कौन हैं वो महिला IAS अफसर, जो 6वीं क्लास में हो गई थीं फेल, लेकिन UPSC के पहले अटेम्प्ट में ही बनीं टॉपर

Success Story: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। कई उम्मीदवार परीक्षा की यूपीएससी की तैयारी सालों-सालों तक करते रहते हैं। आईएएस अधिकारी बनने के लिए हर साल लाखों यूपीएससी उम्मीदवार परीक्षा देते हैं।

लाखों में से महज कुछ लोग ही यूपीएससी परीक्षा पास कर पाते हैं। इनमें से कई ऐसे उम्मीदवार होते हैं, जिनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करने वाली होती है। हाल ही में आईपीएस मनोज शर्मा की जीवन पर आधिरत फिल्म 12th Fail को दर्शकों ने खूब सराहा है। आज की महिला IAS की कहानी भी मनोज शर्मा से मेल खाती है।

IAS Rukmani Riar

जिस तरह से मनोज शर्मा 12वीं क्लास में फेल होने के बाद भी आईपीएस बनते हैं। ठीक वैसे ही IAS अफसर रुक्मणी रियार (Rukmani Riar) भी स्कूल में 6वीं कक्षा में फेल हो गई थीं। हालांकि इन्हें मनोज शर्मा की तरह यूपीएससी में चार अटेम्प्ट नहीं देने पड़े थे।

रुक्मणी रियार अपने पहले ही अटेम्प्ट में ऑल इंडिया रैंक में दूसरा स्थान लाकर इतिहास रच दिया था। ऐसा कम ही बार देखने को मिलता है कि पहले ही अटेम्प्ट कोई टॉपर बन जाए।

IAS Rukmani Riar: आइए जानें रुक्मणी रियार के बारे में?

  • रुक्मणी रियार राजस्‍थान कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। साल 2011 में रुक्मणी ने यूपीएससी पास की थी। वर्तमान में रुक्मणी जयपुर ग्रेटर नगर निगम आयुक्‍त पद पर तैनात हैं।
  • रुक्मणी रियार के पति सिद्धार्थ सिहाग भी 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सिद्धार्थ सिहाग वर्तमान में संयुक्‍त सचिव मुख्‍यमंत्री के पद पर तैनात हैं। कपल का एक बेटा भी है।

स्कूल में पढ़ने में कुछ खास नहीं थी रुक्मणी रियार

  • रुक्मणी रियार स्कूल में प्रतिभाशाली छात्रा नहीं थी और कक्षा छह में फेल हो गई थी। रुक्मणी की प्राइमरी शिक्षा गुरदासपुर से हुई है। इसके बाद उन्होंने चौथी क्लास में डलहौजी के सेक्रेड हार्ट स्कूल में एडमिशन ले लिया था। जहां उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है।
  • 12वीं के बाद रुक्मणी ने अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट (TISS) से सामाजिक विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की और गोल्ड मेडलिस्ट बनीं।

कैसे हुआ UPSC की ओर झुकाव

TISS से पढ़ाई करने के बाद रुक्मणी ने मैसूर में अशोदा और मुंबई में अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ इंटर्नशिप पूरी की। एनजीओ के लिए काम करने के दौरान रुक्मणि को सिविल सेवा में रुचि हो गई, जिसके कारण उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने का सोचा।

हैरानी की बात है कि रुक्मणी अपने पहले ही अटेम्प्ट टॉपर बन गई थीं। आपको जानकर हैरानी होगी कि रुक्मणी यूपीएससी के लिए कोई अलग से कोचिंग नहीं की थी। रुक्मणी 6वीं से 12वीं तक एनसीआरटी की किताबों से पढ़ाई करती थीं। उसके बाद कॉलेज में वह मैगजीन, अखबार और किताबें पढ़ा करती थीं।

रुक्मणी की सफलता की कहानी उम्मीदवारों को प्रेरित करने वाली है। कक्षा 6 में फेल होने से लेकर यूपीएससी परीक्षा में रैंक 2 हासिल करने तक की, उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो शुरुआत में पढ़ाई में कमजोर होते हैं।

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