विपक्ष का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार कौन? गांधी के परपोते, चंद्रयान वैज्ञानिक या DMK नेता? ये लीडर रेस में हैं आगे

Vice President Candidate: विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक आज यानी मंगलवार (19 अगस्त) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर फिर बैठक करेगा। इस बैठक में उपराष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार तय करने पर चर्चा होगी। सोमवार को हुई बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी।

कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी है कि संसद में सभी विपक्षी दलों की बैठक मंगलवार 19 अगस्त को दोपहर 10,राजाजी मार्ग पर होगी।" सोमवार को हुई बैठक में जिन नामों पर चर्चा हुई, उनमें महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी और इसरो (ISRO) के पूर्व निदेशक मायलस्वामी अन्नादुरई शामिल हैं। विपक्ष की रणनीति है कि उपराष्ट्रपति पद पर किसी गैर-राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित चेहरे को उतारा जाए।

Vice President Candidate india Bloc

DMK ने सुझाया मायलस्वामी अन्नादुरई का नाम

एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। इसके जवाब में डीएमके ने मायलस्वामी अन्नादुरई का नाम सुझाया, जिसे कुछ दलों का समर्थन भी मिला। हालांकि, टीएमसी ने इस पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना था कि "तमिल बनाम तमिल" की लड़ाई नहीं होनी चाहिए। टीएमसी ने इसके बजाय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी का नाम आगे बढ़ाया।

मायलस्वामी अन्नादुरई भारत के पहले चंद्र मिशन 'चंद्रयान-1' के परियोजना निदेशक रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण ही उन्हें अक्सर "भारत के मून मैन" कहा जाता है।

तिरुचि सिवा का भी नाम चर्चा में

सीनियर DMK नेता तिरुचि सिवा का नाम भी चर्चा में है। विपक्षी INDIA ब्लॉक उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा का नाम आगे बढ़ा सकता है। हालांकि उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि अंतिम फैसला नेतृत्व करेगा। तिरुचि सिवा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी से हैं। वे फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। इसके साथ ही वे एक वक्ता और लेखक भी हैं।

सूत्रों का कहना है कि दक्षिण भारत की राजनीति को ध्यान में रखते हुए विपक्ष यह रणनीतिक फैसला ले सकता है। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए ने भी तमिलनाडु के सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में अगर तिरुचि शिवा की उम्मीदवारी तय होती है, तो उपराष्ट्रपति पद पर इस बार दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व लगभग तय माना जाएगा।

संसद में डीएमके की नीतियों और रणनीति की दिशा तय करने में उनकी बड़ी भूमिका रहती है। लंबे समय से वे राज्य और केंद्र स्तर पर पार्टी का चेहरा बने हुए हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में काम किया है और खासतौर पर सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकार जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है।

अगर इंडिया अलायंस उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित करता है, तो यह साफ संदेश होगा कि विपक्ष तमिलनाडु और दक्षिण भारत की राजनीतिक ज़मीन को एनडीए के लिए खाली छोड़ने के मूड में नहीं है।

गांधी के परपोते तुषार गांधी का भी नाम

तुषार गांधी ने 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इससे पहले 2017 में उनके चाचा गोपालकृष्ण गांधी यूपीए उम्मीदवार रहे थे लेकिन वे उपराष्ट्रपति चुनाव हार गए थे। तुषार अरुण गांधी एक भारतीय लेखक और अरुण मणिलाल गांधी के बेटे हैं।

NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना लगभग तय!

9 सितंबर को होने वाला उपराष्ट्रपति चुनाव बड़े पैमाने पर सीपी राधाकृष्णन के पक्ष में झुका हुआ माना जा रहा है। वह तमिलनाडु से बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं। उनकी उम्मीदवारी राज्य के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उनके नामांकन ने दक्षिण भारत की सियासत में पहले ही हलचल पैदा कर दी है। जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर दिया है और बीजेपी की सहयोगी एआईएडीएमके भी उनके साथ है।

संसद में एनडीए का पलड़ा भारी

रक्षा मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने भी कुछ विपक्षी नेताओं से संपर्क साधा है ताकि उपराष्ट्रपति चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हो सके।बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को घोषणा की थी कि एनडीए विपक्ष से सहमति बनाने की कोशिश करेगा। जहां तक आंकड़ों का सवाल है, एनडीए का पलड़ा साफ तौर पर भारी है। लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 786 है, जिसमें बहुमत के लिए 394 वोट चाहिए। एनडीए के पास दोनों सदनों में कुल 422 सदस्य हैं - 293 लोकसभा में और 129 राज्यसभा में।

विपक्षी INDIA ब्लॉक भले ही जीत की स्थिति में न हो, लेकिन वह इस चुनाव को संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर लड़ने की रणनीति बना रहा है। विपक्ष इस चुनाव में भी अपना उम्मीदवार उतारेगा ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और विपक्षी एकजुटता का संदेश दिया जा सके। 2022 की तरह, जब उन्होंने मार्गरेट अल्वा को मैदान में उतारा था। साथ ही विपक्ष इस तथ्य पर भी भरोसा कर रहा है कि इस चुनाव में पार्टियां अपने सांसदों को व्हिप जारी नहीं कर सकतीं, यानी सांसद अपनी मर्जी से किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकते हैं।

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