एनसीपी की बैठक में क्यों नहीं शामिल हुए अजित पवार? कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने बताई वजह

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार बुधवार को दिल्ली में हुई पार्टी की बड़ी बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्टी चीफ शरद पवार ने हाल ही में संगठन में काफी बदलाव किए हैं। उनकी अनुपस्थिति पर अब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने सफाई दी है।

प्रफुल्ल पटेल के मुताबिक अजित पवार की दिल्ली बैठक में गैर-मौजूदगी किसी भी तरह से असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह बैठक एनसीपी राष्ट्रीय कार्यसमिति की नहीं थी, बल्कि यह सिर्फ पार्टी की महिला इकाई, छात्र इकाई और युवा इकाई के पदाधिकारियों के लिए थी।'

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राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक नहीं थी- प्रफुल्ल पटेल
प्रफुल्ल पटेल महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों के लिए हाल ही में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए हैं। उन्होंने बताया है कि अजित पवार इसी वजह से बैठक में नहीं आए थे, क्योंकि वह इन विशेष इकाइयों के पदाधिकारी नहीं हैं। उनकी अनुपस्थिति को लेकर इसलिए चर्चा हो रही है कि कार्यक्रम के दौरान जो पोस्टर लगाए गए थे, उसमें उनकी तस्वीर भी नहीं थी।

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पोस्टर से भी गायब नजर आए प्रफुल्ल पटेल
पोस्टर में सिर्फ उनके चाचा और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार, सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल की तस्वीरें थीं। बेटी सुप्रिया सुले को शरद पवार ने महाराष्ट्र के लिए पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। अजित पवार चार बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं और हाल ही में उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की इच्छा जताई है। वह पार्टी संगठन में काम करने की मांग कर चुके हैं।

बेटी और अपने करीबी को अपने बाद की भूमिका दे चुके हैं शरद पवार
उनकी सियासी ख्वाहिश पर शरद पवार कह चुके हैं कि ऐसे फैसले एक आदमी नहीं ले सकता और इसके लिए पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ चर्चा करने की जरूरत है। हाल में जब अजित पवार के बीजेपी की ओर हमदर्दी रखने की अफवाहें उड़ी थीं, तभी पवार ने अपनी बेटी सुले और अपने करीबी पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया था।

अजित पवार के बारे में कहा जा रहा है कि वह महाराष्ट्र में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं, जिसपर अभी जयंत पाटिल काबिज हैं। पिछले महीने एक नाटकीय घटनाक्रम में शरद पवार ने पहले पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और फिर नेताओं के कहने पर उसे वापस भी ले लिया था। उसी के बाद उन्होंने जो संगठनात्मक फैसले लिए हैं, वह 2024 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर नया नेतृत्व तैयार करने की उनकी योजना की तरह दिख रही है।

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