कश्मीर पर भारत के रुख की आलोचना करने वाली प्रमिला जयपाल से न मिलने पर जयशंकर की आलोचना, सरकार ने दिया जवाब
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस की सदस्या प्रमिला जयपाल के साथ मीटिंग करने से इनकार कर दिया है। जयपाल उस टीम का हिस्सा थीं जिसकी मुलाकात जयशंकर से होनी थी। अमेरिका में अब इस बात को लेकर जयशंकर की आलोचना हो रही है और भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि जयपाल, अमेरिका की हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स कमेटी (एचएएफएसी) का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में जयशंकर उनसे मुलाकात करने के लिए बाध्य नहीं थे।

आखिरी मौके पर जयशंकर ने किया इनकार
जयशंकर ने आखिरी मौके पर जयपाल के साथ मीटिंग कैंसिल की थी। जयपाल, अमेरिकी कांग्रेस की एक ऐसी सदस्य हैं जो अक्सर ही कश्मीर पर भारत के रुख की आलोचना करती आई हैं। भारतीय अधिकारियों की तरफ से कहा गया है, 'किसी भी आजाद देश के विदेश मंत्री को उन राजनेताओं से मिलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है जिनका अपना एक एजेंडा होता है।' अधिकारियों ने आगे कहा, 'कांग्रेसवुमन जयपालख् हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स कमेटी का हिस्सा नहीं हैं और भारत पर उनका रुख सबको मालूम है। उनके साथ कोई मीटिंग नहीं थी। भारत की तरफ से एचएफएसी के नेतृत्व के साथ मीटिंग के लिए कोई शर्त रखी गई हो ऐसा नहीं है। लेकिन एचएफएसी की तरफ से एक गैर-सदस्य को लाने की जिद की गई थी।'

कश्मीर पर लाई हैं एक रेजोल्यूशन
अधिकारियों ने यह भी कहा है कि विदेश मंत्री का फैसला इस बात पर केंद्रित था कि कमेटी की तरफ से किसी शख्स को मंजूरी के बिना लाया जा रहा था। अधिकारियों की तरफ से यह भी कहा गया है कि सीनेट मीटिंग पूर्वनियोजित जगह पर हुई और उसमें बहुत ही खुले दिमाग के साथ वार्ता हुई। सांसद जयपाल पिछले कुछ समय से लगातार कश्मीर मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। साथ ही वह उस रेजोल्यूशन को लाने में अहम भूमिका अदा कर रही हैं जिसमें भारत से जम्मू कश्मीर में लगी पाबंदियों को खत्म करने के लिए कहा जा रहा। रिपब्लिकन पार्टी के लीडर स्टीव वाटकिंस की तरफ से इस रेजोल्यूशन को समर्थन मिल रहा है।
कौन हैं प्रमिला जयपाल
54 वर्ष की जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इकलौती एनआरआई कांग्रेसवुमन हैं। उनकी तरफ से ही इस रेजोल्यूशन को सभा में लाया गया था। उनके इस प्रस्ताव के समर्थन में अब 29 कांग्रेस सदस्य हैं जिसमें से दो रिपब्लिकन पार्टी के हैं। 10 समर्थक उस मीटिंग का हिस्सा थे जिसे कैंसिल किया गया। सीनेटर बर्नी सैंडर्स की तरफ से जयशंकर के इस फैसले का विरोध किया गया है। सैंडर्स ने ट्विटर पर लिखा, 'जो अमेरिकी सांसद मानवाधिकारों की बात करता हो उसे बाहर कर देना, हम इसी बात की उम्मीद भारत सरकार से करते हैं।'
सैंडर्स, वॉरेन और हैरिस ने की आलोचना
सैंडर्स के मुताबिक जयपाल कश्मीरियों और मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बात करती आई हैं और सिर्फ इस वजह से उन्हें बाहर करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों किस्मत आजमाने जा रही एलिजाबेथ वॉरेन ने भी जयशंकर के फैसले को परेशान करने वाला बताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'अमेरिकी और भारत के बीच एक अहम साझेदारी है लेकिन हमारी यह पार्टनरशिप तभी सफल हो सकती है जब इसकी जड़ों में धार्मिक आजादी, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए एक समान सम्मान हो।' वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता कमला हैरिस ने भी इस फैसले को दुखद करार दिया है।












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