बार-बार अनुरोध के बाद भी प्रियंका गांधी क्यों नहीं आ रहीं बिहार?

पटना। प्रियंका गांधी को कांग्रेस की नयी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में भी कांग्रेस के उम्मीदवार उन्हें तारणहार के रूप में देख रहे थे। कांग्रेस के नेताओं ने उनसे कई बार बिहार आने की गुजारिश की। अनुनय- विनय किया। लेकिन वे अभी तक बिहार नहीं आयी हैं। करीब-करीब आधा चुनाव हो गया है। कांग्रेस के नेता अब भी टकटकी लगाये हुए हैं कि प्रियंका कम से कम बाकी बचे तीन सीटों पर चुनावी रैलियां कर दें। वैसे अभी तक प्रियंका गांधी कभी बिहार नहीं आयी हैं। इस लिए उनको लेकर बहुत उत्सुकता है।

प्रियंका से बहुत पहले किया गया था अनुरोध

प्रियंका से बहुत पहले किया गया था अनुरोध

प्रियंका गांधी जब से कांग्रेस महासचिव बनी हैं तब से पार्टी में एक नये उत्साह का संचार हुआ है। बिहार कांग्रेस के नेताओं ने पहले चरण के चुनाव के पूर्व ही कांग्रेस आलाकमान के पास प्रियंका गांधी के कार्यक्रम के लिए लिखित अनुरोध किया था। राहुल गांधी तो चुनाव प्रचार के लिए बिहार आये लेकिन प्रियंका का कार्यक्रम नहीं बन सका। बिहार कांग्रेस ने फिर निवेदन किया तो कहा गया कि प्रियंका गांधी अभी पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यस्त हैं, इस लिए फिलहाल नहीं आ सकतीं। बिहार में राजद ने कांग्रेस के साथ अच्छा सलूक नहीं किया है। उसके एक मौजूदा सांसद रंजीत रंजन को हराने के लिए राजद नेता सक्रिय रहे। यहां के नेताओं का मानना था कि अगर प्रियंका गांधी बिहार की सभी नौ सीटों पर चुनावी सभाएं कर देती तो सबका बेड़ा पार हो जाता।

अब तीन सीटें ही बचीं हैं कांग्रेस की

अब तीन सीटें ही बचीं हैं कांग्रेस की

अब प्रचार के लिए केवल छठे और सातवें चरण का चुनाव बचा है। छठे चरण में कांग्रेस की एक सीट बाल्मीकि नगर है जब कि सातवें चरण में कांग्रेस की दो सीटें हैं, पटना साहिब और सासाराम। सासाराम हाईप्रोफाइल सीट है। यहां सातवें चरण में 19 मई को चुनाव होना है। इस सीट पर लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार चुनाव लड़ रही हैं। मीरा कुमार के सोनिया गांधी से व्यक्तिगत रिुश्ते रहे हैं। मीरा कुमार ने अपने स्तर से भी प्रियंका के कार्यक्रम के लिए कोशिश की है। पिछले चुनाव में मीरा कुमार भाजपा के छेदी पासवान से हार गयीं थीं। इस लिए वे जीत के लिए प्रियंका की तरफ देख रही थीं। वाल्मीकि नगर में 12 मई को चुनाव होना है। इस सीट बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय के पौत्र शाश्वत केदार चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस को यह सीट बहुत उठापटक के बाद मिली है। इस लिए कांग्रेस अपनी साख के लिए इस सीट को जीतना चाहती है। पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा से कांग्रेस में आने के बाद भी वे चुनाव प्रचार के लिए अपनी निजी टीम पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं पर शत्रुघ्न सिन्हा को यकीन नहीं है। उम्मीदवार बनने के बाद वे अभी तक दो बार कांग्रेस दफ्तर गये हैं और दोनेों ही बार उनकी टीम और पार्टी कार्यर्ताओं में तनातनी की नौबत आ गयी थी। अब यह माना जा रहा है कि अगर प्रियंका बिहार नहीं आयीं तो इन तीनों सीटों पर राहुल गांधी प्रचार करेंगे।

क्या प्रियंका के बयान से कांग्रेस को नुकसान होगा?

क्या प्रियंका के बयान से कांग्रेस को नुकसान होगा?

प्रियंका गांधी ने 1 मई को अमेठी में ये बयान दिया था कि यूपी में कांग्रेस के उम्मीदवार इस तरीके से खड़ा किये गये हैं ताकि वे भाजपा का अधिक-अधिक वोट काट सकें। इस बयान के बाद कांग्रेस को वोटकटवा करार दिया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस जीतने के लिए नहीं बल्कि भाजपा को हराने के लिए चुनाव लड़ रही है। प्रियंका गांधी ने एक व्यापक संदर्भ में ये बात कही थी लेकिन विरोधी दल इसका राजनीति इस्तेमाल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन से अलग है लेकिन बिहार में य़ह महागठबंधन का हिस्सा है। बिहार में एनडीए के नेता प्रियंका के इस बयान को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं और कांग्रेस को वोटकटवा कह कर खारिज कर रहे हैं। अगर प्रियंका बिहार आ कर एस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर देतीं तो यहां के कांग्रेस उम्मीदवारों का भला होता।

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