Indore News: कौन है अनन्या वाधवानी? 12वीं की छात्रा को बनाया गया मेयर! VIDEO
MP Indore News: स्वच्छता और नवाचार में देशभर में अव्वल रहने वाले इंदौर शहर ने एक बार फिर सामाजिक-सचेत पहल के ज़रिए देशभर में मिसाल पेश की है। इस बार बात सिर्फ कचरे या सफाई प्रबंधन की नहीं, बल्कि एक स्कूली छात्रा को शहर के मेयर की कुर्सी पर बैठाने की है।
12वीं कक्षा की छात्रा अनन्या वाधवानी को इंदौर नगर निगम की "मेयर फॉर ए डे" पहल के तहत एक दिन के लिए इंदौर का मेयर बनाया गया। इस अनुभव ने अनन्या के जीवन में नेतृत्व, संवेदनशीलता और जवाबदेही की गहरी छाप छोड़ी, जो न केव हर के युवाओं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक कहानी बन गई।

कौन हैं अनन्या वाधवानी?
अनन्या वाधवानी इंदौर के एमेरेल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। पढ़ाई में तेज, सामाजिक सरोकारों में रुचि रखने वाली अनन्या स्कूल की "Girl Up Radha" क्लब की प्रेसिडेंट हैं और विभिन्न सामाजिक विषयों पर जागरूकता फैलाने में सक्रिय रही हैं। साथ ही वे U20 (Urban-20) जैसी यूथ नीति मंचों में भी हिस्सा ले चुकी हैं। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक मामलों में रुचि ने उन्हें इस विशेष मौके के लिए योग्य बना दिया।
एक दिन की मेयर बनने की कहानी कैसे शुरू हुई?
इंदौर नगर निगम की ओर से 2023 में शुरू की गई पहल "मेयर फॉर ए डे" का उद्देश्य युवाओं को प्रशासनिक कार्य प्रणाली से जोड़ना और नेतृत्व की भावना को विकसित करना है। इसी कड़ी में जब मेयर पुष्यमित्र भार्गव अनन्या के स्कूल में अतिथि के रूप में पहुंचे, तो उन्होंने छात्रों से संवाद किया। इस दौरान अनन्या ने उनसे एक ऐसा सवाल पूछा, जो मेयर को बेहद प्रभावित कर गया।
उन्होंने पूछा-"आपने अब तक की सार्वजनिक सेवा में सबसे कठिन निर्णय क्या लिया और उससे क्या सीखा?"
इस सवाल ने मेयर भार्गव को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने वहीं मंच से अनन्या को "मेयर फॉर ए डे" कार्यक्रम के तहत नामित करने की घोषणा कर दी।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव की प्रेरणा
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इस पहल को शुरू करने का उद्देश्य युवाओं को प्रशासनिक कार्यों और नेतृत्व की बारीकियों से परिचित कराना था। अनन्या ने बताया कि उनके स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में मेयर को आमंत्रित किया गया था। मेयर भार्गव ने अपने भाषण से बच्चों को प्रेरित किया, और अनन्या ने उनसे उनकी सबसे बड़ी सीख और चुनौती के बारे में एक सवाल पूछा। इस सवाल से प्रभावित होकर मेयर ने अनन्या को इस खास अवसर के लिए चुना।

अनन्या ने कहा, "मेयर सर मेरे सवाल से प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे अन्य छात्रों के बीच चुना। यह मेरे लिए गर्व की बात थी।" इस अनुभव ने अनन्या को न केवल मेयर के दैनिक कार्यों को समझने का मौका दिया, बल्कि यह भी सिखाया कि कैसे एक नेता त्वरित निर्णय लेकर सामाजिक समस्याओं का समाधान करता है।
दिव्यांग महिलाओं की मदद
अनन्या ने अपने अनुभव के दौरान एक विशेष घटना का जिक्र किया, जो मेयर के सामाजिक दायित्व को दर्शाती है। उन्होंने बताया, "दो दिव्यांग महिलाएं, जो पैरालिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी गई थीं, आर्थिक तंगी के कारण अपनी यात्रा नहीं कर पा रही थीं। मेयर सर ने उनकी समस्या सुनी और तुरंत समाधान निकाला।"
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इन महिलाओं को आर्थिक सहायता और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए, ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें। अनन्या ने कहा, "मैंने मेयर सर से सीखा कि एक नेता को हमेशा समाज के कमजोर वर्गों के लिए संवेदनशील होना चाहिए। यह मेरे लिए खुद को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम था।"
राजनीतिक चर्चा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पहल की सराहना की और कहा, "इंदौर नगर निगम की यह पहल युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है। अनन्या जैसे युवाओं का उत्साह हमारी प्रेरणा है।"
कांग्रेस ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इसे पूरे प्रदेश में लागू करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "इंदौर की यह पहल युवाओं को प्रशासन से जोड़ने का एक शानदार प्रयास है। लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह अवसर सभी वर्गों के छात्रों तक पहुंचे।"












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