केरल में तेजी से कम क्यों नहीं हुए कोरोना के मामले ? एक्सपर्ट ने ये बताया

तिरुवनंतपुरम, 9 जुलाई: केरल में पिछले कुछ दिनों में कोविड के रोजाना औसतन 12,226 नए मामले सामने आए हैं। अगर बीते 25 दिनों की बात करें तो वहां रोजाना के नए संक्रमण 10,000 से 15,000 के बीच रहे हैं, इससे कम केस कभी नहीं आए हैं। 8 जुलाई को वहां 13,772 लोग कोविड संक्रमित पाए गए। इसके ठीक उलट दूसरे राज्यों में रोजाना के संक्रमण की तादाद तेजी से घटी है। महाराष्ट्र जहां महामारी की शुरुआत से सबसे ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, वहां भी गुरुवार को महज 9,083 नए मामले ही पाए गए। सवाल है कि केरल में देश के बाकी राज्यों की तरह केस कम क्यों नहीं हो रहे हैं ?

 केरल में तेजी से कम नहीं हो रहा संक्रमण

केरल में तेजी से कम नहीं हो रहा संक्रमण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को जो डेटा जारी किया उसके मुताबिक महाराष्ट्र में हमेशा की तरह से सबसे ज्यादा 1,17,869 ऐक्टिव केस थे। दूसरे नंबर पर केरल था, जहां 1,08,400 ऐक्टिव मामले थे। अगर एक दिन पहले के डेटा के आधार पर देखें तो महाराष्ट्र में ऐक्टिव केस में 333 का इजाफा हुआ तो केरल में यह संख्या 3,823 बढ़ गई। केरल में नए संक्रमण का आंकड़ा देश में उस दिन सर्वाधिक था। लेकिन, महाराष्ट्र की तुलना में केरल में मरने वालों की संख्या काम कम रही। यही नहीं केरल में दूसरे राज्यों के मुकाबले कोरोना से ठीक भी ज्यादा लोग हुए है। वैसे केरल में डेली के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं, लेकिन अगर हम गौर करें तो मध्य जून से इसमें स्थिरता देखी जा रही, लेकिन इसी दौरान दूसरे राज्यों में केस तेजी से घट रहे हैं। उदाहरण के लिए 1 मई से 7 मई के बीच जब देश में दूसरी लहर में कोरोना का कहर चरम पर था, कर्नाटक और केरल में औसतन क्रमश: 46,045 और 36,239 डेली केस आ रहे थे। लेकिन, 30 जून से 6 जुलाई के बीच देखें तो कर्नाटक और केरल में औसतन रोजाना के केस क्रमश: 2,646 और 12,226 दर्ज हुए। इसलिए सवाल है केरल में लगातार यह स्थिति क्यों बनी हुई है?

केरल में तेजी क्यों नहीं घट रहे केस

केरल में तेजी क्यों नहीं घट रहे केस

केरल में बाकी राज्यों की तुलना में केस में तेजी से गिरावट क्यों नहीं आ रही है, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉक्टर जयप्रकाश मुलियिल इसके दो कारण बताते हैं। उनका दावा है कि, 'पहला केरल में ऐसे लोगों की संख्या कम है, जो कोविड-19 की पड़ताल से बच जाते हों। और दूसरा यह व्यवहार के कारण हो सकता है, क्योंकि जब भी लक्षण महसूस होता है तो ज्यादा लोग खुद की टेस्ट करवाने जाते हैं, बजाए इसे छिपाने के। अगर ज्यादातर लोगों को हल्का लक्षण रहता है तो वे अस्पतालों में एडमिट नहीं होते, लेकिन उनका केस तो दर्ज हो जाता है।'

केरल में अभी रहेगी ऐसी ही स्थिति-एक्सपर्ट

केरल में अभी रहेगी ऐसी ही स्थिति-एक्सपर्ट

यही नहीं कोच्चि की डॉक्टर पद्मनाभ शेनॉय कहती हैं कि 'जबकि अधिकांश राज्यों ने पहली लहर में तेजी से वृद्धि और गिरावट के साथ महामारी के कर्व में तेजी से बदलाव देखा, केरल में मामले धीरे-धीरे बढ़े।' हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि केरल में केस तेजी से कम नहीं हो रहे हैं, तो दूसरे राज्यों की तरह तेजी से बढ़े भी नहीं हैं। पल्लकड के इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर अरुण एनएम कहते हैं,'पहली लहर में केरल में दूसरे राज्यों की तरह केस में इजाफा नहीं हुआ। दूसरी लहर में भी वही हो रहा है। पहली लहर में 2020 के नवंबर से 2021 के जनवरी तक डेली के केस 5,000 से 6,000 के बीच बने रहे। मार्च में आकर यह 2000 के रेंज में पहुंचा।'डॉक्टर अरुण का कहना है मौजूदा स्थिति एक से दो महीने और रह सकती है।

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