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कोलंबिया के चोरों ने बैंगलुरू को ही निशाना क्यों बनाया?

By Bbc Hindi

बैंगलुरू की 'हैपनिंग सिटी' (आर्थिक रूप से मज़बूत शहर) की छवि से आकर्षित होकर कोलंबिया के पाँच अपराधी यहाँ चोरियाँ करने चले आए.

इनमें से तीन तो कुछ सालों में ही दूसरी बार बैंगलुरू आए थे.

इस गैंग में सिर्फ़ एक व्यक्ति अंग्रेज़ी बोल सकता है. चोरियाँ करने के लिए उन्होंने एक बंगले को किराये पर लिया और आपस में बात करने के लिए वो वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल कर रहे थे.

सीसीटीवी वीडियो से पकड़े गये

बैंगलुरू के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम) बीके सिंह ने बीबीसी को बताया, "जहाँ तक मुझे पता है, बैंगलुरू में कभी किसी गैंग ने चोरियाँ करने के लिए वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल नहीं किया है."

सिंह कहते हैं, "उन्होंने हमें बताया है कि वो चोरियाँ करने बैंगलुरू आए क्योंकि वो इसे आर्थिक रूप से मज़बूत शहर मानते हैं. उन्होंने भारत के किसी और शहर में चोरियाँ करने के बारे में नहीं सोचा था."

इस गैंग ने चोरियाँ करने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया.

उन्होंने घरों की रेकी की और फिर जीपीएस के ज़रिए उनकी पहचान की. हालांकि उन्हें सीसीटीवी लगे होने का अहसास नहीं हुआ और बीते सप्ताह सीसीटीवी वीडियो के आधार पर ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

जिन घरों को उन्होंने निशाना बनाया था, उनमें से एक कर्नाटक के पूर्व मुख्य सचिव का है.


गिरफ़्तार किए गए अपराधी

होसे एडुआर्डो उर्फ़ एरिवालो बुरबानो (40), गुस्तावो ओडोल्फ़ो उर्फ़ जारामीलो जीराल्डो (47), याइर अलबर्टो सांचेज़ उर्फ़ रोज़र स्मिथ डुअर्टे(45), एडुआर्डो एलेक्सि गार्सिया पेरामाओ (38) और उनकी प्रेमिका किम्बरले ग्यूटेर्रेज़ (30).

इस गैंग ने शहर के दक्षिणी और दक्षिणी पूर्वी हिस्से में बड़े घरों की रेकी की थी.

गैंग की महिला सदस्य किम्बरले ग्यूटेर्रेज़ उन घरों की घंटी बजाती थीं जिनमें उन्हें लगता था कि भीतर कोई नहीं है. वो जीपीएस पर इन घरों को मार्क कर लेती थीं.


घड़ियां
PA
घड़ियां

पहले भी कर चुके हैं चोरियाँ

शहर में परिवहन के लिए इस गैंग ने पुरानी कारें ख़रीदी थीं.

वो जीपीएस की मदद से चिन्हित घरों तक पहुंचते थे. इनमें से तीन अपराधी घर के भीतर घुस जाते थे जबकि किम्बरले बाहर खड़ी रहकर नज़र रखतीं थीं.

एक सदस्य भागने के लिए कार लेकर तैयार रहता था.

घरों के दरवाज़े तोड़ने के लिए वो जटिल उपकरणों का इस्तेमाल करते थे.

जून और जुलाई के बीच में इस गैंग ने कथित तौर पर अस्सी लाख रुपये क़ीमत के जेवर और महंगी घड़ियाँ चुरा ली थीं.

वो सोने को पिघला कर उसे छड़ों में ढाल लेते थे और फिर बेच देते थे. हर चोरी के बाद वो इस्तेमाल की गई कार को ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बेच दिया करते थे.

इन पाँचों में से होसे, गुस्तावो और एडुअर्डो पहले भी चोरियाँ करने के लिए बैंगलुरू आ चुके हैं.

उन्होंने एक स्थानीय विधायक के घर को भी निशाना बनाया था. उस चोरी में उन्होंने चालीस लाख रुपये क़ीमत के जेवर उड़ा लिए थे.

https://twitter.com/BlrCityPolice/status/1020212986302980096

पाँचों अभियुक्त कोलंबिया से

होसे और गुस्तावो कोलंबिया की जेलों में भी रह चुके हैं.

होसे अवैध हथियार रखने और गुस्तावो क़त्ल करने के आरोप में सज़ा काट चुके हैं.

एडुएर्डो कोलंबिया में भी एक बड़ी चोरी को अंजाम दे चुके हैं. उनके गैंग ने एक होटल से 1.2 करोड़ रुपये क़ीमत के जेवर चुरा लिए थे.

गुस्तावो के पास एमबीए की डिग्री है जबकि गैंग की एकमात्र महिला सदस्य किम्बरले फॉरेन ट्रेड (विदेशी व्यापार) की छात्रा हैं.

गैंग में सिर्फ़ याइर ही अंग्रेज़ी बोल सकते हैं. वो पेशे से वेल्डर हैं और तीन बार अमरीका से कोलंबिया प्रत्यर्पित हो चुके हैं.

पाँचों अभियुक्त कोलंबिया के बोगोटा से हैं.

बैंगलुरू पुलिस विदेशियों पर ड्रग तस्करी और ड्रग बेचने के तो दर्जनों मुक़दमें दर्ज कर चुकी है लेकिन चोरी के मामले बहुत ज़्यादा नहीं है.

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "हम चोरियाँ करने वाले विदेशियों की सूची बना रहे हैं."

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English summary
Why did Colombian thieves target Bengaluru

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