International Women's Day पर 'साड़ी वॉकथॉन', इंदौर में महिलाओं ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
International Women's Day की पूर्व संध्या पर इंदौर में अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां महिलाओं ने परंपरागत वेशभूषा साड़ी में वॉकेथोन की, जिसमें लगभग 40 हजार से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया। वॉकथान में शामिल हुए CM मोहन यादव ने सभी महिलाओं को महिला दिवस की बधाई देने के साथ ही महिलाओं का हौसला बढ़ाया।
वॉकथान शहर के नेहरू स्टेडियम से शुरू हुई, जहां पुनः वॉकथान नेहरू स्टेडियम पर जाकर समाप्त हुई। इस दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने वॉकथान में शामिल महिलाओं की हौसलाफजाई की, सीएम मोहन यादव के साथ वॉक थान में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, भारतीय परिधान साड़ी स्त्रीत्व, गरिमा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह भारत का, भारत के लिए, भारत के द्वारा बना परिधान है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की तरह ही साड़ी भी भारत की ब्रांड और एक सशक्त पहचान है। साड़ी विविधता से भरे भारत को एकाकार कर देने वाला परिधान भी है।
उन्होंने कहा कि, पूरे देश में अलग-अलग क्षेत्रों में साड़ियों का भिन्न-भिन्न रंग रूप है, पर आत्मा एक है। साड़िया देश के विविध रंगों और संस्कृतियों को खुद में समेटे हुए है। साड़ी समाज के हर वर्ग का परिधान है, हर अवसर में अनुकूल है, सामाजिक समरसता का परिचायक भी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष उपस्थिति में आज इंदौर में वन भारत अभियान के तहत "आत्मनिर्भर नारी, गर्व से पहने साड़ी" के ध्येय को लेकर अनूठा आयोजन हुआ। इस आयोजन में लगभग 40 हजार महिलाओं ने परम्परागत वेषभूषा(साड़ी) में वाकेथॉन कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम को वर्ल्ड बुक रिकार्ड में दर्ज करने का प्रोविजनल प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल को सौंपा। इस अवसर पर केन्द्रीय वस्त्र एवं रेल राज्यमंत्री दर्शना जरदोश भी विशेष रूप से मौजूद थी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, साड़ी सबका प्रिय परिधान है और हर अवसर में अनुकूल है। साड़ी जाति-धर्म गरीब-अमीर और क्षेत्रवाद के विभाजन को पाटने वाला सशक्त सिंबल भी है। साड़ी एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से भी जोड़ने वाली कड़ी है। साड़ी से पारिवारिक एकता भी बढ़ती है। साड़ी वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद और भारतीयों के बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। यह भारत के सांस्कृतिक अभ्युदय को देश की मातृशक्तियों से मिलने वाले समर्थन का भी प्रतीक है।
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