चुनाव जीतकर आए सांसदों को क्यों छोड़नी होती है एक सीट? यहां जानें वजह
Election: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले हुए 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बहुमत के साथ बीजेपी ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस ने बाजी मारी। इस बार चुनाव में बीजेपी ने कुल 21 सांसदों को मैदान में उतारा था। जिसमें से 12 सांसद चुनाव जीते और 9 को हार मिली।
खास बात यह है कि इन 12 सांसदों में से 11 ने बुधवार को लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है। अभी तक राजस्थान से चुनाव जीतने वाले बालक नाथ ने इस्तीफा नहीं दिया है। हालांकि, चुनाव जीतने के 10 दिन में सांसदों को लोकसभा या राज्य सभा की सीट में से एक को चुनना पड़ता है। आइए विस्तार में जानें क्यों छोड़नी पड़ती है एक सीट?

दरअसल, लोकसभा हो या राज्यसभा, कोई भी व्यक्ति एक का ही सदस्य हो सकता है। यह रिप्रिजेंशन ऑफ पीपल एक्ट (1951) कहता है। नियम के मुताबिक, कोई व्यक्ति लोकसभा और राज्यसभा दोनों में सदस्य चुना गया हो तो उसे एक सीट को त्यागना पड़ता है। व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होता है कि वो लोकसभा का सदस्य रहना चाहता है या राज्यसभा का। यह उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। यदि 10 दिन के अंदर व्यक्ति ने स्पष्ट नहीं किया, तो अपने आप ही उसकी सीट खाली हो जाती है।
खाली हुई सीटों का क्या ?
अब यह सवाल आपके जेहन में उठना लाजमी है कि इस्तीफा देने के बाद इन रिक्त हुई सीटों का क्या होता है? नियम के मुताबिक, संसद या विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली सीट को चुनाव के जरिए दोबारा भरा जाता हैं। खास बात यह है कि यह चुनाव 6 महीने के अंदर ही करवाया जाता है।












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