Exit poll 2023: कब देश में हुआ था पहला एग्जिट पोल, कैसे जुटाए जाते हैं आंकड़े? जानें पूरा इतिहास
देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में वोटिंग हो चुकी है। तेलंगाना में भी आज शाम वोटिंग थम जाएगी। वोटिंग खत्म होते ही, देश के कई समाचार चैनल अपने-अपने एग्जिट पोल जारी करेंगे।
न्यूज चैनल्स के अलावा भी कई एजेंसियां हैं। जो डाटा को एनलाइज़ करती हैं और अपने एग्जिट पोल निकालती हैं। हालांकि एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते हैं। लेकिन काफी हदतक चुनाव की तस्वीर साफ कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, एग्जिट पोल कब शुरूआत हुई और इनके दावों का आधार क्या होता है?

क्या हैं एग्जिट पोल?
एग्जिट पोल सदैव मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिखाए जाने वाले सर्वे होते हैं। जिन्हें मतदान प्रक्रिया पूरी होने के 1 घंटे बाद ही इनका प्रसारण किया जा सकता है। एग्जिट पोल मतदान प्रक्रिया के दौरान लोगों से ली गई राय के आधार पर किया गया एक विश्लेषात्मक सर्वे होता है। जो यह बताने की कोशिश करता है कि, चुनाव में किस दल को कितनी सीटें मिल सकती हैं।
कहां हुआ था पहला एग्जिट पोल
नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वान डैम को एग्जिट पोल का जनक माना जाता है। सबसे पहली बार इसे 15 फरवरी, 1967 में कराया गया था। उस समय नीदरलैंड में हुए चुनाव में उनका आकलन बिल्कुल सटीक रहा था। भारत में एग्जिट पोल की शुरूआत का श्रेय इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के प्रमुख एरिक डी कोस्टा को दिया जाता है। उस समय इन सर्वे को मैगजीन के माध्यम से प्रकाशित किया जाता था।
लेकिन टीवी पर एग्जिट पोल ने दस्तक 1996 में दूरदर्शन पर दी। 1996 में हुए लोकसभा चुनावों में सीएसडीएस ने एग्जिट पोल जारी किया था। जिसमें उसने अनुमान लगाया था कि, इस बार खंडित जनादेश आ सकता है। जब चुनाव नतीजे आए तो उनका सर्वे काफी हद तक सटीक रहा। देश में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। 1996 में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर सामने आई, लेकिन बहुमत से दूर रही। पीएम अटल बिहारी बाजपेयी बने लेकिन 13 दिन बाद सरकार गिर गई।
1998 आते आते लोकसभा चुनावों में लगभग हर प्रमुख समाचार चैनलों ने एग्जिट पोल किए,लेकिन एग्जिट पोल सीट के सटीक आंकड़े नहीं निकाल पाए थे। लेकिन एग्जिट पोल जनता के बीच काफी पॉप्युलर हो गए। चुनावों के बाद जनता में इन सर्वे को लेकर जबरदस्त क्रेज रहता था। 2004 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल बेहद निराशाजनक साबित हुए। वे फिर से सीटों का सही अनुमान नहीं लगा सके।
कैसे इकट्ठे किए जाते हैं एग्जिट पोल के आंकड़े?
चुनाव के दौरान जनता की राय को समझने के लिए अलग-अलग तरीके से आंकड़े इकट्ठे किए जाते हैं। इसके लिए प्री पोल, एग्जिट पोल और पोस्ट पोल ओपिनियन सर्वे किए जाते हैं। तीनों सर्वे के तरीके एक दूसरे से अलग हैं। एग्जिट पोल में वोट डालने के बाद मतदाता जब बाहर निकलता है, तो उससे कुछ सवाल पूछे जाते हैं और उसके मन को टटोलने की कोशिश की जाती है। जिससे ये पता लगाने की कोशिश की जाती है कि, वोटर किस दल वोट देकर आ रहा है। बूथ से जुटाए गए इन आंकड़ों का विश्लेषण कर चुनाव खत्म होने के बाद एग्जिट पोल जारी किया जाता है।
कब तय किए गए एग्जिट पोल को लेकर नियम
1998 में चुनाव पूर्व सर्वे अधिकांश टीवी चैनलों पर प्रसारित किए गए। जिन्हें जनता की ओर से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने इन सर्वे को लेकर आपत्ति जताई और प्रतिबंध लगा दिया। 1999 में चुनाव आयोग द्वारा ओपिनियन पोल तथा एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया गया। ईसी के इस प्रतिबंध के खिलाफ एक अखबार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को निरस्त कर दिया।
लेकिन वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग उठने लगी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने प्रतिबंध के संदर्भ में कानून में संशोधन के लिए तुरंत एक अध्यादेश लाए जाने के लिए कानून मंत्रालय को पत्र लिखा। उसके बाद जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में संशोधन करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान जब तक अंतिम वोट नहीं पड़ जाता, तब तक किसी भी रूप में एग्जिट पोल का पब्लिश या प्रसारित नहीं किए जा सकते हैं।












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