UPSC रैंक होल्डर पूर्वा चौधरी के OBC कोटे पर क्यों छिड़ा है विवाद? क्या अवैध है उनकी पात्रता? समझिए पूरा मामला
UPSC rank holder Poorva Choudhary: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की रैंक होल्डर पूर्वा चौधरी पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नॉन-क्रीमी लेयर (OBC-NCL) कोटा के इस्तेमाल का दुरुपयोग करने के आरोप लग रहे हैं। UPSC परीक्षा में 533वीं रैंक पाने वाली पूर्वा चौधरी सोशल मीडिया पर OBC-NCL कोटे के इस्तेमाल को लेकर ट्रोल हो रही हैं। कई सोशल मीडिया यूजर ने उनकी वैधता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सोशल मीडिया यूजर दावा कर रहे हैं कि उनके पिका ओमप्रकाश सहारण, RAS अधिकारी हैं, उनका लाइफस्टाइल लैविश है और फिर भी उन्होंने ओबीसी-एनसीएल कोटा का इस्तेमाल किया है। हालांकि पूर्वा चौधरी के पिता ने ओबीसी-एनसीएल कोटे के गलत इस्तेमाल के दावों को खारिज कर दिया है। ऐसे में फिर एक बार ओबीसी में क्रीमी लेयर और नॉन क्रीम लेयर को लेकर बहस छिड़ गई है, ऐसे में आइए जानें ये क्या है? पूर्वा चौधरी को लेकर क्या बोल रहे हैं UPSC में आरक्षण व्यवस्था को लेकर और पारदर्शिता की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर पूर्वा चौधरी को लेकर क्या बोले यूजर्स?
एक यूजर ने लिखा, ''नाम~पूर्वा चौधरी , जाति ~ जाट, ओबीसी का सर्टिफिकेट लगाया और 533 भी रैंक यूपीएससी में हासिल कर ली
इनके पिताजी राजस्थान में अतिरिक्त जिला कलेक्टर है, कहां गया क्रीमी लेयर? मैं पहले भी कहता था और अब भी कह रहा हूं, ओबीसी में क्रीमी लेयर सिर्फ एक ढकोसला है।''
एक अन्य यूजर ने लिखा, ''ये है पूर्वा चौधरी, UPSC 2024 में इनकी 533 रेंक आया है। इनके पिताजी ADM है । इनके हाथ में जो हेंड बेग है उसका कीमत लगभग साढ़े 4 लाख रुपये की है। कार की तो बात ही ना करो। फिर भी मैडम जी OBC-NCL का फायदा उठा रही हैं। सालाना इनकम 8 लाख के कम होने चाहिए अगर आप NCL लगाते हैं। आप ही बताइए, क्या ये सही है? या पुजा खेड़कर की तरफ फर्जी सर्टिफिकेट बना कर NCL का लाभ लिया जाए।''
एक अन्य यूजर ने लिखा, ''पूर्वा चौधरी यूपीएससी 2024 रैंक-533, पिता आरएएस अधिकारी हैं , बेटी OBC-NCL लगा रही है, कोई बताएगा ये किसका हक खा रही है।''
एक अन्य यूजर ने लिखा, ''यूपीएससी में कोटा धोखाधड़ी, यूपीएससी उम्मीदवार पूर्वा चौधरी (एआईआर 533, रोल नंबर 1123694) ने ओबीसी एनसीएल लाभ का दावा किया, लेकिन उनकी शानदार जीवनशैली (मर्सिडीज एस-क्लास, डिजाइनर बैग, अंतरराष्ट्रीय यात्राएं) सवाल उठाती हैं। साथ ही, उनके पिता एडीएम (क्लास ए अधिकारी) हैं। स्पष्ट रूप से, ओबीसी-एनसीएल ऐसे अधिकारियों के बच्चों के लिए नहीं है।''
पूर्वा चौधरी पर लगे आरोपों पर पिता ने क्या कहा?
