सब्जी बेचकर हासिल किया सफलता का मुकाम, कुछ ऐसी है सिविल जज बनी अंकिता कि कामयाबी की कहानी!

इंदौर, 5 मई: कहते हैं मंजिले उन्ही को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है. जी हां, इन्हीं पंक्तियों को सच कर दिखाया है इंदौर की बेटी अंकिता नागर ने, अंकिता के पिता सब्जी बेचने का काम करते हैं, जहां उनके इस काम में उनकी मां और खुद अंकिता भी उनका पूरा साथ देती हैं. वहीं अंकिता पढ़ने में भी काफी होशियार हैं, जिसका परिणाम रहा कि अंकिता ने सिविल जज की परीक्षा को पास कर लिया है. अंकिता की इस उपलब्धि पर ना सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे शहर और पूरे देश को गर्व है, क्योंकि जिन परिस्थितियों में अंकिता ने यह मुकाम हासिल किया है, वह उनके बुलंद हौसले का नायाब उदाहरण पेश करता है. इंदौर के मुसाखेड़ी क्षेत्र में रहने वाली अंकिता नागर रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थी. वहीं शाम को जब पिता के सब्जी के ठेले पर भीड़ ज्यादा हो जाती थी, तब खुद अंकिता अपने पिता का साथ देने के लिए ठेले पर नजर आती थी.

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दिन-रात एक कर हासिल किया मुकाम

अंकिता ज्यादा से ज्यादा समय अपनी पढ़ाई को दिया करती थी, दिन में वह 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थी, तो वहीं शाम को पिता के साथ सब्जी बेचने का काम संभालती थी. वहीं इसके बाद अंकिता, रात को भी पढ़ाई किया करती थी, जिसका परिणाम रहा कि सिविल जज की परीक्षा में अंकिता ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए, इस परीक्षा को पास किया है. वहीं अंकिता की इस उपलब्धि के बाद उनका पूरा परिवार बेहद खुश नजर आ रहा है.

माता-पिता के दिए हौसले से हासिल किया मुकाम

अंकिता पिछले 3 सालों से सिविल जज बनने की तैयारी कर रही थीं, जहां वह लगातार परीक्षा देती रहती थीं, दो बार अंकिता का सिलेक्शन नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें हौसला दिया, जिसका परिणाम रहा कि आखिरकार अंकिता ने सिविल जज परीक्षा को पास करते हुए अपना मुकाम हासिल किया. अंकिता अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं.

संघर्ष से सफलता तक ऐसा रहा अंकिता का सफर

संघर्ष से लेकर सफलता तक यदि अंकिता नागर के सफरनामे पर नजर डालें तो अंकिता का यह सफर बड़ा ही संघर्ष भरा रहा है. अंकिता कि माता की माने तो अंकिता ने लंबे समय तक संघर्ष किया है. कई बार अंकिता की पढ़ाई जारी रखने के लिए लोगों से पैसे तक उधार लिए, लेकिन कभी भी अंकिता की पढ़ाई रुकने नहीं दी. इसी का परिणाम रहा कि आखिरकार अंकिता को सफलता हाथ लगी और उन्होंने सिविल जज की परीक्षा को पास किया.


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