कौन है बलवंत सिंह राजोआना? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- इसे अब तक फांसी क्यों नहीं दी? आखिर किस हत्या का है दोषी

Balwant Singh Rajoana: पंजाब की राजनीति और आतंकवाद से जुड़ा एक ऐसा नाम, जो पिछले तीन दशकों से सुर्खियों में है-बलवंत सिंह राजोआना। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को सरकार से कड़ा सवाल पूछा कि जब उसे गंभीर अपराध में फांसी की सजा दी जा चुकी है, तो आखिर आज तक उसकी फांसी क्यों टली हुई है? दरअसल, बलवंत सिंह राजोआना पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले का दोषी है।

सुप्रीम कोर्ट में बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर सुनवाई हुई। उसकी याचिका में मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस संदीप मेहता ने केंद्र से तल्ख लहजे में पूछा-"जब कोर्ट ने फांसी की सजा दी थी, तो अब तक इसे क्यों नहीं दिया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?" इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष जल्द बताएंगे। फिलहाल, अगली सुनवाई 15 अक्टूबर तक टल गई है। ऐसे में आइए जानते हैं बलवंत सिंह राजोआना की पुरी कुंडली।

Balwant Singh Rajoana

Who is Balwant Singh Rajoana? कौन है बलवंत सिंह राजोआना?

बलवंत सिंह राजोआना का जन्म 23 अगस्त 1967 को लुधियाना जिले के राजोआणा कलां गांव में हुआ था। वह 1987 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुआ था, लेकिन जल्द ही उग्रपंथी विचारधारा से प्रभावित हो गया। कहा जाता है कि वह बब्बर खालसा इंटरनेशनल से सहानुभूति रखता था और पंजाब में 1990 के दशक में हुए पुलिस एनकाउंटरों और सिख युवाओं की कथित फर्जी मुठभेड़ों से बेहद नाराज था। उनका मानना था कि बेअंत सिंह के राज में हजारों निर्दोष सिख युवाओं को फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। यही गुस्सा उनके भीतर हिंसा का कारण बना।

बेअंत सिंह की हत्या: 1995 का वो दिन जिसने पंजाब हिला दिया

31 अगस्त 1995 -पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को चंडीगढ़ में एक आत्मघाती बम धमाके में मार दिया गया। इस विस्फोट में बेअंत सिंह समेत 16 और लोग मारे गए। हमला दिलावर सिंह ने किया था, लेकिन अगर वो नाकाम होता तो 'बैकअप बॉम्बर' के तौर पर बलवंत सिंह राजोआना तैयार बैठे थे। बाद में जांच में सामने आया कि राजोआना ने न सिर्फ इस हमले की साजिश में हिस्सा लिया, बल्कि खुद कोर्ट में खुले तौर पर कबूल भी किया कि वह इस षड्यंत्र का हिस्सा था।

Balwant Singh Rajoana

खुली अदालत में किया कबूलनामा, कहा-पछतावा नहीं

जनवरी 1996 में अदालत में राजोआना ने खुलेआम स्वीकार किया कि उन्होंने ही दिलावर सिंह के शरीर पर बम बांधे थे। उन्होंने जज से कहा था, "बेअंत सिंह खुद को शांति का फरिश्ता समझता था, लेकिन निर्दोष सिख युवाओं का कत्लेआम करवाया। इसलिए हमने उसे मारने का फैसला किया। मैं बेअंत सिंह की हत्या में शामिल था और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है। "

उसने वकील करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि इस सिस्टम से उसे कोई उम्मीद नहीं है। उसने यहां तक कहा कि मौत की सजा उसके लिए सजा नहीं बल्कि "आशीर्वाद" है।

Balwant Singh Rajoana

गिरफ्तारी और फांसी की सजा

राजोआना को दिसंबर 1995 में गिरफ्तार किया गया। 27 जुलाई 2007 को चंडीगढ़ की सीबीआई की विशेष अदालत ने राजोआना को फांसी की सजा सुनाई। गुरमीत सिंह, लखविंदर सिंह और शमशेर सिंह को उम्रकैद दी गई। 2012 में उसकी फांसी तय भी कर दी गई थी, लेकिन पंजाब में बड़े पैमाने पर विरोध के बाद इसे रोक दिया गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की। इसके बाद केंद्र सरकार ने फांसी पर रोक लगाने का आदेश दिया।

जेल में भूख हड़ताल और लगातार इंतजार

राजोआना पिछले 29 साल से जेल में बंद है। इस दौरान वह कई बार परिवारिक कारणों से पैरोल पर बाहर भी आया। 2024 में उसे भाई के भोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 3 घंटे की इजाजात दी गई थी। वहीं उसके वकील का कहना है कि इतने लंबे समय से जेल में रहने और दया याचिका पर कोई फैसला न होने के कारण अब उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाना चाहिए।

2016 और 2018 में राजोआना ने जेल में भूख हड़ताल भी की। उनकी मांग थी कि दया याचिका पर जल्दी फैसला किया जाए। 2018 में SGPC के आश्वासन के बाद उन्होंने हड़ताल खत्म की। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया (Commutation)। यानी अब राजोआना को फांसी नहीं दी जाएगी।

Balwant Singh Rajoana

विवाद और राजनीति

राजोआना का मामला हमेशा से ही राजनीतिक रंग लेता रहा है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा-सभी पार्टियां अलग-अलग समय पर इस पर बयान देती रही हैं। बेअंत सिंह के पोते और केन्द्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू खुले तौर पर कहते हैं कि राजोआना को फांसी दी जानी चाहिए। वहीं अकाली दल और एसजीपीसी उसकी सजा कम करने के पक्ष में कई बार केंद्र पर दबाव डाल चुके हैं।

सवाल अब भी वही है-क्या बलवंत सिंह राजोआना को कभी फांसी होगी या उसकी सजा उम्रकैद में बदली जाएगी? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अब और टालमटोल नहीं चलेगा। 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई में इस पर बड़ा फैसला आ सकता है।

बलवंत सिंह राजोआना का केस सिर्फ एक सजा या राहत का मामला नहीं है। यह पंजाब की राजनीति, धार्मिक भावनाओं और न्याय व्यवस्था -तीनों के टकराव की कहानी है। एक तरफ बेअंत सिंह के परिवार तो दूसरी तरफ सिख संगठनों का कहना है कि राजोआना जैसे कैदियों को "इंसाफ" मिलना चाहिए।

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