कौन होते हैं 'यहोवा साक्षी', क्या ये ईसाई धर्म से जुड़े होते हैं? जिसकी प्रार्थना सभा में केरल में हुआ ब्लास्ट
What is Jehovah Witnesses: केरल में कोच्चि के कलामासेरी स्थित एक कन्वेंशन सेंटर में हुए विस्फोट के बाद 'यहोवा साक्षी' को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। असल में कलामासेरी में जमरा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में रविवार (29 अक्टूबर) सुबह जब बम धमाका हुआ, तो वहां 'यहोवा साक्षी' की प्रार्थना सभा हो रही थी।
केरल ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेने वाले शख्स डोमिनिक मार्टिन ने भी कहा है कि वो 16 सालों से 'यहोवा साक्षी' के सदस्य थे। लेकिन पिछले 6 सालों से वह सक्रिय मेंबर बनें और उनको ये महसूस हुआ कि, 'यहोवा साक्षी' वाले राष्ट्र विरोधी बातें करते हैं। ऐसे में अब हर कोई ये जानना चाहता है कि 'यहोवा साक्षी' क्या है और इसका इतिहास क्या है?

Who Are Jehovah Witnesses: कौन होते हैं 'यहोवा साक्षी' वाले लोग?
यहोवा के साक्षी एक ईसाई धार्मिक संप्रदाय है, जो अपनी विशिष्ट मान्यताओं और प्रथाओं के लिए जाना जाता है। उनकी उपस्थिति 240 से अधिक देशों में है। यहोवा वाले पवित्र त्रिमूर्ति, यानी ईश्वर पिता, पुत्र (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा के सिद्धांत में विश्वास नहीं करते हैं।
यहोवा के साक्षी लोग, यहोवा की पूजा "एक सच्चे और सर्वशक्तिमान ईश्वर, निर्माता" के रूप में करते हैं। वे परमेश्वर के नाम के महत्व में विश्वास करते हैं, जिसे वे "यहोवा" कहते हैं, और वे बाइबल की शाब्दिक व्याख्या का पालन करते हैं। यहोवा के साक्षी समूह ऐसा मानते है कि केवल यहोवा ही एकमात्र भगवान है और उसने ही सबकुछ बनाया है। इसलिए सारी पूजा और प्रार्थनाएं, बस उसी के लिए होनी चाहिए।
यहोवा के साक्षियों को उनके घर-घर जाकर प्रचार करने, सैन्य सेवा में भाग लेने से इनकार करने और कुछ चिकित्सा उपचारों पर उनके रुख के लिए पहचाना जाता है। उनके पास नियुक्त पुजारी भी नहीं हैं। वे क्रिसमस या ईस्टर नहीं मनाते, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे त्योहार बुतपरस्त परंपराओं से प्रेरित हैं।
यहोवा के साक्षी का मानना है कि दुनिया का अंत निकट है। इस संप्रदाय के दुनिया भर में लाखों अनुयायी हैं।
Jehovah Witness History: यहोवा साक्षी का क्या है इतिहास?
'यहोवा साक्षी' की उत्पत्ति 18वीं शताब्दी में संयुक्त राज्य अमेरिका में मानी जाती है। इस आंदोलन की स्थापना बाइबिल के छात्र और उपदेशक चार्ल्स टेज रसेल ने की थी, जिन्होंने 1870 के दशक में बाइबिल की भविष्यवाणी और सिद्धांत की अनूठी व्याख्याएं विकसित की थीं। उन्होंने 1884 में सिय्योन वॉच टावर ट्रैक्ट सोसाइटी की स्थापना की, जिसे बाद में वॉच टावर बाइबिल एंड ट्रैक्ट सोसाइटी के नाम से जाना गया। जिसने आंदोलन की प्रकाशन और संगठनात्मक शाखा के रूप में कार्य किया।
चार्ल्स टेज रसेल के नेतृत्व में, आंदोलन ने विशिष्ट सैद्धांतिक विश्वास विकसित किया और 1916 में उनके निधन के बाद इसका , नेतृत्व जोसेफ रदरफोर्ड ने किया था। जिन्होंने महत्वपूर्ण संगठनात्मक और सैद्धांतिक परिवर्तन किए।
Jehovah Witness Members in India: यहोवा साक्षी के भारत में सदस्य?
अब केरल में यहोवा के साक्षियों के लगभग 4,000 सदस्य हैं। केरल बम धमाके के वक्त कन्वेंशन सेंटर 2000 से ज्यादा लोग मौजूद थे।












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