कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के 4 जज, जिन्होंने प्रेस कॉफ्रेंस से ला दिया भूचाल
Recommended Video

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चार मौजूदा जजों ने जिस तरह से आज प्रेस कांफ्रेंस करके हड़कंप मचा दिया है उसके बाद हर तरफ इसपर चर्चा हो रही है। इस प्रेस कांफ्रेंस में न्यायाधीश चेलमेश्वर, न्यायाधीश जोसेफ कुरियन, न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश एम भी लोकुर मौजूद थे। जजों ने अपनी इस प्रेस कांफ्रेंस में सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ संगीन आरोप लगाते हुए उनपर प्रशासनिक व्यवस्था को सही से नहीं चलाने का आरोप लगाया है। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि हमारे पास अब कोई विकल्प नहीं बचा बजाए देश के लोगों से बात करने के। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि 20 साल बाद लोग यह कहे कि देश की सर्वोच्च संस्था को बचाने के लिए हमने कुछ नहीं किया, उन्होंने अपनी अपनी आत्मा को बेच दिया, लिहाजा हमने लोगों के सामने मुद्दों को रखने का फैसला लिया है।

जस्टिस चेलमेश्वर
यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया है, ऐसे में इस प्रेस कांफ्रेस से भूचाल आ गया है। इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा विवादों में आ गए हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने ही मीडिया को सबसे अधिक समय के लिए संबोधित किया। जस्टिस चेलमेश्वर का जन्म 23 जुलाई 1953 को दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, उन्होंने मद्रास के लोयला कॉलेज से भौतिकी विषय से स्नातक की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह 1976 में कानून की पढ़ाई करने के लिए आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय चले गएष 13 अक्टूबर 1995 को वह एडिशनल एडवोकेट बने, जिसके बाद वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में जज बने। वर्ष 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

जस्टिस रंजन गोगोई
वहीं जस्टिस लोया मामले पर सवाल पूछे जाने पर कि क्या यह इस मुद्दे को लेकर हैं, पर हां कहने वाले जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में वकील बने और लंबे समय तक उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत की, जिसके बाद 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में स्थाई जज बने। इसके बाद 9 सितंबर 2010 को वह पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने और 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

जस्टिस मदन भीमराव लोकुर
प्रेस कांफ्रेंस में तीसरे वकील जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने का जन्म 31 दिसंबर 1953 को हुआ था, उन्होंने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री हासिल। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही 1977 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। जस्टिस मदन लोकुर ने दिल्ली के हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में वकालत की और 1981 में परीक्षा पास करकेक वह सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बन गए। जस्टिस लोकुर को सिविल, क्रिमिलन, संवैधानिक, राजस्व, सेवा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। 19 फ़रवरी 1999 को वह दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज नियुक्त किए गए, जिसके बाद जुलाई 1999 में वह दिल्ली हाईकोर्ट के स्थायी जज बने। 4 जून 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

जस्टिस जोसेफ कूरियन
प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूदा जस्टिस कुरियन जोसेफ की बात करें तो उनका जन्म 30 नवंबर 1953 में केरल में हुआ था, उन्होंने केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी, जिसके बाद उन्होंने 1979 से वह केरल हाई कोर्ट में वकलत शुरू कर दी। 12 जुलाई 2000 को वह केरल हाई कोर्ट के जज बने, वह दो बार केरल हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रहे 8 मार्च 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 29 नवंबर 2018 को वह रिटायर हो जाएंगे।
इसे भी पढ़ें- पढ़िए 4 जजों की वो सात पन्नों की चिट्ठी, जो उन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखी












Click it and Unblock the Notifications