World Environment Day की मेजबानी कर रहा जेजू द्वीप, कैसे बना पृथ्वी के संरक्षण की वैश्विक आवाज?
World Environment Day 2025: हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस महज एक तारीख नहीं रह गया है,बल्कि यह धरती को बचाने की वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया है। साल 2025 का यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जा रहा है।
28 सालों के लंबे इंतजार के बाद रिपब्लिक ऑफ कोरिया इस बार आधिकारिक रूप से इसकी मेजबानी कर रहा है। हालांकि इस बार दुनिया भर की निगाहें दक्षिण कोरिया के एक छोटे से हरे-भरे स्वर्ग जेजू आईलैंड पर टिकी है। एशिया का ऐसा द्वीप, जो अपने "प्लास्टिक जीरो विजन" के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा घोषित इस अभियान का उद्देश्य न केवल चेतना जगाना है, बल्कि नीतियों में परिवर्तन, जीवनशैली में बदलाव और वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देना भी है। इस दिशा में दक्षिण कोरिया का जेजू द्वीप एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।
आईए विस्तार से जानते हैं कैसे जेजू बना 'प्लास्टिक जीरो' का मॉडल, और क्या सीखेगा इससे विश्व समुदाय?
World Environment Day पर जेजू आईलैंड बना सेंटर ऑफ अट्रैक्शन
साउथ कोरिया विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी कर रहा है लेकिन इस बार राजधानी सियोल नहीं, बल्कि वैश्विक मंच का फोकस एक छोटे से लेकिन बेहद खास द्वीप जेजू पर है। जेजू दक्षिण कोरिया का सबसे बड़ा और प्राकृतिक धरोहरों का खजाना है। ज्वालामुखी से बना यह द्वीप अपने हैलासन पर्वत, लावा ट्यूब्स, और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के लिए पुरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
इस आईलैंड को 'देवताओं का द्वीप' कहा गया है, और अब यह द्वीप 'पर्यावरण के देवता' के रूप में दुनिया के सामने एक नई राह प्रस्तुत कर रहा है। 2022 में शुरू हुई "प्लास्टिक जीरो आइलैंड" योजना को लेकर जेजू ने 2040 तक सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। यही दृष्टिकोण इस साल की विश्व पर्यावरण दिवसा की थीम को आकार देता है।
वैश्विक पटल पर छाया प्लास्टिक पॉल्यूशन का संकट
इस साल का World Environment Day ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब अगस्त 2025 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्लास्टिक पॉल्यूशन पर चर्चा करने के लिए पूरा विश्व एक मंच पर आ रहा है। इसका भी मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को सीमित करने के लिए एक साझा खाका तैयार करना है।
इस संदर्भ में, जेजू आईलैंड एक मॉडल के रूप में सामने आता है। वहां की रीसाइक्लिंग पॉलिसी , गॉर्बेज और डिस्पोजेबल कप डिपॉजिट रिफंड जैसी योजनाओं ने लोगों को न केवल जागरूक किया, बल्कि सहभागी भी बनाया।
जब नीति बनती है व्यवहार
जेजू की यह पहल सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है। यहाँ हर नागरिक को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे रीसाइक्लिंग सेंटर में ही कचरा जमा करें। स्थानीय प्रशासन ने होटल, रेस्तरां और कैफे को डिस्पोजेबल प्लास्टिक से दूर रहने और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
यह द्वीप दुनिया के उन चुनिंदा क्षेत्रों में से है, जहाँ पॉलिसी और पॉपुलेश की सहभागिता एक साथ देखने को मिलता है। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में पारदर्शिता और सहयोग की यह मिसाल न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।
World Environment Day पर दुनिया की एक आवाज, एक अभियान
आज जब क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरणीय गिरावट और प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी के अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में जेजू आईलैंड जैसे छोटे द्वीप पर इतना बड़ा आयोजन करना यह दर्शाता है कि बदलाव नीचे से शुरू होता है।
दुनिया के पास समय कम है, लेकिन विकल्प मौजूद हैं। दक्षिण कोरिया का एक छोटा से जेजू द्वीप ने रास्ता दिखा दिया है। अब यह हम सभी पर निर्भर है कि हम इस दिशा में कितनी ईमानदारी से कदम बढ़ाते हैं। क्या हम जेजू की तरह साहस दिखा सकते हैं? क्या हम प्लास्टिक मुक्त पृथ्वी की ओर चल सकते हैं।












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