयाब रही थी, उससे आगे जाने के लिए तैयार नहीं है।
नई दिल्ली, अक्टूबर 11: रविवार को भारत-चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मैराथन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका और 13वें दौर की बातचीत फेल हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सेना पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बाकी बचे टकराव के तीन प्वाइंट्स से पीछे हटने के लिए इनकार कर दिया। जिसके बाद दोनों देशों की सेनाओं की बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सेना ने हॉट स्प्रिंग्स, देपसांग बुलगे और चार्डिंग नाला जंक्शन से पीछे हटने से इनकार कर दिया।
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सरहद पर चीन की सीनाजोरी
दोनों सेनाओं द्वारा जारी किए गए बयानों से ऐसा मालूम होता है, कि चीन की सेना पीएलए 12वें दौर की वार्ता, जो कामयाब रही थी, उससे आगे जाने के लिए तैयार नहीं है। चीन की तरफ से जारी बयान से पता चलता है कि, मानो वो कह रहा हो कि जितनी सहमति बन चुकी है, भारत को उसी में खुश हो जाना चाहिए। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता सीनियर कर्नल लॉन्ग शाओहुआ ने एक बयान में कहा कि, "स्थिति को गलत तरीके से समझने के बजाय, भारतीय पक्ष को चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में मिली 'कठिन जीत' की स्थिति पर खुश होना चाहिए।"
वहीं, भारत की तरफ से दिए गये बयान में कहा गया है कि, एलएसी पर तनाव की स्थिति चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने को बदलने की कोशिशों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन की वजह से बनी थी, इसीलिए ये जरूरी है कि चीन की सेना बाकी जगहों की तरह इन क्षेत्रों में भी उचित कदम उठाए, ताकि पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ शांति और स्थिरता बहाल हो सके

जारी रहेगा भारत-चीन सीमा विवाद
भारतीय बयान में कहा गया है कि, यह दोनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा हाल ही में हुई दुशांबे बैठक में दिए गए सलाह के मुताबिक होना चाहिए।जहां वे इस बात पर सहमत हुए थे कि, दोनों पक्षों को बाकी बचे मुद्दों को भी जल्द से जल्द हल करना चाहिए। भारतीय पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि बाकी क्षेत्रों के ऐसे समाधान से द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की सुविधा होगी।
अधिकारियों के अनुसार, एलएसी पर चीनी पक्ष के साथ मोल्डो में रविवार को सुबह 10.30 बजे 13वें दौर की बातचीत शुरू हुई थी। यह आखिरी दौर की बातचीत के दो महीने से अधिक समय बाद हुआ था। जिसके कारण अगस्त की शुरुआत में गोगरा (पैट्रोल पॉइंट -17 ए) में तैनात सैनिकों की तैनाती हुई, जो सीमा पर झड़पों के फ्लैशप्वाइंट में से एक था। अधिकारियों ने पहले कहा था कि, हॉट स्प्रिंग्स में तैनात चीनी सैनिकों की वापसी ही इस बैठक का मुख्य एजेंडा था।

सीमा पर भारी तनाव
आपको बता दें कि भारत और चीन की सेना के बीच सरहद पर काफी तनाव की स्थिति है और दोनों देशों ने भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती एलएसी पर कर रखी है। चीन और भारत, दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर काफी तेजी से निर्माण कार्य कर रही है और आने वाली सर्दी को लेकर रिपोर्ट है कि, दोनों देशों की तरफ से करीब डेढ़-डेढ़ लाख से ज्यादा सैनिक एलएसी पर प्रचंड सर्दी में मौजूद रहेंगे। वहीं, चीन की तरफ से भारत को धमकी भी दी गई है।
चीन की सरकारी मीडिया ने गीदड़भभकी देते हुए कहा है कि, लगता है भारत ने पिछले साल जून की घटना के बाद कुछ नहीं सीखा है। आपको बता दें कि, इस साल फरवरी में दोनों पक्षों ने लद्दाख में पैंगोंग त्सो से सैनिकों और हथियारों को वापस खींच लिया था। लेकिन, अभी भी एलएसी पर दोनों देशों की तरफ से 50,000 से 60,000 सैनिक मौजूद हैं और पूर्वी लद्दाख में विध्वंसक हथियारों का जखीरा भी तैनात है।












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