Indore temple accident: 'मौत की बावड़ी' का दर्दनाक इतिहास, अलग-अलग घटनाक्रम में कई लोग गंवा चुके हैं जान

मध्यप्रदेश के इंदौर में दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जिस बावड़ी में यह हादसा हुआ, उस बावड़ी में इससे पहले भी कई घटनाक्रम हो चुके हैं, जिनमें लोगों ने जान गंवाई है.

indore

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सभी शवों को बावड़ी से निकाल लिया गया है, जहां सभी 36 शवों को बावड़ी से निकालने के बाद बावड़ी को सील कर दिया गया है। साथ ही बावड़ी से निकले सभी शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। उधर, इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय रहवासियों से मिली जानकारी के मुताबिक जिस बावड़ी में दर्दनाक हादसा घटित हुआ है, उस बावड़ी का इतिहास भी बेहद दर्दनाक रहा है, जहां इससे पहले भी बावड़ी में कई लोग सुसाइड कर चुके हैं, तो वहीं सालों पहले हुए चर्चित भूमि हत्याकांड के दौरान एक सास ने अपनी पत्नी के शव के कई टुकड़े कर उसे बावड़ी के आसपास बने गार्डन में फेंक दिया था। बताया जाता है कि, एक समय बावड़ी सुसाइड प्वाइंट बन गई थी, जहां आए दिन लोग आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते थे।

बावड़ी को करवा दिया था बंद

जानकारी के मुताबिक सालों पहले मंदिर के स्थान पर ओटला हुआ करता था। साथ ही पास में बावड़ी थी, जिसमें कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। लगातार हो रही आत्महत्या को देखते हुए आसपास के लोगों ने इसकी शिकायत जिम्मेदार संस्थाओं से की थी, जिसके बाद बावड़ी पर स्लैप डलवा दिया गया था। सालों पहले बावड़ी पर डले स्लैप पर कुछ लोगों ने मंदिर स्थापित कर दिया, जहां पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। इतना ही नहीं यहां अलग-अलग तरह के धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित होने लगे, जिसके चलते रामनवमी पर आयोजित हवन के दौरान बावड़ी पर डला स्लैब धंस गया, और सभी लोग बावड़ी में समा गए।

नोटिस देने के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण

वन इंडिया हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए स्थानीय रहवासी गोविंद अग्रवाल ने बताया कि, बावड़ी में हादसे नहीं हुए हैं, लेकिन 10 साल पहले एक भूमि हत्याकांड हुआ था, कोई विकृत मानसिकता के लोगों ने अपनी बहू के टुकड़े कर बावड़ी के आसपास छिपा दिए थे, उसमें डाल दिए थे। उसमें बावड़ी की गलती नहीं है, इससे पहले भी एक आत्महत्या हुई, जो कि सभी कुएं, बावड़ी में होती है। लेकिन यह सामूहिक हत्या है। ये सुनियोजित हत्या है, जहां नोटिस देने के बाद भी अवैध अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

हर बार बाहर होता था हवन

मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि, हर साल रामनवमी पर हवन पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाता था, जहां यह कार्यक्रम मंदिर के बाहर होता था। लेकिन मंदिर में चल रहे निर्माण कार्यों के चलते इस हवन पूजन के कार्यक्रम को मंदिर के अंदर ही करवाने की अनुमति दी गई। मंदिर के अंदर हवन और पूजन कार्यक्रम चल ही रहा था कि, उस वक्त यह हादसा हो गया। बताया जाता है कि, हवन के बाद भोजन का कार्यक्रम भी मंदिर में होना था। यदि यह कार्यक्रम होता तो और भी लोगों की जान जा सकती थी। उधर, इस हादसे में मारे गए सभी लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। साथ ही घायलों का उपचार अस्पताल में जारी है।

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