Indore news: बच्चों को भिखारी बनाने वालों की खैर नहीं, जेल जाने के लिए रहे तैयार
इंदौर जिले को बाल भिक्षा मुक्त जिला बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा हैं। जिला टास्क फोर्स की बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार जिले के विभिन्न चौराहों एवं धार्मिक स्थलों पर बाल भिक्षा वृति रोकथाम अभियान चलाया जाएगा। जिले को बाल भिक्षा मुक्त बनाये जाने की कार्रवाई की जाने हेतु विभिन्न विभागों के 07 संयुक्त दलों का गठन किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास रामनिवास बुधोलिया ने बताया कि, उक्त दलों में स्मार्ट सिटी परियोजना, नगर निगम इंदौर, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शौर्य दल सदस्य एवं संस्था प्रवेश इंदौर के सदस्यों को सम्मिलित किया गया है।

उक्त गठित दल शहर के 40 विभिन्न चौराहों एवं धार्मिक स्थलों पर बाल भिक्षा वृत्ति में लिप्त बालकों को अभिरक्षा में लेकर बाल कल्याण समिति जिला इंदौर के समक्ष प्रस्तुत कर बालकों के पुर्नवास संबंधी कार्य करेंगे। बाल भिक्षा वृत्ति में लिप्त शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा विभाग के माध्यम से पुनः शिक्षा से जोडा जायेगा। उक्त अभियान अंतर्गत जो व्यक्ति भीख मंगवाने के प्रयोजन से बालकों को नियोजित करता है या किसी बालकों से भीख मंगवाता है ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और सरक्षण) अधिनियम 2015 एवं सशोधित अधिनियम 2021 की धारा 76 (1) के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी। दोषी व्यक्ति को पांच वर्ष तक के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना के दण्ड का प्रावधान हैं।
कलेक्टर आशीष सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों में शहर को बाल भिक्षुक मुक्त शहर बनाया जाए। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधोलिया ने बताया कि शहर में प्रमुख रूप से 27 चौराहों और 7 बड़े मंदिरों में बाल भिक्षावृत्ति दिखाई देती हैं। इन जगहों पर कार्यवाही के लिए दल बनाए गए हैं। इन दलों द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चों के शिक्षण की व्यवस्था भी की जाए। आवश्यक होने पर बच्चों को हॉस्टल में भी रखा जाए।
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