इंदौर के 32 निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से निशुल्क होगा कोरोना मरीजों का इलाज
इंदौर, 11 मई। मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना के तहत आयुष्मान कार्ड के जरिए गरीब कोरोना मरीजों का इलाज अब निजी अस्पतालों में भी हो सकेगा। इसके लिए मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सभी कलेक्टरों को आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज की व्यवस्था के निर्देश दिए थे। इसे लेकर कलेक्टर मनीष सिंह ने पूर्व में आदेश जारी किए थे, जिसमें मंगलवार को कुछ संशोधन किया गया है। अस्पतालों की संख्या 12 से बढ़ाकर अब 32 कर दी गई है।

कोविड अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारियों का एडमिशन और उपचार बिना किसी बाधा के आसानी से हो सके, इसके लिए निगम आयुक्त प्रतिभा पाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाता है। आदेश के अनुसार, अपर कलेक्टर पवन जैन नियंत्रक अधिकारी रहेंगे। वे नोडल अधिकारी के संपर्क में रहते हुए शिकायत और समस्या का निराकरण करेंगे। इसके अलावा अपर कलेक्टर संतोष टैगोर हॉस्पिटलों को मार्गदर्शन देंगे। इसके अलावा पोर्टल में आने वाली समस्याओं का निराकरण कराएंगे।
इन्हें दिए गए यह दायित्व
विवेक सिंह मो. नं . 9938290923 : आयुष्मान योजना के लिए नियुक्त जिला समन्वय अधिकारी रहेंगे। वे यह देखेंगे कि पोर्टल और चिकित्सालयों को तकनीकी रूप से समस्या न आए।
देवेन्द्र सिंह रघुवंशी मो. नं. 9827375714 : आयुष्मान योजना के लिए आयुष्मान एवं कोविड रिपोर्टिंग को डिनेटर कर चिकित्साओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों को योजना में संलग्न कर काम को निष्पादित करेंगे।
डिप्टी कलेक्टर विशाखा देशमुख को आयुष्मान कार्डधारी व्यक्तियों को उक्त योजनान्तर्गत समय पर उपचार नहीं मिलने के संबंध में प्राप्त शिकायतों का निराकरण करने के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाता है।
आयुष्मान कार्ड में इलाज के लिए यह जरूरी है
आदेश के अनुसार यदि कोविड पॉजिटिव व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड है तो तत्काल सत्यापित कर मरीज का इलाज शुरू किया जाए। यदि कोविड पॉजिटिव व्यक्ति के परिवार में किसी व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड और कोविड व्यक्ति अपनी पात्रता पर्ची या बी.पी.एल. कार्ड या समग्र आई.डी. या राजपत्रित अधिकारी आयुष्मान कार्डधारी के परिवार से सत्यापन कराकर आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है, लेकिन उसे ईलाज से रोका नहीं जाएगा। कोविड से जुड़े अस्पताल में तत्काल मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू किया जाए।
यदि किसी व्यक्ति के पास, अथवा उसके परिवार के पास, आयुष्मान कार्ड नहीं है तो वह व्यक्ति पात्रता पर्ची, संबल कार्ड, एवं समग्र आई.डी. होने पर आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए पात्र होगा। प्रभारी अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोविड व्यक्ति यदि उक्त तीन बिन्दुओं में से किसी भी एक बिन्दु की पूर्ति करता है तो बिना विलंब के इलाज शुरू किया जाए और समय सीमा में आयुष्मान कार्ड बना कर दिया जाए।
कोविड -19 का आयुष्मान पैकेज

यदि पोर्टल में आवेदक का नाम नहीं मिलता है और आयुष्मान कार्ड की पात्रता कोविड व्यक्ति को नहीं है तो उससे इलाज की राशि ली जाएगी। प्रत्येक हॉस्पिटल में कोविड / नॉन कोविड मरीजों को शासन के निर्देशानुसार हॉस्पिटल में निशुल्क उपचार मिले यह सुनिश्चित करेंगे।यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यह किसी व्यक्ति का आयुष्मान का नाम नहीं है, लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य का नाम है अथवा उनके पास आई.डी. है तो उनके आधार पर संबंधित व्यक्ति को हॉस्पिटल में प्रवेश कर इलाज किया जाएगा।

कोविड पॉजिटिव व्यक्ति को आयुष्यान परिवार का सदस्य होना ही पर्याप्त है। परिवार के किसी सदस्य के पास कार्ड नहीं होने पर अस्पताल में प्रवेश करने के लिए परिवार के किसी भी सदस्य के आयुष्मान कार्ड के साथ खाद्यान पर्ची की उपलब्धता, समग्र आईडी की उपलब्धता अथवा शासकीय विभाग के राजपत्रित अधिकारी का प्रमाणिकरण होना आवश्यक होगा, जिससे यह पता चले कि वह व्यक्ति इसी परिवार का सदस्य है।
आयुष्मान भारत " निरामयम् " म.प्र . योजनान्तर्गत विशेष जांच के लिए अधिकतम सीमा 5000 प्रति परिवार प्रतिवर्ष की पात्रता थी, जिसे संशोधित कर कोविड -19 में पात्र हितग्राहियों के लिए 5000 रुपए प्रति हितग्राही किया गया है, जिसका उपयोग प्रत्येक सदस्य कर सकते हैं। आयुष्मान भारत " निरामयम् " म.प्र . योजनान्तर्गत एक कंट्रोल रूम सिटी बस ऑफिस इन्दौर पर बनाया गया है, जिसका फोन नंबर 0731-2583838 है।

9 लाख 8 हजार 545 को लाभ दिलाकर शहर बना अव्वल
प्रदेश में अभी तक मात्र 51% लोगों के आयुष्मान कार्ड बन सके हैं, लेकिन इसमें भी इंदौर ने प्रदेश में अव्वल आते हुए 77% लोगों के कार्ड बनाकर प्रशासनिक क्षमता साबित कर दी। इंदौर जिले में 11 लाख 74 हजार 252 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का टारगेट है। इनमें से 9 लाख 8 हजार 545 लोगों के कार्ड बना दिए गए हैं। इनमें इंदौर की महू तहसील के कुल 176 गांवों में 32 हजार 330, देपालपुर में 176 और सांवेर तहसील के 145 गांव में कुल 90 हजार 110 लोगों के कार्ड बनाए गए। शेष कार्ड इंदौर शहर में बने। अब केवल 2 लाख 65 हजार 702 कार्ड बनना बाकी हैं।












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