World Elephant Day 2021: विश्व हाथी दिवस आज, अगर ऐसे ही चलता रहा तो सिर्फ फोटो में दिखेंगे 'गजराज'
नई दिल्ली, 12 अगस्त: आज 12 अगस्त को 'विश्व हाथी दिवस' दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन हाथियों के प्रति जागरूकता लाने का दिन है। हाथी को मदमस्त अंदाज, शांत और गुस्सेले स्वभाव के लिए जाना जाता है। हर साल 12 अगस्त को मनाए जाने वाले 'विश्व हाथी दिवस' के पीछे हाथियों के संरक्षण, गैर-कानूनी शिकार और तस्करी रोकने का उद्देश्य जुड़ा है। इस दिन को हम हाथियों की रक्षा और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए आम जन को जागरूक करना भी है।

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विश्व हाथी दिवस का इतिहास
दरअसल, एशियाई और अफ्रीकी हाथियों की दुर्दशा को उजागर करते हुए 12 अगस्त 2012 को पहला विश्व हाथी दिवस मनाया गया था। सिम्स और थाई स्थित एलीफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन ने इसकी शुरुआत की थी। यह दिन हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने पर पूरी तरह से केंद्रित है। खासतौर से अवैध शिकार, उनके रहने की जगह को पहुंचाया जा रहे नुकसान, कैद में उनके साथ दुर्व्यवहार शामिल है।
सालों से कनाडाई फिल्म निर्माता पेट्रीसिया, सिम्स के ट्रस्ट वर्ल्ड एलीफेंट सोसाइटी ने कई लोगों को शिक्षित किया है और हाथी संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता भी पैदा की है। सोसायटी 100 हाथी संरक्षण संगठनों के साथ साझेदारी में काम करती है। हाथियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई संगठनों और व्यक्तियों से एक साथ आने की भी अपील की जाती है।
हर साल 15 हजार हाथियों का शिकार
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के हालिया आंकड़ों के अनुसार लगभग 4,40,000 हाथी बचे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने यह भी खुलासा किया कि शिकारी हर साल लगभग 15,000 हाथियों का शिकार करते हैं। ऐसे में अगर उनकी सुरक्षा नहीं की गई तो आने वाले वक्त में 'हाथी विलुप्त होने' की कगार पर पहुंच जाएंगे, जिसको लेकर जागरूकता पैदा करना जिम्मेदारी है।
एशियाई हाथियों की संख्या 50,000 से भी कम
इस बीच भारत में सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीक होने के बावजूद अशिक्षित महावतों द्वारा हाथियों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। कई हाथी बिजली के झटके, ट्रेन दुर्घटनाओं, अवैध शिकार और जहर के शिकार होते हैं। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के अनुसार जंगली एशियाई हाथियों की संख्या 50,000 से कम हो गई है, जो कि इसके ऐतिहासिक औसत का सिर्फ 15% है। जंगली एशियाई हाथी मुख्य रूप से भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं।
झारखंड में किए जा रहे कई प्रयास
विश्व हाथी दिवस मनाने के लिए ब्लू डार्ट झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में दलमा वन्यजीव अभयारण्य के बाहरी इलाके में हाथियों के लिए 1,031,170 पेड़ लगाएगा। जबकि ग्रो-ट्रीज डॉट कॉम झारखंड के सिंहभूम एलीफेंट रिजर्व में लाखों पेड़ लगा रहा है, ताकि हाथियों के लिए आश्रय बनाए जा सकें और उनके रहने की जगह का विस्तार किया जा सके।
हाथियों से जुड़ी कुछ अहम जानकारी
हाथी हमेशा झुंड में रहना पसंद करते हैं। इसके साथ ही झुंड को सबसे बूढ़ी हथिनी लीड करती हैं। हाथी कभी अकेले नहीं बल्कि झुंड और परिवार के साथ ही रहना पसंद करते हैं। हाथियों का दिमाग सबसे बड़ा होता है। वहीं 12 मील दूर से पानी की गंध महसूस करने में समक्ष होते हैं। यहीं नहीं हाथियों को खतरे का आभास भी पहले ही हो जाता है, जिससे बाद वो अपनी चाल बदल देते हैं।












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