Anna Hazare: अपने अनशन से केंद्र की सत्ता हिलाने वाले अन्ना हजारे अब कहां हैं? क्या कर रहे हैं?
Anna Hazare: महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के बिंगर के रालेगांव सिद्धि गांव में अन्ना हजारे का जन्म हुआ था। छह भाई-बहनों में सबसे बड़े रहे। फूल की दुकान पर काम कर परिवार का बोझ संभाला। फिर फौज में सेवा की।
Anna Hazare: महात्मा गांधी जी की सोच और अहिंसात्मक नीति का अनुपालन कर भारत की राजनीति में आगे बढ़ने वाले अन्ना हजारे का आज यानी 86वां जन्मदिन है। वर्तमान समय में दुनिया में सच्चे समाज सेवक के रूप में पहचान बना चुके अन्ना हजारे एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
छह भाई-बहनों में अन्ना सबसे बड़े हैं। उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ, ऊपर से गरीबी। अन्ना हजारे का जीवन काफी संघर्षमय रहा। भ्रष्ट मंत्रियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्ना हजारे ने अपने अनशन से केंद्र की सत्ता को हिला कर रख दिया था। आइए आपको रूबरू करते हैं अन्ना हजारे से....

गरीब परिवार में जन्में, फूल की दुकान पर किया काम
15 जून 1937 में महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के बिंगर के रालेगांव सिद्धि गांव में किसन बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे का जन्म हुआ। छह भाई-बहनों में अन्ना सबसे बड़े हैं। पिता बाबूराव हजारे आयुर्वेद आश्रम अकुशल श्रमिक के रूप में काम किया करते थे। वहीं, मां लक्ष्मीबाई गृहणी थीं।
भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के नाते अन्ना हजारे के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी भी रही। एक रिश्तेदार की मदद से मुंबई में अन्ना हजारे ने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद दादर रेलवे स्टेशन पर एक फूल की दुकान में 40 रुपए की तनख्वाह में काम किया। धीरे-धीरे अपनी दुकान खोल ली।
फौज में हुए भर्ती, फिर खाई समाज सेवा की कसम
अन्ना हजारे के दादा फौज में भिंगनगर में कार्यरत थे। 1960 में अन्ना अपने दादा की तरह फौज में ट्रक ड्राइवर के रूप में भर्ती हुए। अपने कठिन परिश्रम से सैनिक हो गए। 1965 को भारत-पाकिस्तान युद्ध में खेमकरण सीमा पर अन्ना हजारे की बटालियन पर हमला हुआ। जिसमें सभी सैनिकों की मौत हो गई। जिसमें अन्ना हजारे ही अकेले बचे।
अपने गांव की पलटी काया, लिया आजीवन विवाह का फैसला
साल 1970 में आजीवन विवाह न करने का फैसला लिया। 1975 में अन्ना हजारे ने फौज की नौकरी से वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया। उन्होंने सूखा प्रभावित रालेगांव सिद्धि यानी अपने गांव के लिए काम शुरू किया। उन्होंने अपने गांव की पूरी काया पलट दी। सूखा प्रभावित रालेगांव सिद्धि गांव में पानी और बिजली की समस्या को दूर किया।
इसके लिए उन्होंने सबसे पहले गांव के लोगों को जोडा। फिर पानी की समस्या को दूर करने के लिए नहर बनाने और गड्ढे खोदकर बारिश के पानी को जमा किया। उसके बाद बिजली की समस्या के लिए गांव में सौर ऊर्जा और गोबर गैस का सहारा लिया।
पेंशन करते हैं दान, मंदिर में निवास तो हॉस्टल में जलपान
अन्ना हजारे एक ऐसी शख्सियत है, जिन्होंने देश की सेवा के लिए अपनी सब कुछ त्याग दिया। उन्होंने रालेगण सिद्धि गांव में अपनी जमीन को बच्चों के लिए हॉस्टल बनाने के लिए दान कर दिया। इतना ही नहीं, फौज से वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने के बाद मिलने वाली पेंशन भी लोगों की मदद के लिए दान करते हैं। आज भी अन्ना हजारे गांव के एक मंदिर में रहते हैं और हॉस्टल में बनने वाला खाना खाते हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज
1990 में समाजसेवा और समाज कल्याण के कार्य को देखते हुए अन्ना हजारे को पद्मश्री से सम्मान मिला। इसके बाद उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया। 1991 में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। महाराष्ट्र की शिवसेना और बीजेपी सरकार के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को हटाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल की।
1997 में अन्ना ने सूचना के अधिकार अधिनियम के समर्थन में मुंबई में अभियान चलाया। 2003 में एक बार फिर अनशन पर बैठे। वहीं, 2005 में कांग्रेस सरकार के 4 भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई। साल 2011 में अन्ना ने जन लोकपाल विधेयक (नागरिकता लोकपाल विधेयक) के लिए अनशन आरम्भ किया। लेकिन, आंदोलन बिना नतीजे के खत्म हो गया और अन्ना अपने गांव लौट गए।
एक नजर में समझें
- 1937- महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के बिंगर के रालेगांव सिद्धि गांव में किसन बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे का जन्म हुआ।
- 1960- अन्ना अपने दादा की तरह फौज में ट्रक ड्राइवर के तौर पर भर्ती हुए।
- 1965- भारत-पाक युद्ध में खेमकरण सीमा पर ट्रक चलाते समय अन्ना पर हमला हुआ। जिसमें वे अकेले ही बचे।
- 1970- आजीवन विवाह न करने का फैसला लिया।
- 1975- अन्ना हजारे ने फौज की नौकरी से वॉलंटरी रिटायरमेंट लिया। सूखा प्रभावित रालेगांव सिद्धि में काम शुरू किया।
- 1990- समाजसेवा और समाज कल्याण के कार्य को देखते हुए अन्ना हजारे को पद्मश्री से सम्मान मिला।
- 1991- महाराष्ट्र की शिवसेना- बीजेपी सरकार के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को हटाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल की।
- 1992- पद्म विभूषण से नवाजा गया
- 1997- अन्ना ने सूचना के अधिकार अधिनियम के समर्थन में मुंबई में अभियान चलाया।
- 2003- अन्ना को अनशन पर बैठे।
- 2005- उन्होंने कांग्रेस सरकार के चार भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई।
- 2011- अन्ना ने जन लोकपाल विधेयक (नागरिकता लोकपाल विधेयक) के लिए अनशन आरम्भ किया।












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