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Indore News: तुर्किये की कंपनी पर चला महापौर का बुलडोजर, ‘असिस गार्ड’ का BRTS ठेका रद्द, मेट्रो प्रोजेक्ट

Indore News: इंदौर नगर निगम में एक बड़ा प्रशासनिक धमाका हुआ है। तुर्किये (तुर्की) की कंपनी 'असिस गार्ड' का बीआरटीएस से जुड़ा ठेका इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

यह फैसला न सिर्फ इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा रहा है, बल्कि भोपाल-इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी अब सवाल उठने लगे हैं, जहां यही कंपनी ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम स्थापित कर रही है।

Indore News Mayor bulldozer runs on Turkish company in Indore Assis Guard BRTS contract cancelled Metro project

क्या है पूरा मामला?

नगर निगम सूत्रों की मानें, तो महापौर को जैसे ही जानकारी मिली कि इंदौर बीआरटीएस का संचालन तुर्किये की कंपनी असिस गार्ड के पास है, उन्होंने तत्काल अधिकारियों को आदेश दिया कि टेंडर तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही, कंपनी को निगम में अब तक क्या-क्या काम सौंपा गया है, इसकी पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

क्यों टूटा ठेका?

दरअसल, बीआरटीएस (Bus Rapid Transit System) से संबंधित कई तकनीकी और कानूनी जटिलताएं सामने आ चुकी थीं। हाल ही में कोर्ट ने बीआरटीएस को तोड़ने के आदेश दिए, जिसके बाद निगम ने पहले से तय कर लिया था कि बीआरटीएस से जुड़ी सभी कंपनियों के ठेके रद्द कर दिए जाएंगे। असिस गार्ड का यह फैसला इस नीति का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कंपनी, अंतरराष्ट्रीय विवाद?

असिस इलेक्ट्रॉनिक ब्लिसिम सिस्टमेलेरी, तुर्किये की बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनी है, जो ऑटोमैटिक किराया संग्रहण (Fare Collection Systems) में विशेषज्ञता रखती है। साल 2024 में, एमपी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने भोपाल और इंदौर मेट्रो के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए थे। इस प्रक्रिया में शामिल तीन कंपनियों में से, असिस गार्ड ने सबसे कम राशि (186.52 करोड़ रुपये) की बोली लगाकर टेंडर जीत लिया।

Indore News: क्या मेट्रो प्रोजेक्ट भी फंसेगा?

टेंडर जीतने के बाद असिस गार्ड ने भोपाल के सुभाष नगर, डीबी मॉल, रानी कमलापति स्टेशन समेत कई जगहों पर गेट और फेयर सिस्टम लगा दिए हैं। इंदौर में गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक 5 स्टेशनों पर सिस्टम इंस्टॉल हो चुका है। कुल मिलाकर, भोपाल-इंदौर के पहले फेज के 53 मेट्रो स्टेशनों पर यही कंपनी किराया संग्रह प्रणाली और गेटिंग सिस्टम तैयार कर रही है। अब जब बीआरटीएस से कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, तो प्रशासनिक हलकों में यह सवाल गूंजने लगा है।

"क्या मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी इस कंपनी की भूमिका की समीक्षा होगी?"

मेयर के तेवर सख्त, अफसरों से मांगी रिपोर्ट: महापौर पुष्यमित्र भार्गव का यह फैसला चौंकाने वाला तो है ही, संकेतात्मक भी है। यह उन सभी ठेकेदारों और कंपनियों के लिए साफ संदेश है जो:

या तो अपनी पृष्ठभूमि संदिग्ध रखते हैं

या फिर संवेदनशील शहरी योजनाओं में अपारदर्शी तरीकों से घुसपैठ करते हैं

महापौर ने अधिकारियों से कहा है कि: "तुर्किये की इस कंपनी ने निगम के किन-किन क्षेत्रों में क्या-क्या काम किया है, इसकी विस्तृत जानकारी 48 घंटे में पेश की जाए।"

पिक्चर अभी बाकी है?

यह फैसला एक राजनीतिक, प्रशासनिक और कूटनीतिक 'ट्रिपल इफेक्ट' ला सकता है। राजनीतिक स्तर पर महापौर का यह निर्णय राष्ट्रवाद से जुड़ी भावनाओं को भी छूता है, खासतौर पर एक विदेशी कंपनी को हटाने का साहसिक कदम।प्रशासनिक नजरिए से, यह फैसला नगर निगम की सतर्क निगरानी और जवाबदेही को दर्शाता है।

और कूटनीतिक रूप से, यह कदम तुर्किये से व्यापारिक रिश्तों पर सूक्ष्म असर डाल सकता है, खासकर जब मेट्रो जैसे महापरियोजनाओं में विदेशी निवेश शामिल हो।

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