Indore news: बंदर की मौत पर गमगीन हुआ गांव, बैंड-बाजे से निकली अंतिम यात्रा, बड़े पैमाने पर होगा मुक्तिभोज
मध्य प्रदेश के इंदौर से एक ऐसा मामला निकलकर सामने आया है, जिसने मानवता का सकारात्मक चेहरा सभी के सामने लाकर रख दिया। यहां खाती पिपलिया गांव में बंदर की मौत के बाद उसकी शव यात्रा निकाली गई। साथ ही उसका रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार भी किया गया। वहीं अब ग्रामीणों की मानवता की हर तरफ चर्चा हो रही है।
इंदौर जिले के खाती पिपलिया गांव में बंदर की मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने रीति रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने आगामी दिनों में बंदर के मुक्तिभोज का कार्यक्रम भी पूरे गांव के सहयोग से बड़े पैमाने पर करने का फैसला लिया है।

कुछ ऐसा है मामला
दरअसल, इंदौर जिले के खाती पिपलिया गांव में एक बंदर चार से पांच दिनों तक इमली के पेड़ पर बैठा था, जहां अचानक बंदर की बीमार हो जाने के बाद मौत हो गई। वहीं बंदर की मौत हो जाने के बाद पूरा गांव गमगीन हो गया, जहां सभी बंदर की मौत का दुख मानने लगे। वहीं ग्रामीणों ने फैसला किया कि, बंदर का अंतिम संस्कार रीती-रिवाज के साथ किया जाएगा, जहां इसके बाद ग्रामीणों ने बंदर की शव यात्रा बैंड-बाजे के साथ निकाली। वहीं रीति रिवाज के साथ बंदर का अंतिम संस्कार किया गया। उधर, अब आने वाले दिनों में ग्रामीण बंदर की मुक्तिभोज का कार्यक्रम भव्य पैमाने पर करने की तैयारी कर रहे हैं।
तीसरा और मुक्तिभोज का कार्यक्रम होगा
ग्रामीणों ने बताया कि, बंदर बीमार था, जहां बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई है। वहीं ग्रामीणों ने रीति-रिवाज के साथ बंदर का अंतिम संस्कार किया है, तो वहीं आने वाले दिनों में 9 तारीख को बंदर के तीसरे का कार्यक्रम रखा गया है। इसके 11 दिन बाद मृत्यु भोज का कार्यक्रम होगा, जिसमें पूरा गांव सहयोग कर मृत्यु भोज कार्यक्रम आयोजित करेगा। वहीं इस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें आसपास के ग्रामीणों को बुलाया जाएगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो बंदर की मौत के बाद अंतिम संस्कार का यह अनोखा मामला है, जिसमें ग्रामीण बंदर का अंतिम संस्कार किसी व्यक्ति की तरह रीति-रिवाज के साथ कर रहे हैं।
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