Women's Day: IPS लक्ष्‍मी सिंह, जिनके सामने थर-थर कांपते हैं अपराधी

Women's Day Exclusive Interview by Bhavna Pandey: संवेदनशील है लेकिन कमजोर नहीं शक्ति का नाम ही नारी है। ये ही जज्‍बां लखनऊ आईजी लक्ष्‍मी सिंह के अंदर है। जब भी पुलिस महकमें में जांबाज महिला आईपीएस अधिकारियों की गिनती होती है उनमें आईपीएस लक्ष्‍मी सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अपनी बहादुरी के दम पर अपराधियों की नाक में दम मचाने वाली लखनऊ आईजी लक्ष्‍मी सिंह की नीति "जीरो टॉलरेंस अगेंस्‍ट क्राइम'' रही है। तेजतर्रार आईपीएस लक्ष्‍मी सिंह महिलाओं के खिलाफ हो रही घटना की रोकथाम और अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाने तक भूखी प्‍यासी फील्‍ड में ही डटी रहती हैं। लक्ष्‍मी सिंह के तीखे तेवर के आगे बड़े-बड़े अपराधी एक के बाद एक सरेंडर कर चुके हैं। वहीं इसके ठीक विपरीत अपने संवेदनशील और दयालु स्‍वभाव के चलते हर गरीब और जरूरतमंद की मदद करने के लिए वो जानी जाती हैं। महिला दिवस के अवसर वन इंडिया हिंदी आईपीएस लक्ष्‍मी सिंह से बात की। आइए लक्ष्‍मी सिंह की जुबानी सुनते हैं उनका प्रेरणादायी अनुभव....

योगी सरकार की भरोसेमंद आईपीएस लक्ष्‍मी सिंह

योगी सरकार की भरोसेमंद आईपीएस लक्ष्‍मी सिंह

2000 बैच की महिला आईपीएस टॉपर लक्ष्मी सिंह ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग और समाजशास्‍त्र में एमए की डिग्री हासिल करने के बाद पुलिस की खाकी वर्दी पहनी। ईमानदारी से और हिम्मत से अपनी ड्यूटी करती हैं। पुलिस महकमें में अपने करियर में लक्ष्‍मी सिंह 2014 में बतौर डीआईजी आगरा रहीं और बड़े-बड़े क्रिमिनल का सलाखों के पीछे पहुंचाया। इसके बाद फर्रुखाबाद, बुलंदशहर समेत कई जिलों में पुलिस कप्‍तान की जिम्‍मेदारी संभाल चुकी हैं। जिन जिलों में भी लक्ष्‍मी सिंह की पोस्टिंग रही वहां इन्‍होंने लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। आगरा के बाद लक्ष्‍मी सिंह की मेरठ जिले की जिम्‍मेदारी दी गई। लक्ष्‍मी सिंह की ईमानदार और तेजतर्रार छवि से प्रभावित होकर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने उन्‍हें प्रमोशन देकर 2019 में उनको राजधानी लखनऊ की जिम्‍मेदारी दी। लक्ष्मी सिंह सीएम योगी की खास मानी जाती हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर के दहशतगर्द विकास दुबे कांड की जांच सौंपी, ताकि वह इस मामले की तह तक जाएं और पुलिस की वर्दी में छिपे अपराधियों के मददगारों को बेनकाब करें। हाल ही में उन्‍नाव जिले में खेत में रस्‍सी से बंधी हुई मिली तीन लड़कियों का केस दोनों की जांच की जिम्‍मेदारी लक्ष्‍मी सिंह ने बखूबी निभाई और उन्‍नाव केस में अभियुक्‍तों को तीन दिन के अंदर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

लक्ष्‍मी सिंह को जब महिला समझ कर गैंगस्‍टर ने भेजी चुनौती

लक्ष्‍मी सिंह को जब महिला समझ कर गैंगस्‍टर ने भेजी चुनौती

लक्ष्‍मी सिंह बताती हैं जब मैं नौकरी आईं तो उस समय कई डकैत गैंग सक्रिय थे उनका पीछा करना पड़ता था। मुकबिर के सिस्‍टम को डेवलेप करना पड़ता है उसे मजबूत करना पड़ता है। करियर की शुरूआत में बुंदेखंड, सेंट्रल यूपी के तीन गैंग के खिलाफ काम किया एक गैंग से महिला समझ कर चुनौतियां भेजी थी तब उसका अच्‍छा जवाब दिया था।

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    पुलिस की नौकरी में एक महिला होने के नाते कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

    पुलिस की नौकरी में एक महिला होने के नाते कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

