तेलंगाना में चुनाव के आखिर क्यों कालेश्वरम प्रोजेक्ट पर हो रहा हंगामा? जानिए 5 वजह
तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस केसीआर सरकार के खिलाफ कालेश्वरम प्रोजेक्ट को अहम मुद्दा बना रही हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बीच यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। 1.5 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट को लेकर विपक्ष केसीआर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है।
क्या है कालेश्वरम प्रोजेक्ट
कालेश्वर लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट के पहले चरण की शुरुआत 21 जून 2019 में की गई थी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.5 लाख करोड़ रुपए है। यह दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई और पेयजल परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य तेलंगाना में बहने वाली गोदावरी नदी और अन्य नदियों के पानी को लिफ्ट करके राज्य को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मुहैया कराना है।

दोगावरी नदी समुद्र तल से 100 मीटर ऊपर बहती है, जबकि तेलंगाना 300-650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस परियोजना के जरिए तेलंगाना के 20 जिलों में 45 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस परियोजना से तेलंगाना सहित महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश को भी लाभ होगा।
क्यों है विवाद में
चुनाव के बीच यह मुद्दा इसलिए विवादों में बना हुआ है क्योंकि जयशंकर भूपालपल्ली जिले में मेदिगड्डा बैराज के कई खंबे 21 अक्टूबर को क्षतिग्रस्त पाए गए थे। जिसके बाद सहायकर कार्यकारी अभियंता ने महादेवपुर पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।
निरीक्षण में पाया गया कि 3 खंबे क्षतिग्रस्त है और ये डूब गए। 30 नवंबर को विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा गरमा गया है और भाजपा व कांग्रेस दोनों ही इसकी डिजाइन में खामी का आरोप लगाते हुए बीआरएस सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
एनडीएसए रिपोर्ट
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से अपील की गई थी इस मामले की जांच कराने के लिए केंद्रीय टीम को भेजा जाए। राहुल गांधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी ने 2 नवंबर को मेदिगड्डा बैराज का दौरा किया था। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की टीम ने भी मौके पर मुआयना के लिए टीम को भेजा।
टीम ने 3 नवंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमे बैराज के डिजाइन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। साथ ही गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया है। साथ ही सुझाव दिया गया है कि 7 पिलर का नींव से फिर से निर्माण किया जाना चाहिए।
केसीआर ने खारिज किए आरोप
वहीं केसीआर सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और आरोप लगाया है कि इस पैनल ने जल्दबाजी में इस रिपोर्ट को तैयार किया है और सभी जानकारियों का विवरण नहीं दिया है। तेलंगाना सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रजत कुमार ने एनडीएसए के अध्यक्ष संजय कुमार सिब्बल को पत्र लिखकर कहा कि रिपोर्ट में कई टिप्पणियां अप्रमाणिक हैं।
भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है .यही वजह है कि इस परियोजना की गणवत्ता के साथ समझौता हुआ है।
इसमे एक लाख करोड़ से अधिक खर्च हुआ है, प्रदेश सरकार ने काफी बड़ा कर्ज भी लियाहै। ऐसे में इसकी खामियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है।
चुनावी रैलियों में राहुल गांधी ने इस प्रोजेक्ट को केसीआर परिवार का एटीएम कहा है और आरोप लगाया है कि इससे सीएम परिवार को काफी फायदा हुआ है। वहीं केसीआर ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
बीआरएस का कहना है कि नुकसान उतना गंभीर नहीं है जितना विपक्ष बता रहा है। चुनाव के दौरान जानबूझकर इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं बैराज का निर्माण करने वाली कंपनी एलएंडटी का कहना है कि हम क्षति की मरम्मत का काम कर रहे हैं।












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