MP news: मानसून आते ही बोनी करने की तैयारी में किसान, अच्छी फसल के लिए इन बातों का रखना होगा ध्यान

मध्य प्रदेश में अब जल्द ही मानसून की एंट्री होने वाली है और ऐसे में किस भी आप नई फसल बोने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं, किसानों ने अपने खेतों को तैयार कर लिया है, जहां अब मानसून के एंट्री होते ही किसान अपने खेतों में फसल बो देंगे। वहीं इससे पहले कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है, जिससे अबकी बार मानसून के सीजन में अच्छी फसल प्राप्त की जा सकती है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि, अबकी बार किसान लगभग 4 इंच बारिश के बाद ही बोनी करें, जिससे उनकी फसल ठीक-ठाक बनी रहेगी, तो वहीं उन्हें दूसरी बार बोनी करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसी के साथ 4 इंच बारिश आते ही मानसून की घोषणा भी कर दी जाती है।

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ये हैं महत्वपूर्ण बातें

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग उप संचालक कृषि विजय चौरसिया द्वारा बताया गया कि, रतलाम जिले में इस साल 3 लाख 28 हजार हैक्टेयर में खरीफ की खेती कराने की तैयारी चल रही है। किसानों को अच्छी किस्म का खाद, बीज मिले। इसके लिये प्रयोगशाला से खाद, बीज के नमूनों की जाँच कराई जा रही है। अभी तक खाद, बीज विक्रेताओं से लिये 207 नमूने भेजे गये है, जिसमें 146 बीज और 61 खाद के है जिसकी जाँच रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर आ जायेगी। किसानों को कृषि विशेषज्ञो ने सलाह दी है कि चार इंच बारिश होने के बाद ही बोनी करें। एक ही किस्म के स्थान पर विभिन्न समयावधि में पकने वाली अपने क्षेत्र के लिये अनुशंसित 2-3 किस्मों की बोनी करें। सोयाबीन बीज को उपचारित करके ही बोनी करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान

सोयाबीन आधारित अंतवर्तीय फसल लगाये, जबकि सिंचित क्षेत्रों में सोयाबीन के साथ मक्का, ज्वार, कपास, बाजरा आदि फसलों की बोनी करें। इसी प्रकार फल बागो में आम, पपिता, कटहल, अमरूद आदि (के बीच की खली जगह में भी सोयाबीन की खेती की जा सकती है)। सोयाबीन की खेती हेतु उपलब्ध बीज का अंकुरण न्यूनतम 70 प्रतिशत सुनिश्चित करें। सोयाबीन की बोनी हेतु अनुशंसित 45 से.मी. कतारो की दूरी का अनुपालन करें, साथ ही बीज को 2-3 से.मी. की गहराई पर बोनी करते हुए पौधे से पौधे की दूरी 5-10 से.मी. रखे। न्यूनतम 70 प्रतिशत अंकुरण के आधार पर 65-70 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर की दर से उपयोग करें।विपरित मौसम (सुखे की स्थिति/अतिवृष्टि आदि) से होने वाले नुकसान को कम करने के लिये सोयाबीन की बोनी BBF पद्धति या रिज एवं फेरो पद्धति से बोनी करें। सोयाबीन की फसल के लिये आवश्यक पौषक तत्वो (25ः40ः60ः50) कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर, NPK व S (सल्फर) की पूर्ति केवल बोनी के समय करें।

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