तो कैबिनेट से बाहर होंगी नजमा, बनेगी गवर्नर
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या नजमा हेपतुल्ला मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री पद पर आगामी अप्रैल महीने तक ही रहेंगी ? इस सवाल पर आजकल राजधानी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है। आप पूछेंगे कि अप्रैल तक ही क्यों? तो इसका जवाब यह है कि नजमा हेपतुल्ला आगामी अप्रैल महीने में 75 साल की हो जाएंगी। नरेन्द्र मोदी ने 75 या उससे ज्यादा उम्र के अपनी पार्टी के सांसदों को अपने मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी थी।

बनेंगी गवर्नर
जानकारों का कहना है कि नजमा हेपतुल्ला को अप्रैल के बाद मंत्रिमंडल से बाहर करके किसी राज्य का गवर्नर बनाया जा सकता है। उनके चार महीने के बाद कैबिनेट में रहने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है।
काम से नाखुश मोदी
जानकारों का कहना है कि नरेन्द्र मोदी अपनी अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री के कामकाज से भी खुश नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि हेपतुल्ला की छुट्टी तय है और सारे विभाग का कामकाज मुख्तार अब्बास नकवी ही देखेंगे।
इमाम से विवाद
बता दें कि नजमा हेपतुल्ला और शाही इमाम बुखारी के बीच काफी विवाद हुआ था। नजमा हेपतुल्ला ने कहा था कि वक्फ बोर्ड के अंतर्गत पिता के पद को बेटे को दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। यह तब की बात है जब इमाम ने अपन पुत्र को जामा मस्जिद का भावी इमाम घोषित किया था। नजमा ने बुखारी के इस फैसले को बिल्कुल गलत बताया था। नजमा के इस हमले का जवाब देते हुए बुखारी ने कहा कि मंत्री जी अब बूढ़ी हो गई हैं।
हेपतुल्ला ने कहा था कि यह सच है कि वक्फ कानून में ऐसा कुछ नहीं है जो इमामों की पारिवारिक नियुक्ति पर रोक लगाए। कानून में कहा गया है कि ये प्रदेश वक्फ बोर्ड का अधिकार है कि वह किसे मस्जिद का इमाम बनाए। इमाम को भी उसकी सैलरी बोर्ड ही देता है।












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