कौन हैं Shubhanshu Shukla की पत्नी कामना शुक्ला? क्या करती हैं काम? पति को अशोक चक्र मिला तो छलके आंसू

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla: गणतंत्र दिवस 2026 का दिन देश के लिए गर्व से भरा रहा, जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। कर्तव्य पथ पर जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान दिया, स्टैंड में बैठी उनकी पत्नी कामना शुक्ला की आंखें भर आईं।

यह भावुक पल कैमरे में कैद हुआ और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर कौन हैं कामना शुक्ला, क्या करती हैं और शुभांशु की इस ऐतिहासिक कामयाबी में उनकी भूमिका क्या रही है।

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla

26 जनवरी की सुबह कर्तव्य पथ पर जब शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से नवाजा गया, तो यह सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि एक लंबी संघर्ष यात्रा की पहचान थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर ही इस सम्मान को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला भारत के पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री बन गए, जिन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनीं उनकी पत्नी कामना शुक्ला, जिनकी आंखों से खुशी और गर्व के आंसू छलकते नजर आए।

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla

कौन हैं कामना शुक्ला (Who Is Kamna Shukla)

कामना शुक्ला पेशे से डेंटिस्ट हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ। पढ़ाई से लेकर निजी जीवन तक उनका सफर बेहद सादा लेकिन प्रेरणादायक रहा है। वह न सिर्फ एक सफल डॉक्टर हैं, बल्कि एक मजबूत जीवनसाथी भी हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर शुभांशु शुक्ला का साथ निभाया है।

कामना और शुभांशु की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। दोनों की मुलाकात लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, अलीगंज में हुई थी। क्लास-3 से दोनों साथ पढ़ते रहे और धीरे धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई।

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla

कामना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुभांशु बचपन से ही शांत, शर्मीले और बेहद विनम्र स्वभाव के रहे हैं। परिवार की सहमति से दोनों ने साल 2009 में शादी की। आज दोनों एक खुशहाल परिवार के रूप में अपनी जिंदगी जी रहे हैं। शुभांशु और कामना का एक 6 साल का बेटा कियाश है।

क्या करती हैं कामना शुक्ला (Kamna Shukla Profession)

कामना शुक्ला ने स्कूल के बाद डेंटिस्ट्री की पढ़ाई की और इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाया। वह एक प्रोफेशनल डॉक्टर होने के साथ साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियां भी पूरी शिद्दत से निभाती हैं। दोनों का एक छह साल का बेटा कियाश है, जो उनकी जिंदगी का केंद्र है। कामना शुक्ला शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला और पिता शंभू दयाल शुक्ला के साथ लखनऊ में रहती हैं।

जब कामना शुक्ला को आई अंतरिक्ष से पहली कॉल

शुभांशु शुक्ला जब 26 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे, तो उन्होंने वहीं से अपनी पत्नी कामना को वीडियो कॉल की। यह पल ऐतिहासिक था, क्योंकि कामना पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्हें अंतरिक्ष स्टेशन से कॉल किया गया। इस बातचीत में शुभांशु ने अंतरिक्ष में चल रहे वैज्ञानिक प्रयोगों, अपनी दिनचर्या और पृथ्वी के अद्भुत नजारों के बारे में बताया। कामना ने कहा था कि पति की आवाज सुनना और यह जानना कि वह सुरक्षित हैं, उनके लिए बेहद भावुक अनुभव था।

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla

अंतरिक्ष मिशन से लौटने के बाद 16 जुलाई 2025 को शुभांशु शुक्ला की अमेरिका में पत्नी कामना और बेटे कियाश से मुलाकात हुई। इस दौरान पति पत्नी का एक दूसरे से लिपटते हुए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। उस समय भी देश ने देखा था कि इस सफलता के पीछे एक मजबूत पारिवारिक सपोर्ट कितना अहम होता है।

कौन हैं शुभांशु शुक्ला (Who Is Shubhanshu Shukla)

शुभांशु शुक्ला मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं। 12वीं के बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी की परीक्षा पास की और यहीं से ग्रेजुएशन किया। साल 2006 में भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट शामिल हुए। उन्होंने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे फाइटर जेट्स पर 2000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। बाद में उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।

साल 2019 में ISRO ने उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने रूस के यूरी गगारिन ट्रेनिंग सेंटर समेत NASA और ISRO के कई विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। अशोक चक्र सम्मान ने उनकी इस पूरी यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया है।

Shubhanshu Shukla Wife Kamna Shukla

शुभांशु शुक्ला की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उनकी पत्नी कामना शुक्ला की चुपचाप निभाई गई भूमिका बेहद अहम रही है। गणतंत्र दिवस पर छलके उनके आंसू इस बात का सबूत हैं कि यह सम्मान सिर्फ एक सैनिक का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की तपस्या का फल है।

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