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कौन हैं कांस्टेबल शालिनी चौहान, जो अंडरकवर अजेंट बन 3 महीने कॉलेज में रहीं और रैगिंग केस का किया पर्दाफाश

Meet The Cop Shalini Chouhan

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    Indore MGM College के छात्र अरेस्ट, Shalini Chauhan ने छात्रा बनकर खोला रैगिंग केस | वनइंडिया हिंदी

    Who is Shalini Chouhan cops: आपने फिल्मों में अक्सर देखा होगा पुलिस को अंडरकवर एजेंट बनकर केस का खुलासा करने और पर्दाफाश करते हुए। ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश में भी देखने को मिला है, जहां एक 24 वर्षीय कांस्टेबल शालिनी चौहान अंडरकवर एजेंट बनकर तीन महीने इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स बनकर रहीं और रैगिंग केस का पर्दाफाश किया। इसी वजह से कांस्टेबल शालिनी चौहान सुर्खियों में बनी हुई हैं। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की कैंटीन में तीन महीने से अधिक समय तक किताब पढ़ने वाली तेज मुस्कान वाली लड़की का आना-जाना लगा रहा था, हंसमुख और खुशमिजाज, उसने आसानी से कैंटीन के लड़कों और लड़कियों से दोस्ती कर ली। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि शालिनी चौहान जिसे वह अपना दोस्त मानते थे, वो एक तेज-तर्रार पुलिसकर्मी है।

    शालिनी चौहान का ये पहला ऑपरेशन था

    शालिनी चौहान का ये पहला ऑपरेशन था

    कांस्टेबल शालिनी चौहान की ये कहानी किसी लेडी सिंघम से कम नहीं है। शालिनी चौहान का ये पहला अंडरकवर ऑपरेशन था। शालिनी चौहान इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एक नर्स की भूमिका में गई थी। 24 वर्षीय अंडरकवर पुलिस शालिनी चौहान ने रैगिंग मामले को सुलझाने के लिए पर्याप्त जानकारी एकत्र की और पांच महीने से अधिक समय से चल रहे इस केस को पर्दाफाश कर दिया। उसने उन 11 आरोपियों की पकड़वाने में मदद की, जिन पर इस साल जुलाई में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के एक समूह की क्रूर रैगिंग का आरोप लगाया गया था।

    जानिए कौन हैं कांस्टेबल शालिनी चौहान

    जानिए कौन हैं कांस्टेबल शालिनी चौहान

    शालिनी चौहान मध्य प्रदेश पुलिस में हाल ही में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त हुई है। इंदौर के संयोगितागंज थाने में तैनात शालिनी को हाल ही में पुलिस फोर्स में तैनात किया गया है। मिशन एमजीएम शालिनी चौहान का पहला ऑपरेशन था। शालिनी चौहान के पिता एक पुलिसकर्मी थे, जिनकी 2010 में मृत्यु हो गई। उसके बाद शालिनी की मां की भी एक साल बाद मौत हो गई। अपने पिता से प्रेरित होकर शालिनी चौहान पुलिस फोर्स में शामिल हुईं।

    जींस-टॉप पहने और किताबों से भरा बैग लिए शालिनी 3 महीने उस कॉलेज में रहीं

    जींस-टॉप पहने और किताबों से भरा बैग लिए शालिनी 3 महीने उस कॉलेज में रहीं

    जींस और टॉप पहने और किताबों से भरा बैग लिए एक नर्स की भूमिका में शालिनी तीन महीने उस कॉलेज में रहीं। इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में किसी को भी इस बात का शक नहीं हुआ कि वह एक पुलिस अधिकारी हैं। शालिनी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, ''हमारे प्रभारी अधिकारी तहजीब काजी और एसआई सत्यजीत चौहान, जो जांच का नेतृत्व कर रहे थे, ने उन छात्रों की ओर इशारा किया था जिन पर मुझे नजर रखनी थी। मैं हर रोज पांच-छह घंटे कैंटीन में, थोड़े-थोड़े अंतराल पर वक्त बिताती थी ताकि ऐसा लगे कि मैं भी काम कर रही हूं और पूरे दिन वहीं नहीं घूम रही हूं, और वहां तरह-तरह के लोगों से बात करती रहती थी। धीरे-धीरे मुझे उन सीनियर छात्र के बारे में पता चलता गया, जो फ्रेशर्स की रैगिंग कर रहे थे।''

    इतने वक्त में किसी को नहीं हुआ शक

    इतने वक्त में किसी को नहीं हुआ शक

    शालिनी चौहान ने कहा, 'इतने हफ्तों में किसी को ये एहसास नहीं हुआ कि उसका कोई पुलिस विभाग से लेना-देना है। किसी के पास कोई सुराग नहीं था।' इस के प्रभारी अधिकारी तहजीब काजी ने ऑपरेशन की सफलता का श्रेय अपनी टीम की कड़ी मेहनत को दिया है। उन्होंने कहा, ''यह पूरी तरह से सीक्रेट मिशन है। हमें सीनियर्स और जुनियर के बीच व्हाट्सएप के जरिए बातें होती थी।

    'ये करना मेरे लिए बिल्कुल आसान नहीं था...'

    'ये करना मेरे लिए बिल्कुल आसान नहीं था...'

    शालिनी ने कहा, ''ऐसा करना मेरे लिए बिल्कुल आसान नहीं था। मुझे गाइड किया गया था। मुझे बताया गया था कि कैसे मुझे सीनियर छात्रों के साथ बातें करनी हैं। ऐसे कई मौके आए जब मुझे छात्रों को अपना नकली नाम बताना पड़ा और ऐसा दिखावा करना पड़ा कि जैसे मुझे पता है कि क्या हो रहा है। मेरी कहानियां सुनकर, अन्य छात्र तुरंत बात करना शुरू कर देते थे।'' जिन 11 छात्रों की गिरफ्तारी हुई है, उनके बारे में शालिनी ने कहा, ''मैं बैठकर उन 11 छात्रों को देखती थी। उनका व्यवहार बहुत रूखा और आक्रामक था। शालिनी मध्य प्रदेश के देवास जिले की रहने वाली हैं।

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