क्यों भारी बारिश की वजह से कोयला संकट गहराने की है चिंता ? जानिए
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर: केंद्र सरकार की लगातार कोशिशों के चलते देश पर आए कोयला संकट में धीरे-धीरे सुधार होने लगा था। लेकिन, तभी देश के अधिकतर राज्यों में बारिश का दूसरा दौर शुरू हो गया। मौसम विभाग ने 21 अक्टूबर तक कई राज्यों में बारिश होने का अनुमान जताया हुआ है। कुछ जगहों पर तो भारी से बहुत ही ज्यादा भारी होने की भविष्यवाणी की गई है। मौसम विभाग ने कुछ राज्यों में कल भी बारिश की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है। इनमें से वे राज्य भी हैं, जहां से कोयला निकलता है। दिक्कत यही है कि क्या फिर से कोयला उत्पादन पर असर पड़ने वाला है, जिसमें कि काफी सुधार नजर आने लगा था।
Recommended Video

कोयला उत्पादक राज्यों में बारिश का अनुमान
भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार को जारी बुलेटिन में अनुमान जताया है कि ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मंगलवार तक भारी बारिश हो सकती है। ये सारे राज्य कोयला उत्पादक प्रदेश हैं। गौरतलब है कि बारिश के चलते पहले से ही कोयले की आपूर्ति प्रभावित रही है और अब हो रही बारिश से स्थिति फिर से बिगड़ने की आशंका है। गौरतलब है कि देश में बीते अगस्त महीने से ही कोयले की कमी देखी जा रही है, क्योंकि मांग में इजाफे की तुलना में इसकी सप्लाई में काफी परेशानियां आई हैं। मानसून में ज्यादा बरसात के चलते कोयले का उत्पादन तो प्रभावित हुआ ही था, सप्लाई पर भी असर पड़ा था।

राज्य सरकारें महंगी बिजली खरीद रही हैं
देश में बिजली का 70% उत्पादन कोयले पर निर्भर है और इसकी कमी के चलते बिजली की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक कार्यक्रम में माना था कि उनकी सरकार जो बिजली 7 रुपये प्रति यूनिट खरीदती थी, आज की तारीख उसे 22 रुपये प्रति यूनिट खरीदनी पड़ रही है। लेकिन, इसके चलते देश की अर्थव्यस्था पर विपरीत असर पड़ सकता है, जो कि पहले से ही पेट्रोलियम पदार्थों की ऊंची कीमतों और दूसरे सामानों के दाम बढ़ने से दबाव झेल रही है।

कोल इंडिया लगातार उत्पादन बढ़ाने पर दे रहा है जोर
मौसम विभाग ने और बारिश की संभावना ऐसे वक्त में जारी की है, जब देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक कोल इंडिया लिमिटेड ने इसी हफ्ते से कोयले के उत्पादन और सप्लाई दोनों बढ़ाने की योजना तैयार की थी, ताकि बिजली संयंत्रों के पास कोयले के पर्याप्त स्टॉक जमा हो जाएं। खासकर इस संकट से उबरने के लिए पिछले हफ्ते से इसने अपने गैर-विद्युत उपभोक्ताओं को कोयला सप्लाई भी फिलहाल के लिए रोकी हुई है। जाहिर है कि उन उद्योगों पर भी इसका असर पड़ रहा है। मसलन, एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 15 अक्टूबर को कहा था, 'अगर कोयले की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की जाती है, तो इससे इन राष्ट्रीय संपत्तियों को ऐसी क्षति होगी, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।'

बिजली संयंत्रों तक पहुंचने लगा है पर्याप्त कोयला
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से चौतरफा प्रयासों से बिजली उत्पादन पर असर भी नजर आने लगा था। जैसे कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड में स्पॉट प्राइस एक किलोवॉट/घंटे 3.76 रुपये तक आ गया था। जो कि पिछले हफ्ते 12 साल में सबसे ऊंचाई पर पहुंचने का बाद से 77% कम है। जाहिर है कि बिजली संयंत्रों की मांग काफी हद तक पूरी होनी शुरू हो गई थी। मुंबई में एलरा कैपिटल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट रुपेश संखे ने कहा है कि , 'स्थिति सुधरती हुई नजर आ रही है और सिर्फ यही उम्मीद की जा सकती है कि बारिश इसे बर्बाद न कर दे।.........अगर बारिश ज्यादा दिन तक होती है तो कोल इंडिया को उसके लिए तैयार रहना होगा और जहां कहीं भी उत्पादन हो सकता है, उत्पादन में तेजी लाने की आवश्यकता पड़ेगी।'

बारिश से इस फायदे की भी उम्मीद
वैसे देश में जारी बारिश की स्थिति से कोयला सप्लाई को लेकर चिंताएं जरूर फिर से बढ़ने लगी हैं, इसके कुछ फायदे भी नजर आ रहे हैं। एक तो बारिश की वजह से मौसम में ठंडापन आया है जिससे बिजली की मांग घटने लगेगी। ऊपर से बारिश की वजह से हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन बढ़ने की संभावना है।











Click it and Unblock the Notifications