पूर्वा चौधरी के पिता ओमप्रकाश सहारण वर्तमान में कोटपुतली में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के रूप में तैनात राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी हैं। ओमप्रकाश सहारण ने कहा कि लोगों को यह समझ में ही नहीं आया कि नियम (ओबीसी-एनसीएल) कैसे काम करते हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, "40 वर्ष की आयु से पहले सीधी आरएएस भर्ती के मामले में, ओबीसी एनसीएल लाभ लागू नहीं होता है। मैं 44 वर्ष की आयु में आरएएस अधिकारी बन गया। इसलिए, यह दावा कि मेरी बेटी ने ओबीसी-एनसीएल प्रमाण पत्र का दुरुपयोग किया है, पूरी तरह से झूठ है।''
सहारन ने कहा कि यही नियम पदोन्नति या श्रेणी I की भूमिकाओं में नियुक्तियों पर भी लागू होता है। अगर 40 वर्ष से पहले किया जाता है, तो बच्चा ओबीसी एनसीएल के लिए अयोग्य हो जाता है। लेकिन मैंने तो ज्वाइन ही 44 साल में किया है।
उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स को फटकारते हुए कहा कि लोग झुंड मानसिकता का पालन करते हैं। यूपीएससी अभी एक ट्रेंडिंग टॉपिक है, और कई लोग इसका उपयोग व्यूज और फॉलोअर्स हासिल करने के लिए करते हैं, इसलिए मेरी बेटी के बारे में गलत बातें की जा रही हैं।
पूजा खेडकर पर भी लग चुका है OBC-NCL के दुरुपयोग का आरोप
यह पहली बार नहीं है जब ओबीसी एनसीएल विवाद सुर्खियों में आया है। 2023 में आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर (एआईआर 841) पर ओबीसी श्रेणी का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। उनके पिता के चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर 40 करोड़ रुपये की संपत्ति और 43 लाख रुपये की वार्षिक आय दर्ज की गई थी, जो स्वीकार्य सीमा से काफी अधिक थी। बाद में आरक्षण लाभ हासिल करने के लिए जाली प्रमाण पत्र बनाने के आरोपों के बाद उन्हें सिविल सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया था।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नॉन-क्रीमी लेयर और क्रीमी लेयर क्या है?
भारत में 'क्रीमी लेयर' ओबीसी समृद्ध और शिक्षित वर्ग को सूचित करता है। इस वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। आरक्षण का लाभ समाज के सिर्फ वंचित वर्ग के लोगों को मिले, इसके लिए क्रीमी लेयर का प्रावधान किया गया था। क्रीमी लेयर के जरिए ओबीसी के लोगों को आर्थिक आधार पर चिन्हित किया जाता है। इसकी शुरुआत 1993 में हुई थी। वर्तमान में आठ लाख से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर का हिस्सा माना जाता है। इस आय की सीमा को सरकार की ओर से समय-समय पर संशोधित की जाती है। इसके अलावा ग्रुप ए और ग्रुप बी सेवाओं में उच्च पदस्थ अधिकारियों के बच्चे भी क्रीमी लेयर में शामिल होते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर से लेकर कृषि भूमि के मालिक परिवारों को भी क्रीमी लेयर में शामिल किया गया है।
क्रीमी लेयर हर राज्य में अलग-अलग नहीं होती है और पूरे भारत में सभी राज्यों के लिए एक समान रहती है।क्रीमी लेयर के सदस्य सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों सहित ओबीसी के लिए आरक्षित लाभों का फायदा नहीं उठा सकते हैं। हालांकि क्रीमी लेयर की अवधारणा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति पर भारत में लागू नहीं होती है।
अब बात करते हैं नॉन-क्रीमी लेयर की...। ओबीसी की नॉन-क्रीमी लेयर, वे लोग होते हैं, जिनके पास शैक्षणिक योग्यता नहीं है। किसी परिवार का सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है तो उस परिवार को नॉन क्रीमी लेयर की श्रेणी में रखा जाता है। उनके बच्चों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है। हालांकि गैर-क्रीमी लेयर हर राज्य में अलग-अलग होती है। यह उस राज्य की सरकारी नौकरियों के लिए उस विशेष श्रेणी के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या पर आधारित होती है। वहीं क्रीमी लेयर हर राज्य में अलग-अलग नहीं होती है और पूरे भारत में सभी राज्यों के लिए एक समान रहती है।
अगर पूर्वा चौधरी के मामले में बात करें तो सरकारी मानदंडों के मुताबिक 40 वर्ष की आयु के बाद पदोन्नत किए गए ग्रुप ए अधिकारियों के बच्चे अभी भी आरक्षण लाभ के लिए पात्र हैं, बशर्ते परिवार की आय (कृषि आय को छोड़कर) सालाना 8 लाख रुपये से अधिक न हो। ऐसे में अब देखना होगा कि उनके परिवार की आय कितनी है।
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