ऑपरेशन सिंदूर की असली शेरनियां: कौन हैं वो BSF की 7 बहादुर महिला, जिन्होंने 3 दिनों तक PAK को किया धुआं-धुआं
Operation Sindoor BSF Women: अगर आपको लगता है कि ऑपरेशन सिंदूर की बात आते ही महिला जवानों में बस कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ही सुर्खियों में थीं, तो रुकिए...आज हम आपको उन 7 बहादुर BSF महिला जवानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने तीन दिन और तीन रात तक सीमा पर मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तानी सैनिकों के पसीने छुड़ा दिए। इनका हौसला, इनकी रणनीति और इनकी कहानी आपको न सिर्फ गर्व से भर देगी, बल्कि यह भी साबित कर देगी कि अब सरहद पर सिर्फ पुरुष ही नहीं, भारत की बेटियां भी दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में इंटरनेशनल बॉर्डर पर तैनात युवा महिला BSF कर्मियों के लिए यह सचमुच अग्नि परीक्षा थी। लेकिन BSF की एक युवा महिला टीम ने पहली बार अग्रिम पोस्टों की कमान संभालकर इतिहास रच दिया। इस टीम का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट नेहा भंडारी ने किया। तीन दिन और तीन रातों तक चले भीषण संघर्ष में उन्होंने पाकिस्तान के सियालकोट स्थित ठिकानों पर लगातार जवाबी फायरिंग कर दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। चलिए जानते हैं इन 7 बहादुर महिला जवानों को...!

कौन हैं नेहा भंडारी: नेतृत्व की मिसाल
सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी तीन साल पहले ही बीएसएफ में शामिल हुई हैं। सिर्फ तीन साल की सेवा के भीतर ही नेहा भंडारी पहली महिला अधिकारी बन गईं, जिन्होंने किसी सक्रिय युद्ध स्थिति में नेतृत्व किया। उन्होंने न सिर्फ इस मौके को साहस और सूझबूझ से अपनाया, बल्कि जब उन्हें पीछे हटने का विकल्प दिया गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया।
नेहा ने BSF की टुकड़ी के साथ-साथ सेना की टुकड़ी का भी नेतृत्व किया और हथियारों की तैनाती व रणनीति से जुड़े कई फैसले लिए। उनके प्रशिक्षण पुरुष अधिकारियों के समान ही था और उन्होंने साबित कर दिया कि वो भी किसी से कम नहीं हैं।
नेहा भंडारी के माता-पिता भी CRPF में सेवा दे चुके हैं। नेहा भंडारी ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने हमें यह साबित करने का मौका दिया कि हम महिलाएं भी पुरुषों के समान सक्षम हैं। हमने तय किया था कि यह मौका हम नहीं गंवाएंगे।''
टीओआई के मुताबिक नेहा ने कहा, "हमें ठीक वैसी ही ट्रेनिंग दी गई थी, जैसे पुरुषों को दी जाती है। हमने ऑपरेशन सिंदूर में एक इंच भी पीछे नहीं हटने का फैसला किया है।''
नेहा भंडारी की टीम में 6 महिलाओं कौन थीं?
नेहा भंडारी की टीम में छह अन्य महिलाएं थीं-जिनमें से चार 2023 की नई भर्तियां थीं और दो अनुभवी महिला सैनिक थीं, जिन्हें 17 सालों से अधिक का अनुभव था।
पंजाब की मंजीत कौर और मलकित कौर ने अपनी अनुभवी सूझबूझ से बॉर्डर की रक्षा की। वहीं पश्चिम बंगाल की स्वप्ना राठ, पश्चिम बंगाल की शंपा बसाक, झारखंड की सुमी जेस और ओडिशा की ज्योति बानियन जैसी नई महिला जवानों ने कम अनुभव होने के बजाए भी, अद्भुत साहस दिखाया।
BSF के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल वरिंदर दत्ता ने नेहा के साहस और रणनीतिक नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह क्षण इतिहास में मील का पत्थर है, क्योंकि सेना में अब भी महिलाएं गैर-लड़ाकू भूमिकाओं में ही रखी जाती हैं।
BSF की 7 बहादुर महिलाओं के नाम
- 1. नेहा भंडारी
- 2. मंजीत कौर (पंजाब)
- 3. मलकित कौर (पंजाब)
- 4. स्वप्ना राठ (पश्चिम बंगाल)
- 5. शंपा बसाक (पश्चिम बंगाल)
- 6. सुमी जेस (झारखंड)
- 7. ज्योति बानियन (ओडिशा)












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