मणिपुर HC का वह निर्देश क्या था, अब उसे खुद ही क्यों हटाया? राज्य में भड़क गई थी जातीय हिंसा
मणिपुर हाई कोर्ट ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में शामिल करने के अपने ही निर्देश को मिटा दिया है। हाई कोर्ट ने यह निर्देश राज्य सरकार को दिया था, जिसके बाद प्रदेश में पिछले साल 3 मई से जातीय हिंसा भड़क गई थी।
मणिपुर हाई कोर्ट ने अपने निर्देश को हटाने के साथ ही कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की ओर से की गई टिप्पणियों के पूरी तरह खिलाफ था। हाई कोर्ट के उस निर्देश के बाद राज्य में जातीय हिंसा भड़क गई थी, जिसकी वजह से अबतक 200 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं।

मणिपुर हाई कोर्ट ने मिटाया अपना ही विवादास्पद निर्देश
बुधवार को मणिपुर हाई कोर्ट के जज जस्टिस गोलमेई गाइफुलशिलु ने एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के पुराने निर्देश से विवादास्पद पैरा को हटाने का आदेश दिया है।
मणिपुर सरकार को कब दिया गया था निर्देश
पुराना निर्देश मणिपुर हाई कोर्ट के तत्कालीन ऐक्टिंग चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन की बेंच की ओर से 27 मार्च, 2023 को सुनाए गए फैसले का हिस्सा था।
मणिपुर हाई कोर्ट का निर्देश क्या था?
तब अदालत ने मणिपुर सरकार को निर्देश दिया था कि मैतेई समुदाय को राज्य की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की लिस्ट में शामिल करने पर विचार करे। इसकी वजह से राज्य में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क गई।
27 मार्च, 2023 के फैसले के विवादास्पद पैरा में लिखा गया था, 'फर्स्ट रेस्पॉन्डेंट मीतेई/मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने के लिए याचिकाकर्ताओं के मामले पर जल्द से जल्द अधिकतम इस आदेश की कॉपी प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर विचार करेगा....'
अब मणिपुर हाई कोर्ट ने उस निर्देश में क्या पाया?
लेकिन, जस्टिस गोलमेई गाइफुलशिलु ने अपने आदेश में कहा है कि निर्देश को सावधानीपूर्वक देखने के बाद, 'मैं संतुष्ट हूं कि 27 मार्च, 2023 को सिंगल जज की ओर से जारी निर्देश का पैरा नंबर 17(iii) जिस पर यहां आपत्ति जताई गई है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि सिंगल जज की ओर से दिए गए निर्देश का पैरा नंबर 17(iii) सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की ओर से की गई टिप्पणी के खिलाफ है।'
मणिपुर हाई कोर्ट ने अब क्या आदेश दिया है?
अदालत ने आगे कहा, 'उसी के मुताबिक पैरा नंबर 17(iii) में दिया गया निर्देश मिटाने की जरूरत है और उसी अनुसार 27 मार्च, 2023 के फैसले और आदेश का पैरा नंबर 17(iii) मिटाने का आदेश दिया जाता है।'
अक्टूबर में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई को राजी हो गया था हाई कोर्ट
पिछले साल अक्टूबर में मणिपुर हाई कोर्ट की एक डिविजन बेंच उस आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए राजी हो गई थी। यह अपील ऑल मणिपुर ट्राइबल यूनियन और विभिन्न समूहों ने दाखिल की थी।
उनकी दलील थी कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों से जुड़ा समूह उस रिट याचिका में कोई पक्ष नहीं था, जिसके आधार पर 27 मार्च, 2023 का निर्देश जारी किया गया था।
विवादास्पद निर्देश जारी होने के बाद क्या हुआ?
अदालत के उस आदेश के बाद से राज्य में बहुत ही अराजक स्थिति पैदा हुई और आजतक वहां दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हो चुके हैं।
रह-रहकर हिंसक वारदातों की खबरें सामने आती हैं। हिंसा भड़काने में विदेश ताकतों के हाथ होने की भी आशंका जताई जा चुकी है। विपक्ष इन घटनाओं के लिए सत्ताधारी बीजेपी को निशाना बनाता रहा है।












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