भारत बंद है आम आदमी के लिये हानिकारक, गर्भवती महिलाएं रहें घर के अंदर
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बेंगलुरु। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज सुबह महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर मत्था टेका और फिर भारत बंद का आह्वाहन किया। लेकिन वे यह भूल गये कि जिस गांधी को वो नमन कर रहे हैं, बंद के दौरान प्रदर्शन उन्हीं की विचारधारा के विपरीत है। यही नहीं, गिरते रुपए और उठते पेट्रोल के दामों के खिलाफ कांग्रेस व सहयोगी पार्टियों का यह प्रदर्शन आम आदमी के स्वास्थ्य के लिये भी बेहद हानिकारक है, खास तौर से गर्भवती महिलाओं के लिये। हम गुजारिश करना चाहेंगे कि गर्भवती महिलाएं आज शाम तक घर के बाहर मत निकलें। क्योंकि पर्यावरण में आज ऐसी जहरीली गैसें मौजूद हैं, जो गर्भ में पल रहे बच्चे को भयानक नुकसान पहुंचा सकती हैं।

तस्वीर सुबह की
जहरीली गैसों पर बात करने से पहले एक नज़र उस तस्वीर पर, जो सुबह राजघाट से आयी। राहुल गांधी यहां राष्ट्रपिता को नमन करते दिख रहे हैं। लेकिन उन्हीं की विचारधारा के विपरीत प्रदर्शन आज देश भर की सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं।

कितने हानिकारक हैं ये जलते हुए टायर
अब बात उन जलते हुए टायरों की, जो प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध के रूप में सड़कों पर जगह-जगह जलाये जा रहे हैं। देश भर की सड़कों का आलम यह है, कि टायर जल रहे हैं और काला धुआं पूरे इलाके में छाया हुआ है। अब इस काले धुएं में कौन-कौन से रसायन मौजूद हैं, यह भी जानना जरूरी है। वो रसायन इस प्रकार हैं-
- सायनाइड
- कार्बन मोनोऑक्साइड
- सल्फर डाइऑक्साइड
- ब्यूटाडीन और सटाइरीन के उत्पाद

सायनाइड
यह बेहद जहरीला पदार्थ होता है। हवा में मौजूद सायनाइड के बीच जब आप सांस लेते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव फेफड़ों और हृदय पर पड़ता है। जो ऊतक श्वास प्रणाली के दौरान ऑक्सीजन का अवशोषण करते हैं, उनमें यह रासायनिक तत्व पहुंचता है और हमारे तंत्रिका तंत्र और हृदय पर बुरा प्रभाव डालता है।

कार्बन मोनोऑक्साइड
यह सबसे ज्यादा जहरीली गैसों में से एक है। जब यह हीमोग्लोबिन में मिलती है, तब कारबॉक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। यह उस हीमोग्लोबिन को जकड़ लेता है, जिसमें ऑक्सीजन होती है। अंतत: शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचने में रुकावटें आने लगती हैं। इसके फलस्वरूप सिर दर्द, उल्टी, चिड़चिड़ापन और कमजोरी आने लगती है। नवजात शिशु आहार लेना बंद कर देते हैं। अगर इस गैस की मात्रा अधिक हुई, तो यह हृदय और तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं को नष्ट कर सकती है। यही नहीं गर्भवती महिलाओं के गर्भ में शिशु पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है।

सल्फर डाइऑक्साइड
सल्फर डाइऑक्साइड के शरीर में जाने से हृदय और फैफड़ों पर घातक प्रभाव पड़ता है। यदि कोई गर्भवती महिला इसकी जद में आ जाती है, तो गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत तक हो सकती है। यह सबसे बड़ा कारण है, कि ऐसे प्रदर्शनों के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिये।

ब्यूटाडीन और स्टाइरीन के उत्पाद
ब्यूटाडीन और स्टाइरीन के रासायनिक उत्पाद सीधे तौर पर इंसान को मारते नहीं। बल्कि ये तत्व शरीर की कोशिकाओं में जाकर बैठ जाते हैं और आगे चलकर इनका प्रभाव दिखाई देता है। इसकी अधिकता के चलते तंत्रिका तंत्र पर घातक प्रभाव पड़ सकता है और तो और पैंक्रिएटिक कैंसर होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक
वनइंडिया से बातचीत में पर्यावरण विद एवं भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान-सीएसआईआर की पूर्व वैज्ञानिक डा. सीमा जावेद ने कहा, "प्रदर्शन के दौरान टायर आदि जलाना बेहद दु:खद है। एक तरफ सरकार हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को रोकने के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे प्रदर्शनों के दौरान टायर आदि जलाकर इसके विपरीत कार्य किया जा रहा है। खास बात यह है कि टायर के जलने पर नाइट्रोजन के ऑक्साइड भी उत्सर्जित होते हैं, जो बहुत ज्यादा हानिकारक हैं। लिहाज़ा मैं गुज़ारिश करूूंगी कि राजनीतिक पार्टियां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें।"
तो अब बताइये, ऐसे भारत बंद का समर्थन आप अभी करेंगे क्या? अपने कमेंट नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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