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ऐसे तो सीक्रेट ही रह जाएगा बेंगलुरु चर्च स्‍ट्रीट ब्‍लास्‍ट

बेंगलुरु। अभी आपने उन सभी आतंकी साजिशों के बारे में जाना (CLICK ON PREVIOU) जो बेंगलुरु में अंजाम दी गई थी। यह भी जाना कि आखिर कैसे एनआईए बेंगलुरु से जुड़ी आतंकी साजिशों को अपने ही तरीकों से नजरअंदाज करती आई। अब जानिए कि आखिर क्‍यों बेंगलुरु का चर्च स्‍ट्रीट ब्‍लास्‍ट सिर्फ एक सीक्रेट बनकर रह जाएगा। किस वजह से एनआईए कर्नाटक में जांच के लिए आगे आना ही नहीं चाहती है और इसकी सबसे बड़ी वजह है राज्‍य की पुलिस।

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कर्नाटक पुलिस से निराश है एनआईए

एनआईए के कई अधिकारियों से बात करने पर साफ पता लगता है कि कर्नाटक में आतंकी घटनाक्रम और इसकी जांच को लेकर एनआईए काफी हद तक असंतुष्‍ट है। एनआईए अधिकारी कहते हैं कि जांच में पड़ने से पहले वह

स्थिति का निरीक्षण करेंगे। भले ही अधिकारी साफतौर पर इस बात को नहीं कह रहे हों लेकिन वह बेंगलुरु पुलिस के एक केस का जिक्र करना भी नहीं भूलते हैं। इस केस में बेंगलुरु पुलिस ने कई युवाओं को गिरतार किया है जिन पर कई पत्रकारों और हिंदु नेताओं को मारने की साजिश रचने का आरोप है।

एनआईए को लगता है कि इस केस में थोड़ा दम था लेकिन इसे खत्‍म कर दिया गया। एनआईए के मुताबिक जब पुलिस को कुछ समझ नहीं आया तो उसने एनआईए से जांच का अनुरोध किया। एनआईए ने जांच का जिम्‍मा संभाला और उसने केस को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल कर दी।

जब पुलिस असफल तो एनआईए का सहारा

एनआईए के मुताबिक इस केस में उन्‍हें जांच मिलने के बाद यह उन्‍हें यह अहसास हुआ कि उन्‍हें सिर्फ एक क्‍लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए ही जांच में शामिल किया था। यह एजेंसी के साथ ही साथ अधिकारियों के लिए भी काफी शर्म की बात थी। एनआईए के मुताबिक जब पुलिस जांच में कुछ नहीं कर सकी तो उसे जांच की जिम्‍मेदारी सौंप दी गई है।

एनआईए के मुताबिक जब उसने इस मामले की जांच की तो उसे पता चला कि बिना किसी सहीं जांच के ही लोगों पर केस दर्ज कर दिया गया था। यहां तक कि पुलिस के कुछ अधिकारी भी बिना किसी निष्‍कर्ष के नतीजे पर पहुंच गए थे और ऐसे में उसके पास केस को बंद करने के अलावा कोई और विकल्‍प नहीं बचा था।

पुलिस का गलत रवैया

दूसरी ओर वहीं जनता को यह बताने की कोशिश की गई कि एनआईए ने पूरा केस बिगाड़ दिया और वही इस केस में शामिल लोगों के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई न हो पाने के लिए जिम्‍मेदार है। एनआईए के अधिकारियों की मानें तो अदालत ने भी इस केस में उस पर अपना गुस्‍सा जाहिर कर दिया।

एनआईए के मुताबिक उसके लिए यह काफी अपमानजनक बात थी कि अदालत किसी केस को लेकर उस पर अपना गुस्‍सा जाहिर करे। अदालत की कोई भी प्रतिक्रिया एजेंसी की क्षमताओं पर कई सवाल खड़े कर देती है। एनआईए की मानें तो एक केंद्रीय एजेंसी है जो अतंराष्‍ट्रीय पुलिस के साथ मिलकर काम करती है। साथ ही वह विदेशों में रखे गए अपराधियों के प्रत्‍यर्पण के लिए भी काम करती है।

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