    इस प्रश्‍न का जवाब देते हुए लक्ष्‍मी सिंह ने कहा कि आपको भूलना पड़ता है कि आप महिला हैं। इसके साथ ही साथ आपका संवेदनशील जो स्‍वभाव है उसमें कोई परिवर्तन नहीं आना चाहिए। आपके बात करने के तरीके और डील करने के लिए तरीके में एक महिला होने के नाते संवेदनशीलता जरूर रहनी चाहिए। दूसरा करियर पाथ बहुत चैलेंजिंग हैं फील्‍ड में आपको जो पोस्टिंग मिलती है तो आपको ये प्रूफ करना पड़ता है कि आप उसके लायक हैं। उन्‍होंने कहा चैलेंज तो सभी के लिए सभी क्षेत्र में रहते हैं लेकिन महिलाओं के डबल चैलेंज हो जाता है क्‍योंकि महिलाओं को हर दिन अपने आप को प्रूफ करना पड़ता है आप ये प्‍ली नहीं ले सकते कि आपके परिवार में आपकी जरूरत है। ऐसे में महिला अधिकारी मजबूती के साथ समर्पण के साथ करना पड़ता है। लक्ष्‍मी सिंह ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा गांव में महिला अधिकारी जाती है तो अगर उसकी छवि ईमानदार अधिकारी है तो लोग आपकी बात सुनते हैं। जब आप रूटीन में ईमानदारी से करते हैं तो मुश्किल समय में लोग आप पर भरोसा दिखाते हैं और साथ खड़े होते है उतनी ही इज्‍जत देते हैं आपकी बात सुनते भी हैं। पुलिस की नौकरी में वर्किंग ऑवर अनलिमिटेड रहते हैं इसलिए आपको फिजिकली फिट रहने की जरूरत रहती है। एक दिन भी कम काम कम किया तो दोबारा आपको मौका मिलेगा भी कि नहीं इसकी भी गारंटी नहीं है। सभी फील्‍ड की महिलाओं को मेंटली मजबूत होने की जरूरत है। समान तरह की चुनौतियां हैं।

     महिलाओं की ये क्‍वालिटी उन्‍हें बनाती है और से अलग

    महिलाओं की ये क्‍वालिटी उन्‍हें बनाती है और से अलग

    लक्ष्‍मी सिंह का मानना है कि महिलाएं मल्‍टीटास्किंग होती है। एक साथ महिला प्‍लान करके बहुत चीजों में ऑडर देकर, डॉयरेक्‍शन देकर मैनेज भी कर लेती हैं। ये हमारा प्‍लस प्‍वाइंट है। अब जमाना बदल चुका है। आपको स्‍वयं को किसी दायरे में बांधना नहीं चाहिए। आज हम जिस जगह पर पहुंचे हैं हमारी क्षमता जो आज है उसमें हमारी कोशिश होनी चाहिए कि वो हर दिन बढ़े। हम तरक्‍की तब करते है जब हम स्‍वयं को दूसरे से तुलना करने के बजाय हर दिन अपने से कम्‍पेयर करें। ये हर क्षेत्र की महिलाओं को करना चाहिए। हर क्षेत्र में महिला बेहतर प्रदर्शन कर रही है। लक्ष्‍मी सिंह का मानना है कि हमारी आने वाली जेनरेशन हमको बहुत पीछे छोड़ेगी इतने कीर्तिमान स्‍थापित करेगी।

    उन्‍नाव केस में तीन दिन भूखी-प्‍यासी तक करती रही अपराधी की तलाश

    उन्‍नाव केस में तीन दिन भूखी-प्‍यासी तक करती रही अपराधी की तलाश

    लक्ष्‍मी सिंह बताती है कि महिलाओं से संबंधित कई ऐसे केस आते हैं जो बिल्‍कुल ब्लाइंड हो जाते हैं उनको सुलझाना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे केस जिनमें महिलाएं मार दी जाती है उनमें अगर शुरुआती इन्‍वेस्‍टीगेशन सही नहीं है तो अपराधी तक पहुंच पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यूपी के उन्नाव में गेहूं के खेत में तीन लड़कियों के हाथ और पैर बंधे हुए मिले ये भी केस वैसा ही था। ऐसे ब्लाइंट केस में शुरूआत में गांव वाले, घर वाले खुलकर बयान नहीं देते हैं ऐसे में पुलिस को मानवीय संवेदना जताते हुए ऐसे केस को हल करना चाहिए। उन्‍नाव केस के बारे में लक्ष्‍मी सिंह ने बताया कि अभियुक्‍तों ने अपना अपराध कबूल लिया है। लक्ष्‍मी सिंह जब त‍क अभियुक्‍तों को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा दी तब तक तीन दिन तक बिना खाए पिए केस को हल करने में टीम के साथ जी जान लगा दी। लक्ष्‍मी सिंह ने बताया कि इस केस में जो बच्‍ची अस्‍तपताल में भर्ती थी अब वो स्‍वस्‍थ्‍य है।

    https://hindi.oneindia.com/photos/priyanka-gandhi-assam-visits-viral-pictures-59840.html
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