Explainer: गाजियाबाद से वीके सिंह का पत्ता क्यों कटा? इन वजहों के चलते BJP ने किया किनारा
VK singh News, बीजेपी ने लोकसभा चुनावों को लेकर अभी तक उम्मीदवारों की छह सूचियां जारी कर दी हैं। इन कैंडिडेट लिस्ट में कई नामों को शामिल नहीं किया है। वहीं कई मौजूदा बीजेपी सांसदों ने चुनाव ना लड़ने का भी ऐलान कर दिया है। इसमें एक नाम पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह का है।
वीके सिंह ने एक्स पर लिखा था कि, मैंने सैनिक के रूप में इस राष्ट्र की सेवा में अपना सारा जीवन समर्पित किया है। पिछले 10 वर्षों से, मैंने गाजियाबाद को एक विश्व स्तरीय शहर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया है। मैं 2024 के चुनावों में नहीं लड़ूंगा। यह निर्णय मेरे लिए आसान नहीं था, परंतु मैंने इसे अपने दिल की गहराइयों से लिया है।

वीके के सिंह का टिकट काटे जाने पहले ही उन्होंने ट्वीट कर चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया था। गाजियाबाद से बीजेपी ने मौजूदा विधायक अतुल गर्ग को टिकट दिया है। गर्ग के प्रत्याशी बनाए जाने में प्रदेश संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। वीके सिंह के चुनाव ना लड़ने के ऐलान के पीछे कई तरह की कयासबाजी चल रही हैं।
वीके सिंह की स्थानीय विधायकों से खींचतान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, वीके सिंह ने गाजियाबाद और उसके आसपास के विधायकों के बारे में कई बार केंद्र और प्रदेश संगठन के नेताओं से शिकायत की थी। जिसके चलते 2017 की योगी सरकार में मंत्री रहे अतुल को 2022 में मंत्री नहीं बनाया गया था। यही नहीं जिले के विधायकों और स्थानीय संगठन के साथ वीके सिंह की काफी समय से खींचतान चल रही थी। दोनों ही ओर से एक दूसरे पर कई बार आरोप प्रत्यारोप लगाए गए।
जिसके चलते संगठन और स्थानीय विधायकों में वीके सिंह को लेकर नाराजगी थी। इस आपसी खींचतान में बीजेपी का संगठन वीके सिंह का बजाय अपने स्थानीय विधायकों के साथ खड़ा नजर आया था। जिसकी एक बानगी मंत्री मंडल में विस्तार होने पर साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा को मंत्री बनाया जाना था।
बीजेपी ने वीके सिंह की जगह अतुल गर्ग को क्यों चुना?
अतुल गर्ग 2017 और 2022 में विधायक रहने के चलते संघ के पदाधिकारियों के साथ उनके संबंध काफी मजबूत हैं। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी से भी उनकी नजदीकियां रहीं हैं। 2017 में चुनाव जीतने के बाद उनके तत्कालीन प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी काफी अच्छे संबंध बन गए थे। सुनील बंसल के एक बार फिर से राष्ट्रीय टीम में सक्रिय होने की कारण अतुल फिर से मजबूत माने जाने लगे थे।
वीके सिंह के खिलाफ थी सत्ता विरोधी लहर
वीके सिंह के टिकट कटने की एक वजह एंटी इंकम्बेंसी बताई जा रही है। गाजियाबाद में उन्हें लेकर पार्टी को पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। सूत्रों का ये भी कहना था कि, पार्टी के इंटरनल सर्वे में वीके सिंह काफी कमजोर नजर आ रहे थे। जिसके चलते पार्टी ने गाजियाबाद से उनका टिकट काट दिया। सूत्रों ने बताया कि गाजियाबाद गाजियाबाद से प्रत्याशी की घोषणा न होने से वीके सिंह काफी असहज महसूस कर रहे थे।
गाजियाबाद से उम्मीदवारी के ऐलान में हो रही देरे के बीच रविवार को उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से बात भी की। जिसके बाद उन्हें टिकट न मिलने के संकेत मिल गए थे। इससे पहले टिकट कटता उन्होंने एक्स पर चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications