यस बैंक संंकट पर चिदंबरम का वित्तमंत्री से सवाल, 2014 के बाद किसके कहने पर लोन बांटे गए
यस बैंक पर आरबीआई और सरकार इतने दिन चुप क्यों रही: चिदंबरम
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने यस बैंक संकट को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि यस बैंक का डूबना मौजूदा सरकार की निगरानी में वित्त संस्थानों के कुप्रबंधन का नतीजा है। यस बैंक ने जिस तरह से लोन बांटे, उस पर आरबीआई और सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। आखिर आरबीआई और वित्त मंत्रालय ने क्यों इस पर पहले नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि यस बैंक के पतन को सरकार और वित्तमंत्री ने जनता और मीडिया से छुपाने की कोशिश की लेकिन वित्त संस्थानों का कुप्रबंधन जनता के सामने आ रहा है।
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रणदीप सुरजेवाला के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पी चिदंबरम ने कहा, वित्तमंत्री बताएं कैसे यस बैंक का लोन 2014 से 2019 के बीच पांच गुना बढ़ गया। ये उनकी लोन बुक से मैं कह रहा हूं, 2014 मार्च में लोन बुक अमाउंट 55 हजार करोड़ था जो मार्च 2019 में बढ़ कर 2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। केवल दो सालों में यह 98 हजार करोड़ से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए के पार कैसे पहुंच गया।
चिदंबरम ने कहा कि वित्तमंत्री ऐसे बात करती हैं जैसे यूपीए सत्ता में है और मैं वित्त मंत्री हूं। 2014 से पहले की बात छोड़िए लेकिन कम से के ये तो बताइए कि 2014 के बाद किसने यस बैंक को लोन बांटने की इजाजत दी। क्या कांग्रेस ने ऐसा किया?
चिदंबरम ने यस बैंक को बचाने के लिए एसबीआई के 2450 करोड़ रुपये में 49 फीसदी शेयर खरीदने को लेकर कहा, इस स्कीम की जगह यस बैंक का टेकओवर किया जाए और एसबीआई बैड लोन बुक की उगाही करे।
इससे पहले शुक्रवार को पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने लिखा, बीजेपी 6 साल से सत्ता में है। वित्तीय संस्थानों को नियंत्रित और विनियमित करने की उनकी क्षमता उजागर होती जा रही है। पहले पीएमसी बैंक, अब यस बैंक। क्या सरकार बिल्कुल भी चिंतित नहीं है? क्या वह अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं? क्या अब कतार में कोई तीसरा बैंक है?
चिदंबरम ने शुक्रवार को ट्वीट किया, मार्च 2014 के अंत में लोन 55,633 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2019 के अंत बढ़कर 2,41,499 करोड़ रुपये हो गया है। मार्च 2017 के अंत में यह आंकड़ा 1.48,675 करोड़ था, जो बढ़कर मार्च 2019 के अंत में 2,41,499 हो गया। नोटबंदी के बाद लोन ने छलांग लगाई है।
बता दें कि आरबीआई ने नकदी की कमी से जूझ रहे यस बैंक से पैसा निकालने की अधिकतम सीमा 50 हजार रुपए निर्धारित कर दी है। बैंक के ग्राहक एक महीने में 50 हजार से ज्यादा नहीं निकाल सकेंगे। आरबीआई ने गुरुवार देर शाम जारी बयान में कहा कि येस बैंक के निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। रिजर्व बैंक ने 30 दिन के लिए उसके बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। यस बैंक प्राइवेट सेक्टर का देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक यस बैंक है, जो डूबने की कगार पर है। देशभर में यस बैंक की 1000 से ज्यादा ब्रांच और 1800 एटीएम हैं। बैंक के खाताधारकों में चिंता है।












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