उद्धव ठाकरे की 'सेक्यूलर' सरकार के सूत्रधार संजय राउत ने तब क्यों कहा था संविधान से हटा दें ये शब्द?
नई दिल्ली- महराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई में महा विकास अघाड़ी (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस) की जो सरकार बनी है, उसके कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में सेक्यूलर शब्द को प्रमुखता से जगह दी गई है। लेकिन, अगर शिवसेना के इतिहास को देखें तो पार्टी के नेता इस शब्द को संविधान से हटाने की वकालत करते रहे हैं। यही नहीं नाथूराम गोडसे की तारीफ को लेकर बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर जिस तरह से विपक्ष के निशाने पर हैं, उसकी तारीफों के पुल खुद शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे करीब तीन दशक पहले ही पुल बांध चुके थे।

राउत ने की थी सेक्यूलर शब्द संविधान से हटाने की मांग
2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर सूचना-प्रसारण मंत्रालय के एक प्रचार में संविधान की प्रस्तावना के दो शब्द छोड़ दिए गए थे, जिसको लेकर बहुत ज्यादा सियासी बवाल मचा था। ये शब्द थे- 'सेक्यूलर' और 'सोशलिस्ट'। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला करना शुरू कर दिया था। जबकि, सरकार की सफाई थी कि यह जानबूझकर नहीं हुआ है, बल्कि प्रस्तावना का मूल हिस्सा छप गया है। बता दें कि मूल संविधान की प्रस्तावना में ये दोनों शब्द नहीं थे और उन्हें इंदिरा गांधी की सरकार ने संविधान में 42वें संशोधन के जरिए इसे डाला था। 2015 में विवाद बढ़ने पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने मांग की थी कि इन दोनों शब्दों को, "आधिकारिक रूप से संशोधन के जरिए इन्हें संविधान की प्रस्तावना से हटा दें।" तब उन्होंने शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे का हवाला देकर ये कहा था कि 'बालासाहेब के मन में धर्मनिर्पेक्षता की कोई जगह नहीं थी।' लेकिन, संयोग देखिए कि अभी महाराष्ट्र में जो 'सेक्यूलर' गठबंधन बना है, उसके सूत्रधार खुद संजय राउत ही हैं।

शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे क्या कहते थे ?
नाथूराम गोडसे का परिवार महाराष्ट्र के पुणे में रहता था। 1991 में एक चुनावी रैली में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे कहा था कि नाथूराम गोडसे ने जो किया था वह, "गौरव की बात है, शर्म की नहीं और उसके चलते दूसरा विभाजन रुक गया था।" ठाकरे ने आरोप लगाया था, विभाजन न रोक कर गांधी ने "राष्ट्र के साथ धोखा किया" और "पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये से ज्यादा देने पर जोर डाला" इसी सब की वजह से गोडसे "वास्तव में व्यथित" था। गौरतलब है कि अभी भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के एक बयान को लेकर काफी विवाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर गोडसे की तारीफ की थी। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांग ली, लेकिन कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा था जिसका कि उनपर आरोप लगाया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से माफी मांगने को कहा, जिन्होंने गोडसे पर दिए उनके बयान के चलते उन्हें आतंकवादी कह दिया था।

गोडसे पर क्या कह चुके हैं उद्धव के मंत्री छगन भुजबल?
महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी सरकार में एनसीपी कोटे से कैबिनेट मंत्री बने छगन भुजबल पहले शिवसेना में भी रह चुके हैं। वे भी पहले गांधी जी की जगह उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रतिमा स्थापित करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने अपने विवादित बयान में मांग की थी, "गांधी की जगह नाथूराम गोडसे की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए।" सबसे बड़ी बात ये है कि एनसीपी चीफ शरद पवार पर भी आरोप लगते हैं कि उन्होंने ये कहकर इस विवाद को बढ़ावा दिया है कि, "बीजेपी और शिवसेना गांधीजी के हत्यारे गोडसे के पर्याय हैं।"












Click it and Unblock the Notifications