कांग्रेस को मायवती की दो टूक से क्या मोदी को होगा फायदा?

नई दिल्ली- बीएसपी सुप्रीमो मायावती काफी पहले से संकेत दे रही थीं कि वह कांग्रेस से तालमेल नहीं करना चाहतीं। पहले लग रहा था कि वो कांग्रेस पर दबाव बनाकर रखना चाहती हैं, ताकि वह यूपी में ज्यादा सीटों की मांग न कर सके। लेकिन, अब उन्होंने कह दिया है कि उत्तर प्रदेश तो क्या, किसी भी राज्य में कांग्रेस के साथ कोई तालमेल नहीं हो सकता। दरअसल, मायावती की राजनीति को करीब से पढ़ने वाले लोग समझते हैं कि वो किसी भी कीमत पर अपनी राजनीति से कभी समझौता नहीं करतीं। उन्हें यकीन है कि कुछ भी हो जाए उनका वोटर उनके साथ रहेगा। लिहाजा वो कोई भी सियासी फैसला बहुत ही तोलमोल कर करती हैं और राजनीति में किसी का हिसाब चुकता भी नहीं छोड़तीं।

कांग्रेस को सबक सिखाना हो सकता है मकसद

कांग्रेस को सबक सिखाना हो सकता है मकसद

कुछ महीने पहले की बात है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को पटखनी देने के लिए बीएसपी ने कांग्रेस के साथ तालमेल की भरपूर कोशिश की थी। लेकिन, मायावती के लाख चाहने के बाद भी कांग्रेस उनके साथ गठबंधन के लिए राजी नहीं हुई। कयास लगाए जा रहे हैं कि मायावती के मन में आज भी उस बात की नाराजगी है। अगर हम मध्य प्रदेश और राजस्थान में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों का आंकड़ा लें, तो दोनों राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी का वोट शेयर लगभग बराबर है। जबकि, मध्य प्रदेश में बीएसपी को करीब 5 फीसदी और राजस्थान में करीब 4 फीसदी वोट मिले थे। यानी कांग्रेस ने भले ही सरकार बना ली हो, लेकिन अगर उसने बीएसपी से समझौता किया होता,तो बीजेपी की हार का फासला और भी ज्यादा हो सकता था। ऊपर से मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को दो विधायकों का समर्थन देने के बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बनाना भी शायद बीएसपी को जरूर खल चुका है। मौजूदा लोकसभा चुनाव में बीएसपी ने यूपी के अलावा मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लिया है। यानी उन राज्यों में भले ही बीएसपी खुद ज्यादा कामयाब न हो पाए, लेकिन कांग्रेस का खेल तो बिगाड़ ही सकती है।

वोट बैंक में सेंध लगने का डर

वोट बैंक में सेंध लगने का डर

आजादी के बाद से ही कांग्रेस उत्तर प्रदेश में दलित-मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं पर डोरे डालते रही है। लेकिन, आज यूपी का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। मायावती को राज्य की 20 फीसदी से ज्यादा दलित जनसंख्या पर पक्का यकीन है। ऐसे में वो किसी भी सूरत में अपने वोट बैंक को कांग्रेस में नहीं जाने देना चाहतीं। वैसे भी उनकी शिकायत रही है कि बीएसपी का वोट तो कांग्रेस में ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन कांग्रेस अपना वोट बीएसपी में ट्रांसफर नहीं करा पाती। इस बीच इंडिया टुडे की खबरों के मुताबिक इस साल के लोकसभा चुनाव में भी बीएसपी यूपी में ब्राह्मण उम्मीदवारों को ही अधिकतम टिकट (करीब 14) देने जा रही है। यानी बीजेपी से किसी कारण से नाराज ब्राह्मण समाज छिटकर कांग्रेस में न चला जाय, उसने इसका भी पहले से ही इंतजाम कर लिया है। ऊपर से एसपी के साथ रहने के कारण उन्हें मुस्लिम मतदाताओं का महागठबंधन के पक्ष में ही एकजुट मतदान करने की भी पूरी उम्मीद है। इसलिए,बंगलुरु में सोनिया के साथ मिलकर तस्वीरें खिंचवाने के बावजूद वो कांग्रेस के लिए महागठबंधन की सीटें छोड़ने के लिए कत्तई तैयार नहीं हुईं।

बुआ के कारण बबुआ लाचार

बुआ के कारण बबुआ लाचार

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की दोस्ती के नारे लगाए गए थे। इस बार भी समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को कभी खारिज नहीं किया है। ऊपर से एसपी के मुखिया तो यहां तक कह चुके हैं कि हम कांग्रेस के साथ तालमेल करके ही तो चुनाव लड़ रहे हैं, तभी तो अमेठी और रायबरेली की सीटें उसके लिए छोड़ी गई हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश तो कांग्रेस के साथ गठबंधन चाहते थे, लेकिन बुआ के विरोध के कारण ही उन्हें महागठबंधन में जगह नहीं दिला पा रहे थे।

जाहिर है कि मायावती के कांग्रेस से गठबंधन नहीं करने के ऐलान से सबसे ज्यादा खुश बीजेपी ही हो रही होगी। माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस के साथ बीएसपी का यूपी के अलावा भी बाकी राज्यों में तालमेल हो जाता तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में भी बीजेपी की चिंता बढ़ सकती थी।

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