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भारत में नोवावैक्स मान्य नहीं लेकिन निर्यात शुरू

Provided by Deutsche Welle

नई दिल्ली, 02 दिसंबर। जिस वैक्सीन को अभी भारत ने भी मान्यता नहीं दी है, सीरम इंस्टीट्यूट ने उसका निर्यात शुरू कर दिया है. नोवावैक्स की चार करोड़ खुराक इंडोनेशिया को भेजी गई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोवैक्स को मान्यता नहीं दी है लेकिन इंडोनेशिया ने इसे मान्यता दे दी है

दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक सीरम ने नोवावैक्स या कोवोवैक्स की एक लाख 37 हजार 500 खुराक पिछले हफ्ते इंडोनेशिया को निर्यात की हैं. इस बीच सीरीम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैश्विक वैक्सीन आवंटन नेटवर्क गावी को इस साल के आखिर तक कोवैक्स या एस्ट्राजेनेका की चार करोड़ खुराक देने का वादा किया है. इंस्टीट्यूट ने अपना उत्पादन बढ़ा दिया है.

तेज होगा निर्यात

भारत सरकार ने कहा कि इस हफ्ते अफ्रीका के लिए तेजी से और टीकों को मान्यता दी जाएगी ताकि ओमिक्रॉन वेरिएंट से लड़ने में मदद मिल सके. यह कोवैक्स के जरिए या फिर द्वीपक्षीय समझौतों के जरिए किया जाएगा.

पिछले हफ्ते ही सीरम ने कोवैक्स के जरिए नेपाल और ताजिकिस्तान को 14 लाख खुराक भेजी थीं. उससे पहले भारत सरकार ने वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगा रखी थी ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके. इस खेप से पहले सीरम ने कोवैक्स को 3 करोड़ खुराक ही उपलब्ध करवाई थीं. कंपन का कोवैक्स के साथ 55 करोड़ खुराक उपलब्ध करवाने का समझौता है. वैक्सीन की ये खुराकें मुख्यतया गरीब देशों के लिए हैं.

गावी के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि सीरम से दवाओं की डिलीवरी कागजी कार्रवाई पर निर्भर करेगी क्योंकि इसमें विभिन्न देशों के साथ लायबिलीटी समझौते भी शामिल करने होंगे. साथ ही निर्माता को दवा की आयु जैसे आंकड़े पहले से उपलब्ध करवाने होंगे ताकि विभिन्न देश सप्लाई को स्वीकार या अस्वीकार कर सकें.

भारत में मांग घटी

सीरम ने अब कोविशील्ड का उत्पादन अप्रैल के मुकाबले करीब चार गुना बढ़ा दिया है और अब 24 करोड़ खुराक प्रति माह बनाई जा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक सीरम अब निर्यात बढ़ाने को लेकर उत्सुक है क्योंकि भारत की घरेलू मांग में कमी आई है. हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

वैसे, भारत में अभी भी वैक्सीन की काफी जरूरत महसूस की जा रही है. करोड़ों लोग अपनी दूसरी खुराक के तय समय से भी ज्यादा देर से इंतजार कर रहे हैं. बहुत से लोगों को दूसरी खुराक के लिए 12 से 16 हफ्ते का इंतजार करना पड़ रहा है.

भारत ने अब तक अपनी 84 प्रतिशत वयस्क आबादी यानी करीब 94 करोड़ लोगों को कम से कम एक खुराक दे दी है जबकि 48 प्रतिशत को दोनों खुराकें मिल चुकी हैं. अभी 18 वर्ष से कम आयु के लोगों का टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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