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पंजाब में अमरिंदर सिंह के लिए 'कौवा खाने' जैसी बात क्यों कह रही है कांग्रेस ?

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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने का ऐलान करके चुनाव से कुछ महीने पहले पुरानी पार्टी को बहुत बड़े संभावित संकट में डाल दिया है। हालांकि, कांग्रेस के कर्ताधर्ता नेता यह जताने की कोशिश जरूर कर रहे हैं कि पार्टी या सरकार पर अमरिंदर के ऐलान से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उलटे यहां तक दावा किया जा रहा है कि अमरिंदर के पार्टी बनाने से कांग्रेस-विरोधी दलों को ही नुकसान होने वाला है। कैप्टन की नई राजनीति को लेकर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने आज अपने दल के बचाव में मोर्चा खोला है। उन्होंने कहा है कि यदि कैप्टन 'कौवा खाना' चाहते हैं तो खाएं!

'विरोधी दलों का वोट बंटेगा, कांग्रेस का नहीं'

'विरोधी दलों का वोट बंटेगा, कांग्रेस का नहीं'

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी बनाने की बात करके कांग्रेस की टेंशन जरूर बढ़ा दी है। हालांकि, कैप्टन ऐसा करने का संकेत पहले से ही दे रहे थे, लेकिन जब उन्होंने घोषणा कर ही दी है तो पार्टी ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोलने में कोई देर नहीं की है। इसके लिए आगे किया गया है प्रदेश के पार्टी प्रभारी हरीश रावत को, जिनका दावा है कि कैप्टन के फैसले से कांग्रेस का नहीं, बल्कि उसकी विरोधियों का वोट बंट जाएगा। हरीश रावत का मानना है कि 'हमारा वोट चन्नी सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। जिस तरह से चन्नी ने शुरुआत की है, इससे पंजाब और पूरे देश के सामने एक अच्छी छवि कायम हुई है।'

'अंदर के 'धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर' को मार डाला है'

'अंदर के 'धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर' को मार डाला है'

अमरिंदर सिंह के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रावत ने कहा है कि, 'अगर वह धर्मनिरपेक्षा के प्रति अपनी पुरानी प्रतिबद्धता पर कायम नहीं रह सकते तो उनको कौन रोक सकता है? उन्हें 'सर्वधर्म संभाव' का प्रतीक माना जाता था और वह लंबे समय से कांग्रेस की परंपरा से जुड़े हुए थे। अगर वह जाना चाहते हैं तो उन्हें जाना चाहिए।' इसके बाद रावत ने अमरिंदर के मंसूबे पर अपनी भड़ास निकालनी शुरू की। उन्होंने कहा है, 'बीजेपी को कौन माफ कर सकता है, जिसने 10 महीनों से किसानों को बॉर्डर पर रखा है? जिस तरह से उन्होंने किसान आंदोलन के साथ किया है, क्या पंजाब उसे माफ कर सकता है ? उनका बयान सही में चौंकाने वाला है। ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने अंदर के 'धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर' को मार डाला है।'

कांग्रेस क्यों कह रही है 'कौवा खाने' जैसी बात ?

कांग्रेस क्यों कह रही है 'कौवा खाने' जैसी बात ?

दरअसल, अमरिंदर ने न सिर्फ नई पार्टी बनाने की बात कही है, बल्कि यहां तक कहा है कि अगर किसानों का मसला सुलझ जाता है तो उनकी भावी पार्टी बीजेपी के साथ तालमेल भी कर सकती है। कांग्रेस को यही बात खल गई है, जो कि अमरिंदर के बागी तेवर देखने के बाद से ही उनपर भाजपा के साथ साठगांठ का आरोप लगाती आ रही है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने अमरिंदर के भाजपा के साथ सीटों के तालमेल को लेकर कहा है कि 'अगर कैप्टन कौवा खाना चाहते हैं और बीजेपी के साथ जाना चाहते हैं तो वो कर सकते हैं।' पार्टी अपना बोल्ड फेस सामने रहकर यही समझाने की कोशिश कर रही है कि अमरिंदर के फैसले से उसकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

बीजेपी के साथ तालमेल की ओर किया है इशारा

बीजेपी के साथ तालमेल की ओर किया है इशारा

इससे पहले मंगलवार को पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा कि 'पंजाब के भविष्य के लिए जंग जारी है। एक साल से ज्यादा समय से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हमारे किसानों समेत पंजाब और उसके लोगों के हित के लिए जल्द ही अपना राजनीतिक दल शुरू करने की घोषणा करेंगे।' उन्होंने साफ कहा कि यदि किसानों का मसला सुलझ जाता है तो वह बीजेपी के साथ सीटों के तालमेल को लेकर आशांवित हैं। अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा पहले ही कर दी थी, लेकिन अपने अगले कदम की जानकारी नहीं दी थी। अलबत्ता मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद वह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिल चुके हैं, जिसे उन्होंने पंजाब की सुरक्षा से जुड़े विषय पर मुलाकात होने की बात कही थी।

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अमरिंदर पर जांच बिठाए बीजेपी- डिप्टी सीएम

अमरिंदर पर जांच बिठाए बीजेपी- डिप्टी सीएम

उधर अमरिंदर के इरादों पर पंजाब के डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी उनपर हमला बोला है। उन्होंने कहा है, 'बीजेपी के साथ सीटों के तालमेल की घोषणा करके जिसके खिलाफ वह हमेशा बोलते रहे हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद को बर्बाद कर लिया है। 1984 में इस्तीफे के बाद अमरिंदर सिंह के ठिकाने और पाकिस्तान के साथ उनके संबंधों को लेकर बीजेपी को जांच करनी चाहिए।... ' वो बोले कि 'निश्चित रूप से उनपर कुछ दबाव होगा। उनके और उनके बच्चों के खिलाफ कई केस दायर हुए हैं। हमें अमरिंदर के फैसले से किसी तरह का डर नहीं है।' सवाल है कि कांग्रेस अमरिंदर पर अब जो गंभीर सवाल उठा रही है, उनके मुख्यमंत्री रहते हुए उसपर क्यों चुप रही ?

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English summary
Captain Amarinder Singh announcement to form a separate party in Punjab, Congress reacts – if he wants to eat crow then eat
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